वीर भूमि राजस्थान में चुनावी प्रचार का आनंद ही अनूठा है!


सूरत से बड़ी संख्या में लोग अपने-अपने दलों के लिये चुनाव प्रचार के लिये, और यहां तक कि चुनाव में वोट डालने के लिये राजस्थान की सैर कर आए।
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अग्रबंधु और सामाजिक कार्यकर्ता विश्वनाथ पचेरिया के चुनावी संस्मरण
सूरत। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो गये हैं। नतीजों के एलान के साथ ही नई सरकारों के गठन की प्रक्रिया अपने चरम पर है। कई दिग्गज जीते और हारे। कई चेहरे प्रतिष्ठा की जंग में पसीना बहाने के बाद जीत की खुशी का स्वाद चख रहे हैं, और कई जनता के द्वारा नकारे जाने का अफसोस कर रहे हैं।  इसी परिदृश्य में हजारों लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने समग्र चुनावी मौसम में अपनी-अपनी पार्टी और नेताओं के पक्ष में जोरदार प्रचार कार्य करते हुए दिन-रात एक कर दिया। वैसे भी हमारे देश में चुनाव किसी त्यौहार से कम नहीं हैं। जो लोग इन चुनावों का प्रत्यक्ष हिस्सा होते हैं – फिर चाहे वे खुद चुनाव लड़ रहे हों, लड़वा रहे हों या फिर एक आम कार्यकर्ता के नाते प्रचार-कार्य में जुटे हों, इस पूरी प्रक्रिया का आनंद ही कुछ ओर होता है।
इस बार सूरत से बड़ी संख्या में लोग अपने-अपने दलों के लिये चुनाव प्रचार के लिये, और यहां तक कि चुनाव में वोट डालने के लिये राजस्थान की सैर कर आए। इन्हीं में एक हैं स्थानीय अग्रबंधु और अग्रणी सामाजिक कार्यकर्ता विश्वनाथ पचेरिया। लोकतेज ने विश्वनाथ पचेरिया से अपने चुनावी संस्मरण के विषय में पूछा, तो उन्होंने कुछ मजेदार बातें साझा कीं। विश्वनाथ पचेरिया बताते हैं कि वे अपने पारिवारिक मित्र एवं भाई डॉ. सतीष पुनिया के प्रचार के लिये उनके विधानसभा क्षेत्र आमेर गए। सूरत से उन्होंने अपने मित्रों रमेश कामरा, संतोष शर्मा, श्री माहेश्वरी, गणेश चेगोईवाला और सुरेन्द्र डोकवेवाला को भी साथ लिया। राष्ट्रीय राजमार्ग ८ से आमेर सीधे पहुंचा जा सकता है, लेकिन अचानक सबका मन बना और वे जगतजननी मां त्रिपुरा सुन्दरी के दर्शन व आशीर्वाद प्राप्त कर तथा मातेश्वरी की पूजा-अर्चना कर मन्नत का नारियल बांधते हुए प्रचार-कार्य शुरू करने के संकल्प के साथ आमेर पहुंचे।
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पचेरियाजी बताते हैं कि आमेर की धरा पर पहुंचते ही ज्ञात हुआ कि केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ ‌सिंह की सभा होने वाली है, सो वे सीधे वहीं पहुंच गये। वहीं पर डॉ. सतीष पूनिया से मुलाकात हो गई और हैलिपेड पर राजनाथ सिंह का स्वागत करने का अवसर भी प्राप्त हो गया। इस सभा में मौजूद विशाल भीड़ और जनता से रूबर होने पर ही संकेत मिल गया था कि लोग पिछले चुनाव में पूनियाजी के ३२९ वोटों के अंतर से हुई हार का दंश लिये बैठे थे और इस बार किसी भी कीमत पर उन्हें जीताने को आतुर थे। लोगों को संतोष था कि पिछले चुनाव में छोटे से अंतर से हारने के बावजूद डॉ. पुनिया ५ वर्षों तक जनता के बीच विकास कार्यों में जुटे रहे। उसके बाद उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डॉ. किरोणीमल मीणा एवं केशवप्रसाद मौर्य की भी सफल सभाओं से जीत सुनिश्चित होती दिखी।
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पचेरियाजी बताते हैं कि आमेर विधानसभा क्षेत्र के जालसू, रामपुरा और बिलोंची मंडल में उनकी टीम ने घर-घर जाकर प्रचार किया। कई जगहों पर उन्होंने जातिवाद हावी होते देखा। वहीं एक सुखद अनुभव यह भी रहा कि राजस्थान में लोग दिल खोल कर बात करते हैं, उनकी बातों में झूठ या छलावा नजर नहीं आता। एक अनुभव साझा करते हुए वे कहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रचार के दौरान एक बुजुर्ग से मुलाकात हुई जिनके घर उनके अलावा १७ वोट थे। उनसे जब समर्थन मांगा तो उन्होंने दो-टूक कह दिया कि वे तो कांग्रेस प्रत्याशी को ही वोट देंगे। इसका कारण पूछने पर बुजुर्ग सज्जन ने डॉ. पूनिया की प्रशंसा करते हुए कहा कि सतीश से कोई शिकायत नहीं लेकिन मैंने कांग्रेसी प्रत्याशी को फेटा (साफा) बांध दिया है। राजस्थान में फेटा बांधना, यानि खुला समर्थन देने का वचन देने के बराबर होता है। जब प्रत्युत्तर में पूछा गया कि पूरे परिवार के वोट का वचन दिया कि अकेले का?, तो उन्होंने कहा कि मैंने मेरे वोट का वचन दिया है। इस पर परिवार के सदस्यों के समर्थन के लिये निवेदन करने पर उन्होंने सभी सदस्यों को बुलाकर सतीशजी को वोट देने का आदेश दे दिया। राजस्थान में कई जगहों पर घर के बुजुर्ग की राय पर परिवार के सदस्य वोट देते हैं।
पचेरियाजी के अनुसार लोकसंपर्क के दौरान लोग बड़े प्यार से मिलते और बात सुनते। ग्रामीण अंचल में लोकसंपर्क के दौरान उनके साथ जयपुर के स्थानीय मित्र राकेश बड़गोती भी थे। समग्र प्रचार कार्य के दौरान ठेठ राजस्थानी भोजन – बाजरे की रोटी, खेत से ताजी कटी सब्जियां और छाछ का आनंद ही कुछ अलग था। कई पुराने मित्रों से मिले और नये मित्र बने। लोग कई किलोमीटर दूर तक अपने घरों पर भोजन के लिये आमंत्रित करते और बड़े प्यार से भोजन कराते। खेतों में पेड़ की छांव में खाट पर लेट कर आराम फर्माने के तो क्या कहने!
पचेरिया कहते हैं कि पूरी यात्रा के दौरान सामोद हनुमानजी, आमेर धरा की मालकिन शीलामाताजी के दर्शन का सौभाग्य मिला। लौटते वक्त चारभुजानाथजी और नाथद्वारा में श्रीनाथजी के दर्शन किये। राजसंमद से भाजपा प्रत्याशी श्रीमती किरण माहेश्वरी और उदयपुर से भाजपा प्रत्याशी गुलाबचंद कटारिया से मिलने और उनके चुनावी कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए पुनः कर्मभूमि सूरत लौट आए।
पचेरियाजी संतोष व्यक्त करते हुए कहते हैं कि सूरत लौटने के दूसरे दिन चुनावी परिणाम आए। राजस्थान में भाजपा जादुई आंकड़े को छू नहीं पाई इसका दुःख रहा, लेकिन इस बात का संतोष भी रहा कि मां त्रिपुरा सुन्दरी ने लाज रखते हुए आमेर से डॉ. सतीश पुनिया को जीताया और वे जिन ३ विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार करने गये, वो तीनों सीटें भाजपा जीती।