क्या सिर्फ छुट्टी की घोषणा के लिए है फोस्टा


फोस्टा में लगभग सभी मार्केट एसोशियसन सदस्य है तथा अपनी दुकानों की संख्या के हिसाब से सभी ने प्रतिनिधि संस्था में भेजे हुए है।
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सूरत का कपड़ा बाजार एशिया का सबसे बड़ा कपड़ा बाजार माना जाता है। कुछ ही किलोमीटर के क्षेत्र में हज़ारो दुकानें, सैंकड़ो मार्केट में संचालित होती है, जहां कपड़े का लगभग हर एक प्रकार उपलब्ध हो जाता है। इतनी दुकानों में काफी बड़ी संख्या में व्यक्ति काम करते है। व्यवसायियों से लेकर कर्मचारियों तक अगर गिनती करे तो यह संख्या लाखो में पहुंचती है। इतनी बड़ी संख्या में जनसंख्या होने पर भी यहां पर किसी भी तरह से अतिरिक्त पुलिस बल की आवश्यकता नही होती है तथा बड़ी ही शांतिपूर्ण ढंग से यहां की सारी व्यवस्था हो जाती है।

हर एक मार्केट की अपनी एसोसिएशन है जो मेंटेनेंस तथा मार्केट के नियमन सम्बन्धी अन्य कार्य देखती है। लेकिन सभी मार्केट एसोसिएशन में आपस मे तालमेल बैठाने तथा सामूहिक निर्णय लेने के लिए एक प्रतिनिधि संस्था की निनान्त आवश्यकता होती है। इसके अलावा भी बाजार के ज्वलंत मुद्दों पर आपस मे मिलकर सामूहिक निर्णय लेने तथा क्रियान्वयन के लिए भी एक संस्था की अत्यंत जरूरत होती है। वर्तमान में कई संस्थाए सूरत कपड़ा बाजार में कार्यरत है लेकिन वो सभी व्यापारिक अड़चनों तथा कोई पार्टी पीड़ित हो जाये तो उसे न्याय दिलवाने के कार्य मे संलग्न है। मार्केट एसोसिएशन की प्रतिनिधि संस्था सिर्फ एक ही है। वो है फेडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाईल ट्रेडर्स एसोसिएशन यानी कि फोस्टा।

फोस्टा में लगभग सभी मार्केट एसोशियसन सदस्य है तथा अपनी दुकानों की संख्या के हिसाब से सभी ने प्रतिनिधि संस्था में भेजे हुए है जिन्हें फोस्टा सदस्य कहा जाता है। यह सदस्य चुनाव द्वारा डायरेक्टर चुनते है जिनकी संख्या 31 होती है, तथा डायरेक्टरों द्वारा ही अध्यक्ष, सचिव आदि का चयन होता है। डायरेक्टर का कार्यकाल संस्था के संविधान के मुताबिक 3 साल का निश्चित किया हुआ है।

वर्तमान में संस्था ऐसा लगता है कि संक्रमण काल से गुजर रही है। संस्था के सभी डायरेक्टर का कार्यकाल खत्म हुए काफी अरसा बीत गया है परन्तु कही भी चुनाव के आसार नजर नही आते है। संस्था के ज्यादातर डायरेक्टर को संस्था में लेशमात्र भी रुचि नही है। एक डायरेक्टर तो ऐसा भी है जो दो कार्यकाल पूर्ण कर चुका लेकिन एक भी बैठक में नही आया है। इसके अलावा जो सक्रिय थे उन्होंने अपनी नई संस्थाओं का गठन कर लिया है,इसलिए वो भी इसमे रुचि नही लेते है।

चुनाव की मांग पिछले तीन सालों से इसके सदस्य उठाते रहते है लेकिन इसके पदाधिकारियों के कानों में जूं तक नही रेंग रही है। इसके लिए काफी रोष सदस्यों में व्याप्त है क्योकि पदाधिकारियों के इस रवैये से संस्था को अस्तित्व के संकट का सामना करना पड़ रहा है। चूंकि बाजार के नियमन के लिए प्रतिनिधि संस्था का होना अत्यंत जरूरी है इसलिए आम व्यापारी भी इसके प्रति चिंतित है।

कल सोशल मीडिया में फोस्टा चुनाव की चर्चा रही। लेकिन वो चर्चा सीधी चुनावी चर्चा नही थी। इसके लिए आगामी महावीर जयंती की छुट्टी को निशाने पर लेकर संस्था पर तीर चलाये गए। उल्लेखनीय है कि सूरत कपड़ा बाजार में कोई भी छुट्टी की घोषणा फोस्टा द्वारा ही की जाती है। संस्था उसके लिए मार्केट एसोसिएशन को पत्र या फोन के माध्यम से इत्तला करती है। फोस्टा के इस आदेश को सभी मार्केट स्वीकार भी करते है। लेकिन परसो जैसे ही संस्था ने लेटरपेड जारी किया वैसे ही इसके खिलाफ बगावत प्रारम्भ हो गई।

फोस्टा सदस्य प्रश्न करने लगे कि क्या संस्था सिर्फ छुट्टी की घोषणा के लिए ही है। हालांकि संस्था द्वारा कपड़ा बाजार से सम्बंधित सभी प्रश्नों पर निर्णय तथा कार्य किया जाता है लेकिन संस्था में सभी डायरेक्टर की उदासीन वृति के कारण संस्था का दायरा खाली अवकाश की घोषणा तक ही सीमित हो गया है। इसलिए सदस्यों ने यह अनुरोध किया कि राष्ट्रीय अवकाश के अतिरिक्त सभी अवकाश स्वेच्छिक घोषित कर दिए जाएं ताकि फोस्टा को इसके लिए बारबार लेटरपेड नही निकालना पड़े।

मोटी बेगमबाड़ी के एक व्यापारी ने कहा कि संस्था द्वारा व्यापारिक समस्याओं पर कोई ध्यान नही दिया जाता है। इसीलिए अन्य संस्थाए पनप रही है। अभी संस्था के पास छुट्टी की घोषणा के अतिरिक्त कोई कार्य नही है तो क्या हमने सिर्फ इसलिए ही इसका गठन किया था? हाल में बाजार की हर व्यवस्था बिगड़ी हुई है जिस पर कोई भी पदाधिकारी ध्यान नही दे रहा है। इसलिए सिर्फ छुट्टी घोषित करने वाली संस्था का निर्णय हम मान्य रखे या नही इसके लिए हम बैठक करके निर्णय लेंगे।

यह तो स्पष्ट है कि संस्था पर निशाना अवकाश की घोषणा पर नही बल्कि लोकतंत्र कायम करने के लिए लग रहा है। तब इसके पदाधिकारी क्या निर्णय करेंगे यह देखने वाली बात है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय