VPS New Bulletin : वीपीएस का पुराने धारा-धोरण से ग्रे खरीदने का समर्थन


सोमवार से पुराने धारा-धोरण से ग्रे खरीदेंगे वीपीएस के सदस्य व्यापारी, रविवारीय बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय

(धर्मेन्द्र मिश्रा)

सूरत। व्यापार प्रगति संघ, सूरत व्यापार एवं व्यापारी हित के लिए सदैव तत्पर है, यही कारण है कि आज संस्था के साथ  तकरीबन 25 हजार से अधिक व्यापारी जुड़ गये हैं। व्यापारी एवं व्यापार हित के लिए प्रत्येक रविवार को रामचौक स्थित शिवाजी गार्डन में सुबह 8 से 9 बजे तक एक मीटिंग आहूत की जाती है, जिसमें व्यापारी अपनी समस्या एवं सुझाव आदान-प्रदान करते हैं।

रविवार, 5 मई 2019 को भी साप्ताहिक बैठक संपन्न हुई, जिसमें संघ के पदाधिकारियों के अलावा पंच, स्वयंसेवक और पीडि़त व्यापारी उपस्थित रहे। संघ की महासभा में व्यापारियों ने अपनी भुगतान संबंधित समस्याएं बताई। वीपीएस पंचों द्वारा उनका निराकरण बताया गया। साथ ही वीपीएस की मदद से आये भुगतान की जानकारी व्यापारियों ने दी।

ग्रे खरीद के पुराने धारा-धोरण का समर्थन

रविवार की बैठक में सूरत के कपड़ा बाजार में ग्रे खरीदने के धारा-धोरण संबंधी मामला उठा। इस विषय पर चर्चा के बाद सर्वसम्मति से तय किया गया कि वीपीएस ग्रे खरीदने के पुराने धारा-धोरण का समर्थन करता है। ऐसे में एक प्रस्ताव पारित करके फैसला किया गया कि सोमवार ०६ मई, २०१९ से वीपीएस के सदस्य व्यापारी ग्रे खरीद वटाव पद्घति से ही खरीदेंगे।

वीपीएस के संस्थापक संजय जगनानी ने व्यापारियों की मांग को ध्यान में रखते हुए ग्रे खरीद के धारा धोरण पर विचार-विमर्श किया। जिसमें सभी व्यापारियों ने सर्वानुमति से पुराने धारा धोरण से ही ग्रे खरीदने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि हम सभी व्यापारी 6 मई 2019 से जो भी ग्रे कपड़ा खरीदेंगे वह 5 प्लस 1 एवं 10 दिन की भुगतान की शर्त पर ही खरीदेंगे। वीवर भाई ग्रे कपड़े का भाव पुरानी धारा जो वापस लागू हो गया है, उसे ध्यान में रखकर ही बतावें। सभी ग्रे कपड़े का पेमेन्ट आज से लागू धारे से ही देने वाले हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं की इच्छा शक्ति से अपने धारे पर व्यापारी अडिग रहें और अपने धारे से ही ग्रे खरीदें। जरूरत पड़ने पर 15 दिन तक ग्रे नहीं खरीदने का संकल्प मन में ले लेंगे तो आपका धारा मान्य हो जाएगा। ईमानदारी से व्यापार हित में लिये गये संकल्प शुभ होते हैं। सभी व्यापारी अपने-अपने एजेंट एवं वीवर भाइयों को नये धारे के बारे में फोन वाट्सअप कर जानकारी दें।

एनटीएम मार्केट के व्यापारी देवेन्द्र गुप्ता ने बताया कि पहले व्यापारी 6 टका वटाव डिस्काउंट काटकर 10-15 दिन में वीवर को भुगतान करता था। यह बटाव जीएसटी के समय से खत्म हो गया। जिससे वीवरों की चांदी हो गई और ट्रेडर्स लूटा जा रहा  है। व्यापारियों का कहना है कि रेट वीवर का कुछ भी हो, बिल के नीचे हमें 6 प्रतिशत डिस्काउंट चाहिए, जिससे हमारी लागत निकालने में सुविधा हो सके।

वीपीएस के अरविन्द गाडिया ने कहा कि ग्रे खरीद पर लिये गये निर्णय के अनुसार जो व्यापारी सबसे पहले वटाव पद्घति यानी पुराने धारा-धोरण से ग्रे खरीदी कर उसका बिल वाट्सएप पर रखेगा, संघ द्वारा उसका सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यापार हित के लिए यानी व्यवसाय को दुरुस्त करने के लिए कुछ संयम जरुरी है।

बकाया वसूली के लिये तकादा जारी रखें

वीपीएस के अशोक बाजारी, महावीर अग्रवाल एवं अशोक गोयल ने बकाया वसूली के मुद्दे पर कहा कि बाकी रुपये का तकादा नियमित जारी रखें। सामने वाले व्यापारी की बातों में न आये, बल्कि लिखित कार्रवाई करते रहें। पार्टी के मना करने के बावजूद चेक रिटर्न के तीन माह होने से पहले वकील के माध्यम से 138 का केस अवश्य करें। विनती पत्र भी भेजिये, वकील से नोटिस भी भेजिये। कुछ करोगे तो ही रिजल्ट आएगा।

वीपीएस के ओमप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि बीते सप्ताह एम-2 मार्केट में 21, अभिषेक मार्केट में 20 एवं मोटी बेगम वाड़ी के मार्केटों में 30 नये पंच बनाये गये हैं।  उन्होंने कहा कि पंचों के माध्यम से संघ को सशक्त बनाना तथा व्यापारियों एवं व्यापार हित में तत्पर रहना है, ताकि व्यापारी सरलता से अपना व्यापार कर सकें।

उन्होंने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य शांति प्रिय व्यापारियों के व्यापार में आने वाली बाधा को हर संभव दूर करना एवं इनके फंसे हुए रुपये निकलवाने में कानूनी तौर पर मदद करना है।

कोहिनूर मार्केट के व्यापारी गौरव खन्ना ने बताया कि हम व्यापारियों को वीपीएस जैसा एक मंच मिला है, जो व्यापारी एवं व्यापार हित की बात करता है। सूरत के कपड़ा बाजार में बदलाव की जरुरत है।

 

 

व्यापारियों की प्रतिक्रियाएं एवं सुझाव

नीचे सूरत के कुछ ऐसे व्यापारियों की प्रतिक्रियाएं दी गई हैं, जिनका भुगतान लंबे समस से बकाया था और वीपीएस के प्रयासों से उन्हें भुगतान प्राप्त करने में सफलता मिली।

मिलेनियम मार्केट के व्यापारी ने बताया कि एजेंट के माध्यम से केरल के व्यापारी को माल भेजा था। समय से भुगतान करने की बात करने वाले व्यापारी व एजेंट दोनों फोन उठाना बंद कर दिये। वीपीएस ने इस मामले को पंच महेश पाटोदिया को सौंपा है।

गोपी मार्केट के व्यापारी ने बताया कि हरीकृपा मार्केट के एजेंट के माध्यम से तमेदा (नंदुरबार, महाराष्ट्र) के व्यापारी को 1.77 लाख का माल दिया, जो व्यापारी पेमेन्ट नहीं दे रहा है और एजेंट भी ठीक से जवाब नहीं दे रहा है। इस मामले को वीपीएस के पंच राजेन्द्र कानोडिया देख रहे हैं।

अभिषेक मार्केट के व्यापारी मनोजभाई ने बताया कि रिंग रोड स्थित ट्रेड सेन्टर के एक व्यापारी के यहां रुपये फंसे है। यह व्यापारी रुपये देने की बजाय उल्टा जवाब देता है। वीपीएस ने पार्टी के खिलाफ पुलिस में शिकायत करने के साथ ही उसके दुकान के सामने धरना देने की सलाह दी। जरुरत पडऩे पर वीपीएस की टीम भी दुकान के सामने बैठेगी।

मिलेनियम र्मोट के व्यापारी सुखलाल जैन ने बताया कि सूरत के एजेंट के माध्यम से अहमदाबाद के व्यापारी के यहां रुपये फंसे हैं। व्यापारी फोन नहीं उठाता और एजेंट बोलता है पेमेन्ट करा दूंगा, लेकिन कराता नहीं। वीपीएस ने एजेंट पर दबाव बनाने की सलाह दी।

आशीर्वाद टेक्सटाइल मार्केट, सारोली के व्यापारी कन्हैयाभाई ने बताया कि महाराजगंज (सिवान, बिहार), कानपुर एवं कोलकाता के व्यापारियों के साथ 2013-14 से व्यापार कर रहा था। तीनों व्यापारियों के यहां रुपये फंसे हैं। वीपीएस के पंच घनश्याम माहेश्वरी यह मैटर देख रहे हैं।

न्यू टेक्सटाइल मार्केट के व्यापारी चंद्रकांत ने बताया कि जश मार्केट के एजेंट के माध्यम से लखनऊ की दो पार्टियों के यहां 1.38 लाख रुपये फंसे हैं। यह मैटर वीपीएस के पंच मनोज अग्रवाल देख रहे हैं।

मोटी बेगम वाडी स्थित जयलक्ष्मी मार्केट के व्यापारी चौथमल ने बताया कि मलाड मुंबई के व्यापारी के यहां 10 लाख रुपये फंसे हैं। यह मामला पंच संजय राजपूत देख रहे हैं।

मिलेनियम मार्केट के व्यापारी सुरेश धामेलिया का इलाहाबाद के व्यापारी के यहां रुपये अटका है। यह मामला पंच सुरेन्द्र खेतान देख रहे हैं।

 

वीपीएस के सहयोग से सफलतापूर्वक बकाया वसूली के मामले

पंच प्रकाश बेरीवाल ने बताया कि वीपीएस के मदद से जयपुर के व्यापारी के यहां अटके दो लाख रुपये में 20 हजार आया और शेष रुपये भी देने के लिए तैयार है।

व्यापारी पंकजभाई ने बताया कि रेगुलर तकादा करते रहने से 8 साल पुराना अटका रुपया आया।

व्यापारी अशोक अरोड़ा ने बताया कि वर्ष २०१३ से उनका कानपुर की एक फर्म के यहां ३९६०० रुपये बकाया थे। वीपीएस के कन्वीनर बाबूराम अग्रवाल की मदद से इस मामले में कार्रवाई करने पर ३५००० रुपये में मामले के निपटान पर पार्टी राजी हो गई और आगे की तारीख के चैक भी मिल गये। अशोकजी ने वीपीएस के प्रयासों की सराहना की है।

वीपीएस का अनुभव है कि जब मामले के निपटान के लिये कोई पार्टी बकाया राशि को टुकडों में बांट कर आगे की तारीखों के चैक देती है तो बहुतया ऐसा वास्तविक भुगतान के इरादे से ही किया जाता है और चैक पास भी होते हैं।

रघुकुल मार्केट के भगवती साड़ी प्रा. लि. के संचालक ने वीपीएस के अध्यक्ष संजय जगनानी का आभार माना है। उनका तीन वर्ष पुराना २ लाख रुपये का बकाया की वसूली वीपीएस की मदद से संभव हो पाई है।

रानीसती कोम्यूकेशन के प्रतिनिधि ने बताया कि उनका पिछले ६ महीने से एक व्यापारी के यहां पेमेन्ट बकाया था। वो उनका फोन भी नहीं उठाते थे और बकाया वसूली की तमाम आशा छोड़ चुके थे। तभी वीपीएस के अरविंद गाड़िया से चर्चा की और व्यापारी से मोबाईल पर बात करने पर ४ दिनों के पश्चात ही पेमेन्ट खाते में जमा करवा दिया गया। उन्होंने वीपीएस टीम का आभार माना है।

सूरत टेक्सटाईल मार्केट के संतगुप्ता साड़ी के प्रतिन‌िधि ने बताया है कि वीपीएस की सहायता से उनका दो वर्ष पुराना ६० हजार रूपये का बकाया पेमेंट आ गया है।

इस प्रकार देखा जा सकता है कि व्यापार प्रगति संघ के प्रयासों से सही मायनों में सूरत के व्यापारियों को लाभ हो रहा है और उनकी डूबती पूंजी फिर से वर्किंग कैपिटल बनकर व्यापार में लग रही है।


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व्ययापार प्रगति संघ के सदस्य बनें। यदि आपके पास कोई सुझाव हैं तो अगली रविवारीय बैठक में अवश्य दें।


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