VPS News Bulletin : गड़बड़ी करने वाले एजेंटों से सावधान रहें, सुरक्षित व्यापार करें!


कपड़ा कारोबार में बकाया भुगतान की जिम्मेदारी एजेंटों को ही उठानी होगी : वीपीएस

(लोकतेज संवाददाता – धर्मेन्द्र मिश्रा)

सूरत। व्यापार प्रगति संघ, सूरत व्यापार एवं व्यापारी हित के लिए सदैव तत्पर है, यही कारण है कि आज संस्था के साथ तकरीबन 25 हजार व्यापारी जुड़ गये हैं। व्यापारी एवं व्यापार हित के लिए प्रत्येक रविवार को रामचौक स्थित शिवाजी गार्डन में सुबह 8 से 9 बजे तक एक मीटिंग आहूत की जाती है, जिसमें व्यापारी अपनी समस्या एवं सुझाव आदान-प्रदान करते हैं। रविवार, 7 अप्रैल 2019 को भी साप्ताहिक बैठक संपन्न हुई, जिसमें वीपीएस के पदाधिकारियों के अलावा पंच, स्वयंसेवक और पीडि़त व्यापारी उपस्थित रहे।

वीपीएस के संस्थापक संजय जगनानी ने कहा कि व्यापारी निराश न हों, फंसे हुआ रुपया धीरे-धारे ही निकलता है। सख्ती से अपने बकाया रुपये का तकादा करें और व्यापारी को व्यापार प्रगति संघ के 25 हजार व्यापारियों एवं 125 वाट्स ग्रुप की ताकत बताएं। व्यापारी व एजेंट की अच्छी तरह पहचान कर ही माल भेंजे। फंसे हुए रुपये निकालने के लिए व्यापारी को स्वयं आगे रहना होगा। चाहे व्यापारी के खिलाफ घर पर जाना हो अथवा उसके दुकान पर धरना प्रदर्शन यानी चादर बिछाकर रामधुन करनी हो। पूरी ताकत के साथ सामने वाले व्यापारी पर दबाव बनाना होगा। तब जाकर संभवत: सफलता मिल पाएगी। उन्होंने व्यापारियों को बल देते हुए कहा कि सूरत के व्यापारी शेर हैं, जो शेर नहीं है, उन्हें शेर बनाना है।

उन्होंने यह भी कहा कि कपड़ा व्यापार में एजेंट के बहुत बड़ी कड़ी है। बड़ी संख्या में कपड़ा कारोबारी एजेंटों के मारफत ही धंधा करते हैं। कई मामलों में तो देखा गया है कि एजेंटों की मोनोपोली सी बनी रहती है। ऐसे हालात में जहां एजेंटों की कमीशन की बड़ी आमदनी रहती है, वहीं ‌कारोबारी को भुगतान की जिम्मेदारी भी एजेंट की ही होनी चाहिये। व्यापार प्रगति संघ में अब आम राय बन रही है कि एजेंट के मारफत हुए धंधे में बकाया भुगतान की जिम्मेदारी एजेंटों की ही रहेगी। एजेंट यह कह कर कन्नी नहीं काट सकता कि सामने वाली पार्टी उठ गई, या कमजोर पड़ गई या किसी कारण से बकाया भुगतान नहीं कर रही, तो उसकी जिम्मेदारी नहीं है। वीपीएस ने अपने अब तक के अनुभव में यह भी पाया है कि कई मामलों में एजेंट कारोबारियों को गुमराह करते हैँ। वे स्वयं माल का भुगतान प्राप्त कर लेते हैं और कारोबारी को नहीं देते। कारोबारी बेचारा अपने बेचे गये माल के भुगतान के लिये दिसावर में व्यापारी के चक्कर काटते रह जाता है। ऐसा अब नहीं चलेगा।

वीपीएस को यह भी ज्ञात हुआ है कि सूरत पुलिस में बड़ी संख्या में बकाया रूपयों की वसूली न होने के मामलों में एजेंटों के खिलाफ शिकायतें हो रही हैं। इन शिकायतों से यह तथ्य भी उभर कर सामने आया है कि पुलिस में एक-एक एजेंट के नाम कई करोबारियों ने शिकायत कर रखी है। ऐसे में सूरत पुलिस भी ऐसे एजेंटों के खिलाफ सख्त हो रही है। वीपीएस के पंचों ने कपड़ा उद्यमियों को सावधानी पूर्वक व्यापार करने की सलाह देते हुए कहा है कि सूरत कपड़ा मार्केट में गड़बड़ एजेंटों की संख्या बढ़ रही है। ऐेस में जिसके साथ भी व्यापार करें, उसकी पहले अच्छे से पहचान करने के बाद ही आगे बढें। साथ ही व्यापारियों को गड़गड़ी करने वाले एजेंटों व व्यापारियों की सूचना आपस में साझा करनी चाहिये, जिससे कइयों को नुकसान होने से बचाया जा सके।

वीपीएस के पंच राजेन्द्र कानोडिया ने कहा कि जिस व्यापारी के यहां रुपये फंसे हैं, सबसे पहले कारोबारी उसकी दुकान पर जाए, यदि दुकान बंद हो तो उसके घर जाए। परंतु घर अथवा दुकान पर जाने से पूर्व वीपीएस के अन्य सदस्यों के साथ विचार-विमर्श करे और पुलिस को सूचित करे। किसी प्रकार भयभीत होने की जरुरत नहीं है। पुलिस व्यापारियों की मदद तत्परता से कर रही है। उन्होंने कहा कि भले  अपने रुपये फंसे हो, लेकिन अन्य अपने व्यापारी भाई के रुपये नहीं फंसे इसके लिए सामने वाले व्यापारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें। साथ ही वीपीएस को अवश्य सूचित करें। ताकि अन्य व्यापारी बच सके।

 

दक्षिण की मंडी में वकील का नोटिस बकाया भुगतान के लिये कारगर ‌विकल्प

वीपीएस के सामने बकाया भुगतान की समस्या लेकर आये कारोबारी मुकेश कोठारी ने वीपीएस के सहयोग से अपना भुगतान प्राप्त करने के बाद अनुभव साझा करते हुए बताया है कि ‌जिन लोगों का पेमेन्ट दक्षिण भारत की मंडी में अटक जाता है और रिर्टन चैक उपलब्ध हैं, तो ऐसे में मामलों में वकील के मारफत नोटिस भिजवाने से समस्या के निदान की संभावना काफी बढ़ जाती है। उनके अनुसार ज्यादा होशिया (पढ़ा-लिखा) व ज्यादा छोटा-अनपढ़ व्यापारी वकील के नोटिस, पुलिस व कोर्ट कार्रवाई से डरता है और नोटिस प्राप्त होने पर बला टालने के इरादे से पेमेन्ट कर देता है। ऐसे में इस प्रकार की समस्या से ग्रस्त कपड़ा कारोबारी वीपीएस की मदद ले सकते हैं।

 

थाने पुलिस ने फोन कर व्यापारी को बुलाकर चैक दिलवाया

मिलेनियम मार्केट के व्यापारी रोनक सेठ ने वीपीएस की मदद से अपने ८ लाख की सफलता पूर्वक बकाया वसूली के विषय में कहा है कि उन्होंने वकील से लिखित शिकायत तैयार कराई और एक प्रतिलिपि सूरत के सलाबतपुरा थाने में दी। फिर गूगल से महाराष्ट्र के थाने के संबंधित पुलिस थाने का पता ढूंढा। वे शिकायत लेकर थाने पहुंचे और वहां पुलिस को बताया कि फलां व्यापारी उन्हें पेमेन्ट नहीं दे रहा है। सूरत पुलिस में दिये गये शिकायत पत्र, वकील की लिखित शिकायत आदि दस्तावेजों के आधार पर थाना पुलिस ने तुरंत संबंधित व्यापारी को बुलाया और उन्हें बकाया भुगतान का चैक मिल गया। इस मामले का सार यह ‌निकलता है कि कारोबारी ने प्रामाणिकता से अपने बकाया भुगतान की वसूली के लिये कोशिश की और साथ ही वीपीएस, एडवोकेट, पुलिस से मदद की गुहार लगाई तो उन्हें सफलता मिली।  ऐसे में बकाया भुगतान की वसूली के लिये फॉलोअप करना बहुत जरूरी है।

 

वीपीएस के सहयोग से सफलतापूर्वक बकाया वसूली के मामले

  • सर्वोदय टेक्सटाईल मार्केट के मां गायत्री इंटरप्राईज ने वीपीएस को सूचना दी है कि उनका बिहार के गोपालगंज में दो व्यापारियों के यहां एक वर्ष से पैसा अटका हुआ था। वीपीएस के कन्वीनर संजयभाई (राघव फैशन), राजीवभाई (संकल्प साड़ीज़) एवं अमित तोगड़िया की मदद से मेरा बकाया भुगतान हो गया है।
  • रघुकुज टेक्सटाईल मार्केट के बालाजी सिल्क मिल्स की ओर से प्राप्त जानकारी के अनुसार उनका बिहार गोपालगंज में एक व्यापारी के यहां ६ महीने में पेमेन्ट शेष था जो वीपीएस के स्वयंसेवकों की मदद से आ गया है।
  • रतन चैंबर के मुकेश रेवालाल कोठारी बताते हैं कि उनका अक्टुबर २०१७ से चैन्नई में ८५,६००/- रुपये बकाया था। वीपीएस के मारफत वकील से सलाह लेकर चैक रिटर्न का नोटीस चैन्नई के व्यापारी को भेजने पर उनका बकाया भुगतान हो गया है।
  • मिलेनियम मार्केट के व्यापारी रोनक सेठ (पीटीसी क्रियेशन) ने जानकारी दी है कि थाने के व्यापारी के यहां उनका दो साल से ८,०७,५३५/- रुपये अटके पड़े थे, जो वीपीएस के सहयोग से प्राप्त हो गये हैं।

 

रविवार को वीपीएस के सामने आई नई शिकायतें

नीचे सूरत के कुछ ऐसे व्यापारियों की प्रतिक्रियाएं दी गई हैं, जिनका भुगतान लंबे अरसे से बकाया था और वीपीएस के प्रयासों से उन्हें भुगतान प्राप्त करने में सफलता मिली।

  • रघुकुल मार्केट के व्यापारी मनोज पांडे ने कहा कि आढतिया ने विश्वास में लेकर पार्टी को माल दिला दिया। अब रुपये निकलवाने में आना-कानी कर रहा है। वीपीएस के पंच ने इन्हें आढतिया पर दबाव बनाने और व्यापारी पर कानूनी कार्रवाई की सलाह दी।
  • कोहिनूर मार्केट के व्यापारी गोपालभाई ने कहा कि अलवर की पार्टी के यहां 3 लाख रुपये अटका है, जो बार-बार देता हूं, देता हूं कहता है, लेकिन देता नहीं। वीपीसीए के पंच अशोक गोयल इनके अटके रुपये निकालने में सहायक बनेंगे।
  • आरकेएलपी  मार्केट के व्यापारी सुरेश जैन ने बताया कि मुंबई के व्यापारी ने माल ले जाने के बाद पेमेन्ट नहीं किया और बार-बार बहाना बना रहा है।
  • शिवकृपा टेक्सटाइल मार्केट के व्यापारी विजय लाहोटी ने बताया कि लोकल व्यापारी एजेंट के माध्यम से माल ले जाने के बाद भुगतान नहीं कर रहा है। वीपीएस के पंच ने एजेंट पर दबाव बनाने और पुलिस शिकायत करने का सुझाव दिया है।
  • व्यापारी श्याम सुन्दर अग्रवाल ने बताया कि रामपुर एवं जयपुर के व्यापारी के यहां लाखों  रुपये अटका हुआ। वह बकाया देने की बात तो करता है, लेकिन रुपये देता नहीं और कोलकाता के व्यापारी से माल ले रहा है, ऐसे व्यापारी के साथ क्या करना चाहिए? वीपीएस के पंच राजेश इनका सहयोग करेंगे और जयपुर के वाट्स ग्रुप में फोटो डालने जैसे दबाव बनाने की सलाह दी।
  • रिजेन्ट मार्केट के व्यापारी लोकेश ने बताया कि एजेंट के माध्यम से वापी के व्यापारी के यहां रुपया फंसा है। वीपीएस के पंच संजय डालमिया इनकी मदद करेंगे और एजेंटे पर कानूनी कार्रवाई करके  दबाव बनाने की सलाह दी गई है।

 

सूरत के व्यापारियों की शिकायत पर कोर्ट समन

वीपीएस के एडवोकेट अमित पटेल ने लोकतेज ने बताया कि सूरत के व्यापारियों ने उनके बकाया भुगतान के लिये लिगल नोटिस व कोर्ट केस दर्ज कराए हैं और सूरत कोर्ट ने समन भी इश्यू किये हैं। अगर पार्टी समन नहीं लेती है, तो कोर्ट वारंट जारी कर सकती है और उसके बाद नोन-बेलेबल वारंट भी इश्यू कर सकती है। यदि आरोपी पार्टी ‌शिकायतकर्ता पार्टी को पेमेन्ट कर देती है तो केस वापस भी लिया जा सकता है। जिन पार्टियों को कोर्ट ने समय भेजे हैं उनकी वीपीएस के माध्यम प्राप्त सूची इस प्रकार हैः

हेमंत शर्मा, सूरत / शमशाद आलम, वैधान, मध्यप्रदेश / गोविंद राम जिंदल, दिल्ली / विकास कुमार कन्हैयालाल अग्रवाल, सूरत / प्रकाशचंद्र मांगीलाल जोशी, सूरत / कुसुम संजयकुमार पमनानी, नंदगांवपेट, महाराष्ट्र / युसुफ अब्दुल माजिव मेनन, वडोदरा / अंकित कुमार जैन, भवानी मंडी, राजस्थान / संजय मंगनानी, मध्यप्रदेश / मगनभाई वासराम ओझा, सूरत / मंसूर नूरमोहम्मद गनियानी, मुंबई / ऊदाराम, बैंग्लूरु / सुकन वैष्‍णव, बैंग्लुरु / बसंत सिंह, सचिन, सूरत / संजय माधवप्रसाद शर्मा, सूरत / प्रेम देवी, हैदराबाद / अशोकभाई, बैंग्लुरू।

 

इस प्रकार देखा जा सकता है कि व्यापार प्रगति संघ के प्रयासों से सही मायनों में सूरत के व्यापारियों को लाभ हो रहा है और उनकी डूबती पूंजी फिर से वर्किंग कैपिटल बनकर व्यापार में लग रही है।


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व्ययापार प्रगति संघ के सदस्य बनें। यदि आपके पास कोई सुझाव हैं तो अगली रविवारीय बैठक में अवश्य दें।

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