आज “मदर्स डे” है, अपनी मां को थोड़ा स्पेशल महसूस कराएं!


दुनिया भर में आज मदर्स डे मनाया जा रहा है। हिंदी में बोले तो मातृ दिवस। वैसे तो मेरी नजर में हर दिन तथा हर क्षण माता को समर्पित है।
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दुनिया भर में आज मदर्स डे मनाया जा रहा है। हिंदी में बोले तो मातृ दिवस। वैसे तो मेरी नजर में हर दिन तथा हर क्षण माता को समर्पित है।

माता के बिना संसार की भी कल्पना नही हो सकती। जिसने हमारा सृजन किया है उस सृजनात्मक शक्ति के लिए हम सम्पूर्ण जीवन भी अगर न्यौछावर कर दे तो भी न्यून है, क्योकि यह जीवन भी तो उसी का है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यक्ति को स्वयं के लिए भी फुर्सत नही मिलती है। जीवन को व्यवस्थित रूप से व्यतीत करने के लिए इंसान इतनी भागदौड़ करता है कि खुद अव्यवस्थित हो जाता है। ऐसे ही लोगो के लिए ऐसे कई विशेष दिन साल में मनाए जाते है जिससे वो अपने रिश्तों को पुनर्जीवित कर सके।

इसी को मद्देनजर रखते हुए विश्व भर में मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे यानि कि मातृ दिवस मनाया जाता हैं।

इस बार मई का दूसरा रविवार आज है तो आज समग्र विश्व मे, खासकर पाश्चात्य संस्कृति का अनुशरण करने वाले मदर्स डे मना रहे है। वो लोग मदर्स डे पर मां को खास प्यार और सम्मान जताते है। मां को स्पेशल महसूस कराया जाता है। इस दिन उन्हें तोहफा दिया जाता है, घुमाया जाता है। यानी जिन भी तरीकों से अपनी मां से प्यार जता सकते हैं, वो सब किया जाता है। साथ ही माता के साथ एक प्यारी सी सेल्फी लेकर उसे फेसबुक तथा वाट्सअप के स्टेटस पर डाल इस दिन की इतिश्री कर लेते है।

मां को सम्मान देने वाले इस दिन की शुरुआत अमेरिका से हुई थी। एक अमेरिकी लड़की जो सोशल एक्टिविस्ट भी थी, एना जार्विस, अपनी मां से बहुत प्यार करती थीं। उन्होंने शादी नही की इसलिए वो हमेशा अपनी मां के साथ ही रहीं। उसकी मां की मौत होने के बाद प्यार जताने के लिए उन्होंने इस दिन की शुरुआत की। इसके दो साल बाद 9 मई 1914 को अमेरिकी राष्ट्रपति विल्सन ने एक कानून पास किया, जिसमें लिखा था कि हर मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाएगा, जिसके बाद मदर्स डे अमेरिका के साथ साथ भारत और कई देशों में मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाने लगा।

लेकिन इसके विपरीत संयुक्त परिवार की संस्कृति वाले हमारे देश भारत मे माता का स्थान वैदिक काल से ही सर्वोपरि है। कहा जाता है कि ईश्वर भी यहां पर माता का स्नेह प्राप्त करने के लिए जन्म लेते है। अगर हम त्रेता युग का उदाहरण देखे तो भगवान राम का जब प्रागट्य होता है तो माता के आग्रह से ही वो शिशु रूप धारण करते है।

कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा।

सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।

माता के आग्रह पर देवताओं के स्वामी बालक रूप धारण कर लेते है तथा अवध में विविध लीलाएं करते है।

द्वापर में जब कृष्णावतार लेते है तब तो बहुत अद्भुत मातृप्रेम देखने को मिलता है। माता के प्रेम से वशीभूत होकर भगवान कृष्ण खुद को ऊखल से बंधवा लेते है।

जसुमति रिस करि-करि रजु करषै।

सुत हित क्रोध देखि माता कैं, मनहिं मन हरि हरषै।।

कुलमिलाकर माता का स्थान बहुत ही अनुपम है। छत्रपति शिवाजी महाराज की माता जीजाबाई का उनको छत्रपति बनाने में योगदान जन जन को पता है।

मुजरा माझा त्या माँ जिजाऊला

घडविले तिने त्या शूर शिवबाला !

साक्षात होती ती आई भवानी

जन्म घेतला तिच्या पोटी शिवानी !

व्यक्ति का सम्पूर्ण जीवन माता की ही देन है तो हर दिन हर क्षण उसका ही है। यह भी सही है कि भागमभाग में उतना समय हम नही दे पाते है। सयुक्त परिवार वाली पद्धति धीरे धीरे कम हो रही है। आजीविका उपार्जन के लिए अन्यत्र जाना पड़ता है। इसलिए माता पिता को उतना समय वर्तमान समय मे नही दे पाते है।

इसलिए कम से कम एक दिन तो उस जन्मदात्री माता को समर्पित होना ही चाहिए। लेकिन केवल सेल्फी खींचकर सोशल मीडिया में डालने तक ही नही बल्कि संपूर्ण दिन माता के साथ गुजारना चाहिए।

हम कितने भी व्यस्त क्यो न हो, आज के दिन अपनी माँ को यह वचन जरूर दे कि जब भी उसे आवश्यकता होगी तब आप उसके समीप अवश्य होंगे। याद रखिये यह वही माँ है जिसने आपके द्वारा गीले किये बिस्तर पर स्वयं सोकर आपको सूखी जगह सुलाया है। तो हमारा भी परम पुनीत कृतव्य उसके लिए बनता ही है।

ओर जिनकी माता अपनी आयु को सम्पूर्ण करके अपनी यादे छोड़कर जा चुकी है वो अपनी माता को याद करके एक दिन समाज के वंचित वर्ग की माताओं की सेवा करके उसका पुण्य अपनी माता को समर्पित कर दे, ऐसा लगेगा कि माँ ने स्वयं आकर सर पर हाथ फेर दिया है।

संसार सागर है अगर, माता पिता एक नाव है,

जिसने दुखाई आत्मा, वो डूबता मझधार है,

जिसने करी सेवा, वो होता भव सिंधु पार है,

माता पिता परमात्मा, मिलते न दूजी बार है।

आपकी, मेरी, हम सबकी सर्व आश्रयदात्री भारत माता की अनन्त जयजयकार