सच जो कि कड़वा है


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑडियो के माध्यम से देश भर में लगभग 25 लाख चौकीदारों को संबोधित किया।
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कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑडियो के माध्यम से देश भर में लगभग 25 लाख चौकीदारों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री का यह संबोधन मैं भी चौकीदार अभियान के अंतर्गत की गई पहल का हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर के 25 लाख चौकीदारों से बात करते हुए कहा कि विपक्ष का चौकीदार चोर है नारा देश के लिए नुकसानदेह है। वैसे देश के लिए कितना नुकसानदेह है यह तो पता नही परन्तु भाजपा के लिए यह नुकसानदेह था, लेकिन इसकी भरपाई प्रधानमंत्री के मैं भी चौकीदार अभियान ने कर दी है।

आजकल मैं भी चौकीदार की मुहिम बड़े जोरो से चल रहा है। भाजपा के समर्थक बड़े बड़े सेठ भी अपने नाम के आगे चौकीदार शब्द इतने गर्व से लिख रहे है जैसे कोई पीएचडी करने के बाद अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाता है। लेकिन इस बीच एक खबर यह भी है कि एक अभिनेता चौकीदार बन जाने के कारण चर्चा में है। मैं भी चौकीदार वाला नही बल्कि असली वाला चौकीदार। अक्षय कुमार के कोस्टार रह चुके सवी सिद्धू इन दिनों चर्चा में बने हुए हैं । हाल ही में खबर आई कि उन्हें अपना घर चलाने के लिए सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करनी पड़ रही है।
सवी सिद्धू ने अपने करियर की शुरुआत अनुराग कश्यप के साथ फिल्म पांच से की हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रिलीज नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने अनुराग की ही फिल्म गुलाल और ब्लैक फ्राइडे में काम किया । अक्षय कुमार के साथ उन्हें पटियाला हाउस में देखा गया। सवी के पास काम की कमी नहीं रही, उन्होंने यशराज बैनर और सुभाष घई की फिल्मों में किरदार निभाए लेकिन फिर उनकी जिंदगी में ऐसा दौर आया जब उन्हें काम मिलना बंद हो गया। अब उन्हें अपने घर का खर्च निकालने के लिए गार्ड की नौकरी करनी पड़ रही है।
उनके पहले डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने कहा कि मुझे सवी पर गर्व है। इंडस्ट्री में कई लेखक और अन्यों के पास काम नहीं होता तो वो उधार मांगते हैं। कई फिल्ममेकर्स तो खाने के लिए पैसे मांगते हैं। सवी सिद्धू चौकीदार के रूप में काम कर रहे हैं। मुझे ये काम छोटा या बड़ा नहीं लगता। लेकिन भीख मांगने से तो अच्छा ही है। मुझे लगता है कि चैरिटी करके आर्टिस्ट को आर्टिस्ट नहीं बनाया जा सकता है।
अभिनेता सवी ने सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने के बारे में कहा यह 12 घंटे की एक कठिन नौकरी है। यह एक मशीनी काम है। मेरे पास बस का टिकट खरीदने के लिए भी पैसे नहीं हैं। अब थिएटर में फिल्म देखना तो एक सपने जैसा है। मेरी माली हालत ठीक नहीं है।
यह एक कड़वी हकीकत है। मैं भी चौकीदार लिखना बड़ा आसान है लेकिन जो व्यक्ति अपनी आर्थिक मजबूरी के कारण चौकीदार बनने पर मजबूर है उसका दिल ही जानता है कि वो किस तरह अपना जीवनयापन कर रहा है। इसके साथ ही चौकीदार चोर है कहने वालों को भी थोड़ा सोचना चाहिए कि इस तरह नही बोले जिससे सारे चौकीदारों को प्रश्नचिन्ह लग जाये। यह अलग बात है कि आजकल चौकीदारों की चोरी हेडलाइन बन रही है।
सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय