आतंकवाद को धर्म से जोड़ना है तो भेदभाव नही करे, खुलकर बोलने की हिम्मत रखें


आतंकवाद का कोई धर्म नही होता है। अगर धर्म होता तो मुसलमान देशों में उनकी ही मस्जिदों में मुसलमानों द्वारा ही बम विस्फोट नही किया जाता।
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मैं कई बार लिखता हूँ कि हमारे देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था लेकिन हमने सहिष्णुता का मार्ग अपनाते हूए हिंदुस्तान में सर्व धर्मसमभाव के सिद्धांत का अनुसरण करते हुए हमारे से अलग हुए भूभाग के विपरीत धर्मनिरपेक्ष सिद्धान्त को अपनाया था। लेकिन बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था इसलिए पूर्वी तथा पश्चिमी पाकिस्तान के हिंदुओं को हिजरत करके हिंदुस्तान आना पड़ा था। वहां जो रह गए थे उनका जीवन बहुत दुष्कर हो गया था। ज्यादातर तो आ गए है कुछ बचे है वो बड़ी मुश्किल से जीवनयापन कर रहे है। तभी वहां की जनसंख्या में हिंदुओं का प्रतिशत न्यून हो गया है। उन हिंदुओ को हिंदुस्तान में आसानी से शरण देने के लिए वर्तमान मोदी सरकार ने नागरिकता बिल में संशोधन भी किया, ताकि बाहर से आने वाले हिन्दू, बौद्ध तथा सिख शरणार्थियों को आसानी से नागरिकता मिल सके।

जिस समय देश का बंटवारा हुआ था उस समय देश मे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का वर्चस्व था। उनके निर्देशानुसार ही प्रायः कार्य हुआ करते थे। राष्ट्र को धर्मनिरपेक्ष घोषित करने का निर्णय भी कमोबेश उन्ही का था। और यह सही भी था। कट्टरपंथी राष्ट्रों की प्रगति हमेशा बाधित ही हुई है। शायद यही देखते हुए उन्होंने भी सभी धर्मों को समान आदर देते हुए इस महान देश को धर्मनिरपेक्ष रखा। वैसे भी हमारी सनातन विचारधारा सभी धर्मों का आदर करना ही सिखाती है। लेकिन कुछ व्यक्ति महात्मा गांधी के निर्णयों से नाराज थे। उसी समय पाकिस्तान ने भारत के कश्मीर प्रान्त पर आक्रमण कर दिया जिसके कारण भारत के तत्कालीन प्रधानमन्त्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और गृहमन्त्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में भारत सरकार ने पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये न देने का निर्णय किया, परन्तु भारत सरकार के इस निर्णय के विरुद्ध गान्धी अनशन पर बैठ गये।

उन्ही निर्णयों से छुब्ध एक व्यक्ति नाथूराम गोडसे ने इसी नाराजगी में बापू पर गोली चला दी थी जिससे महात्मा गांधी परमगति को प्राप्त हो गए। यह वाकई एक निंदनीय घटना थी। बाद में उस व्यक्ति पर मुकदमा चला तथा उनके एक साथी नारायण आप्टे के साथ फांसी की सज़ा सुना दी गई।

वैसे इससे पहले भी गाँधीजी की हत्या का प्रयास हुआ था। 20 जनवरी 1948 को मदनलाल पाहवा ने गान्धीजी की प्रार्थना सभा में बम फेका था । योजना के अनुसार बम विस्फोट से उत्पन्न अफरा तफरी के समय ही गान्धीजी को मारना था परन्तु उस समय उनकी पिस्तौल ही जाम हो गयी वह एकदम न चल सकी। इस कारण नाथूराम गोडसे और उनके बाकी साथी वहाँ से भागकर पुणे वापस चले गये जबकि मदनलाल पाहवा को भीड़ ने पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया था।

गाँधीजी की हत्या के बाद नाथूराम गोडसे ने अपनी फांसी के एक दिन पूर्व एक पत्र अपने भाई दत्तात्रेय गोडसे के नाम लिखा था जिसे उनकी वसीयत माना जाता है। उनके भाई गोपाल गोडसे ने इसे अपनी किताब ‘गांधी, वध और मैं’ में इसे प्रकाशित किया था। उसमें उन्होंने इच्छा जताई कि उनकी अस्थियों को सिंधु नदी में तब प्रवाहित किया जाए जब भारत पुनः अखंड हो जाये। आज भी उनकी अस्थियां पुणे में सुरक्षित पड़ी है तथा उनकी अंतिम इच्छा को पूरी होने की प्रतीक्षा में है।

नाथूराम गोडसे के बारे में कई बार कई लोग अपनी प्रतिक्रियाएं देते रहे है। गाँधीजी की हत्या करने का उनका निर्णय वाकई में निंदनीय था लेकिन उसको हिन्दू धर्म से जोड़ना कहाँ तक सही है?

कल एक बार फिर इस मामले को छेड़ा गया। कल मक्कल नीधि मैयम (एमएनएम) के संस्थापक कमल हासन ने यह कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया है कि आजाद भारत का पहला आतंकवादी ‘हिन्दू’ था। कमल हासन महात्मा गांधी की हत्या करने वाले, नाथूराम गोडसे के संदर्भ में ही बात कर रहे थे।

हमारे देश की एक बहुत बड़ी विचित्र बात है कि यहां पर एक बड़ी जनसख्या के आदर्श या तो फ़िल्म अभिनेता है या फिर क्रिकेट के खिलाड़ी। वो लोग इनके अन्धानुयायी होते है इसलिए उनके द्वारा कही बाते भी सहर्ष स्वीकार कर लेते है। हिंदुस्तान में हिंदुओं के लिए केवल वोट की अपेक्षा के लिए कुछ भी बोल देना प्रचलन में हो गया है।

कमल हासन के बयान पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष तमिलसई सौंदरराजन ने ट्वीट कर कहा कि गांधी की हत्या और हिंदू आतंकवाद का मामला अभी उठाना निंदनीय है। तमिलनाडु के उपचुनाव से पहले अल्पसंख्यकों के वोट जुटाने के लिए यह बात उठाकर हासन आग से खेल रहे हैं। उन्होंने श्रीलंका के बम ब्लास्ट पर कोई विचार नहीं दिया।

अगर कमल हसन को गाँधीजी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे से हिन्दू आतंकवाद को जोड़ना है तो क्या वो देश के विभिन्न इलाकों में मुस्लिम धर्मानुयायियों द्वारा की गई हत्याओं को मुस्लिम आतंकवाद कहने की हिम्मत भी करेंगे? क्या वो श्रीलंका में हाल ही में हुई घटना को मुस्लिम आतंकवाद से जोड़ेंगे?

आतंकवाद का कोई धर्म नही होता है। अगर धर्म होता तो मुसलमान देशों में उनकी ही मस्जिदों में मुसलमानों द्वारा ही बम विस्फोट नही किया जाता। नाथूराम गोडसे की अपनी मानसिकता थी जिसके कारण उन्होंने गाँधीजी की हत्या की थी, तो उसे हिन्दू धर्म से जोड़ना बिल्कुल गलत है। अगर ऐसा उनको करना ही है तो अन्य घटनाओं पर भी इसी प्रकार अपनी राय व्यक्त करें। लेकिन यह ध्यान में रहे कि इस देश की गंगा जमुनी तहजीब को कोई नुकसान न पहुंचे।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय