इस रात की सुबह कब होगी?


सूरत का कपड़ा बाजार उत्पादन के दृष्टिकोण से दुनिया के बड़े कपड़ा बाजारों में से एक है।
Photo/Loktej

सूरत का कपड़ा बाजार उत्पादन के दृष्टिकोण से दुनिया के बड़े कपड़ा बाजारों में से एक है। यहां पर छोटे बड़े मिलाकर कम से कम 65000 व्यापारी कपड़ा उत्पादन, संवर्धन तथा विक्रय में संलग्न है। इतना बड़ा बाजार वो भी कम क्षेत्रफल में होने के कारण यहां भीड़भाड़ ज्यादा रहती है। इसी भीड़ का फायदा जेबतराश उठाते है तथा मेहनत की कमाई को कब जेब से बाहर निकाल लेते है पता ही नही चलता। लेकिन यही भीड़भाड़ वाला क्षेत्र रात को तथा रविवार को बिल्कुल सुनसान हो जाता है। तब यह पता नही चलता कि दिन में यहां पर इतनी भीड़ रही होगी। इसी का फायदा वो चोर उठा लेते है जो कही न कही से यह खबर रखते है कि कौनसी दुकान में कितना तथा किस क्वालिटी का कपड़ा पड़ा है। ये चोर इतनी सफाई से चोरी करते है कि दुकान मालिक को पता भी नही चलता कि कोई उसके पैरों के नीचे से जमीन ही खिसका रहा है। भीड़ में हुई जेबतराशी का पता तो थोड़ी देर बाद चल जाता है लेकिन ऐसी चोरी का पता लगते लगते काफी देर हो जाती है।

व्यापारी जब वित्तीय वर्ष समाप्ति पर अपनी तलपट मिलाता है तो पाता है कि इतने दिन की मेहनत सरपट साफ हो गई, लेकिन कैसे हुई उसके लिए उसके पास सिर्फ अनुमान ही रहता है। बेचारा व्यापारी कभी सरकार की नीतियों को दोष देता है तो कभी तेजी मंदी को तो कभी बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा को। क्योकि उसे पता नही होता कि कौनसा घुन उसके उपजाए गेंहू खा रहा है।

पिछले दिनों जब राधाकृष्णा टेक्सटाईल मार्केट में एक सूझबूझ वाले व्यापारी तथा टेक्सटाईल युवा ब्रिगेड के कारण चोरी पकड़ी गई तब व्यापारियों को पता चला कि उनके पांव के नीचे की जमीन कौन खिसका रहा है। लेकिन उस समय इतनी बड़ी चोरी पकड़े जाने के बाद भी जिस प्रकार कार्यवाही हुई वो नो दिन चले अढ़ाई कोस से भी बदतर थी।

आरकेटी मार्केट को लगातार इस उम्मीद पर बन्द रखा गया कि इस प्रकार के दबाब से प्रशासन तुरन्त हरकत में आएगा तथा दोषियों के ऊपर त्वरित कार्यवाही करके उनको न्याय की प्राप्ति होगी। लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ। हुआ सिर्फ यह कि कुछ नेता किस्म के लोग अपनी महानुभावों के साथ फोटो खिंचवाने में सफल रहे। कुछ अखबार की सुर्खियां बनने में सफल रहे। कुछ प्रोपर्टी वाले अपनी तरफ व्यापारियों को आकर्षित करने में सफल रहे। लेकिन वो व्यापारी बिल्कुल असफल रहा जिसके यहां चोरी हुई थी। न्याय उससे आज भी कोसो दूर है। उसके लिए ढाक के वही तीन पात है।

इस दरम्यान टेक्सटाईल युवा ब्रिगेड, जिसने चोरी का पर्दाफाश करने में मुख्य भूमिका निभाई थी, उसने व्यापारियों से आधुनिक सुरक्षा साधन अपनी दुकानो में लगवाने के लिए आग्रह किया था। उनके अनुसार मोबाइल अलर्ट, अलार्म आदि सुविधाएं दुकान में लगी हो तो कोई भी अवांछित हलचल दुकान के आसपास भी हो तो व्यापारी को पता चल जाता है। लेकिन व्यापारियों ने इस बात पर अधिक गौर नही किया।
लेकिन कल फिर से मिलेनियम टेक्सटाईल मार्केट, जो कि सूरत के बड़े कपड़ा बाजारों में एक है, उसमे फिर से ताले खोलने की घटना हो गई। सुरक्षा कर्मचारियों की मुस्तेदी से ज्यादा नुकसान होने से व्यापारी बच गया लेकिन एक बार फिर से सुरक्षा का प्रश्न उसके सामने खड़ा हो गया है। हालांकि इस मार्केट का प्रबंधन लचर नही बल्कि दुरुस्त है इसलिए इस मार्केट के व्यापारी ज्यादा चिंता नही कर रहे फिर भी इतनी सुरक्षा में भी अगर सेंध लग गयी है तो यह सोचने योग्य बात है।

इस घटना के बाद सभी व्यापारियों को अपनी दुकान तथा गोदाम की सुरक्षा के सम्बंध में पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। व्यापारी को खुद की सुरक्षा खुद के हाथ वाला नियम यहां अपनाना ही पड़ेगा क्योकि इतने बड़े मार्केट में सिर्फ गेट वाली सेक्युरिटी के भरोशे रहना वाकई में मूर्खता ही होगी। इसके अलावा तालों पर भी ध्यान देना चाहिए तथा चोरी के नुकसान से बचने के लिए बीमा भी करवाकर रखे तो अकस्मात होने वाले बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय