आज होगी मध्यस्थों के बीच सुनवाई


भारत की जनता खासकर हिन्दू धर्मावलंबियों के द्वारा चिर प्रतीक्षित अयोध्या मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
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भारत की जनता खासकर हिन्दू धर्मावलंबियों के द्वारा चिर प्रतीक्षित अयोध्या मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत ने अपनी वेबसाइट पर एक नोटिस पोस्ट किया गया है। इसके मुताबिक पांच जजों की संवैधानिक बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। इसमें मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायाधीश एस.ए. बोबडे, न्यायाधीश डी.वाय. चंद्रचूड़, न्यायाधीश अशोक भूषण और न्यायाधीश एस.अब्दुल नजीर शामिल होंगे। मध्यस्थता पैनल के पास यह मामला जाने के बाद पहली बार इस पर सुनवाई होगी।

यह मामला कई वर्षों से चुनावी मुद्दा भी रहा है। 1989 के चुनावों में बोफोर्स के अलावा राममंदिर ही वो मुद्दा था जिसने कांग्रेस से सत्ता छीनकर संयुक्त मोर्चा को सत्ता सौंप दी थी। हालांकि उस समय भाजपा उनके साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी लेकिन इसी राममंदिर के मुद्दे पर ही भाजपा ने तत्कालीन वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापिस लिया था। उसके बाद नरसिम्हाराव सरकार के समय 1992 मे विवादास्पद ढांचे को कारसेवकों द्वारा ढहा दिया गया था। तब से ही इस मुद्दे ने ज्यादा जोर पकड़ा हुआ है। यह मुद्दा धार्मिक तो है ही पर इससे भी कही ज्यादा राजनेतिक भी है।

आज की सुनवाई के बारे में बताया जा रहा है कि इस सुनवाई दौरान मध्यस्थता पैनल अपनी रिपोर्ट पेश कर सकता है। राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवादित मामले को सुलझाए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता समिति का गठन किया था। तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल में रिटायर्ड जस्टिस खलीफुल्लाह, अधिवक्ता श्रीराम पांचु और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर शामिल हैं।

पिछले दिनों इस मामले में याचिका दाखिल करने वाले तीनो पक्षकारों 25 लोग मध्यस्थता पैनल के सामने पेश हुए थे। याचिकाकर्ताओं के साथ उनके वकील भी मौजूद थे। इन सभी लोगों को फैजाबाद प्रशासन की तरफ से नोटिस भेजा गया था। मध्यस्थता की प्रक्रिया फैजाबाद अवध यूनिवर्सिटी में हुई। इस दौरान किसी को भी वहां जाने की अनुमति नहीं थी। सभी याचिकाकर्ताओं ने अपना अपना पक्ष मध्यस्थों के मध्य रखा, उसी की रिपोर्ट आज उच्चतम न्यायालय के सामने वो रखने वाले है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में अयोध्या की विवादित भूमि पर पूजा करने की याचिका को अस्वीकार किया था। अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा था कि आप लोग इस देश को शांति से नहीं रहने देंगे। कोई न कोई हमेशा उकसाता रहता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने उस जुर्माने को भी हटाने से इनकार कर दिया था।

आज की सुनवाई में मध्यस्थता करने वाले सभी लोग तटस्थ माने जा रहे है तथा कोर्ट भी यह चाहता है कि इस मामले का सुखद समाधान सभी पक्षो की रजामंदी से हो जाये जिससे देश मे साम्प्रदायिक सौहार्द बना रहे। गंगा जमुनी तहजीब वाले इस देश मे धार्मिक मुद्दे ज्यादा मायने तो नही रखते है पर राजनीतिज्ञ अपनी राजनीति के लिए कभी कभी इसे बिगाड़ देते है।

इस मुद्दे का सही समाधान निकले तथा भारत माता फिर से धार्मिक मुद्दों पर हुए बवाल से कभी भी रक्तरंजित न हो हमारी तो यही कामना है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय।