पानी से झांकता ऐतिहासिक गायकवाड़ किला संकेत दे रहा कि ऊकाई बांध में जलस्तर कम है!


फाईल चित्र (PC : sudarshankulthe.wordpress.com)

सूरत के लोगों को शायद ही पता हो कि तापी नदी पर ऊकाई बांध बनाया गया उससे पहले ऊपरवास में १७वीं सदी का गायकवाड़ का ऐतिहासिक किला था। बांध बनने के बाद पूरा का पूरा किला पानी में गरक हो गया। अब जब-जब ऊकाई में पानी कम होता, तब-तब इस किल्ले के कुछ हिस्से दिखाई देने शुरू हो जाते। अभी २०१९ के मई महीने में एक बार फिर इस ऐतिहासिक गायकवाड़ किले के अवशेष पानी से झांकते नजर आ रहे हैं। यह इस बात का द्योतक है कि बांध में पानी कम हो गया है। गर्मी अपने चरम पर है और उम्मीद की जानी चाहिये कि पानी का स्तर बना रहे और कोई संकट वाली स्थिति पैदा न हो।

खैर आपको बता दें कि मंगलवार को ऊकाई बांध का जलस्तर २८१ फुट था। बांध में २७० फुट का स्तर डेड-स्टोरेज के रूप में कायम रखना होता है। यानि यदि जल स्तर ११‌ फिट और नीचे जाता है तो नियमानुसार सिंचाई और सूरत शहर के पेयजल की आपूर्ति रोक देनी पड़ सकती है। बता दें कि जल स्तर मई महीने के प्रारंभ में पिछले पांच वर्षों के आंकडों पर नजर करें तो इस बार ऊकाई का सबसे कम २८१ फुट है जो सबसे कम है। पांच वर्षों में सबसे अधिक जलस्तर २०१७ में ३१८ फुट था। हालांकि सिंचाई विभाग का दावा है कि जलाशय में पानी का लाईव स्टोरज ४०० एमसीएम है और सूरत शहर को रोजाना ६० एमसीएस की आवश्यकता रहती है। ऐसे में बारिश शुरू होने तक सूरत में पेयजल संकट की स्थिति की संभावना नहीं है।

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लेकिन एक तथ्य यह भी है कि सूरत के कोजवे में नियमानुसार ५ मीटर जलस्तर बनाये रखना होता है। लेकिन पिछले दो महीनों से कोजवे के इस स्तर को कायम नहीं रखा गया। अखबारों में इस मामले से संबंधित खबरों के प्रकाशन के बाद प्रशासन जागा है और फिलहाल ५ मीटर का जलस्तर बनाये हुए है।

जानकारों का कहना है कि मई महीने की कड़ी गर्मी चरम पर है। आम तौर पर जून के दूसरे सप्ताह में बारिश की शुरूआत होती है। ऐसे में पंद्रह-बीस दिनों की दस समयावधि में बांध में पानी का जलस्तर और घटेगा। देखना होगा ऐतिहासिक गायकवाड़ के किले का कितना हिस्सा इस बार नजर आता है, जो पानी की किल्लत का संकेत करेगा।