बड़े व्यापारियों के काउंटर सेल से सूरत के कपड़ा व्यवसाय में बढ़ी लेट पेमेंट की समस्या


(PC : livemint.com)

राजू तातेड़

सूरत कपड़ा मार्केट में हाल के वर्षों व मुख्यतः जीएसटी के बाद लेट पेमेंट की समस्या से सूरत के छोटे व मध्यम क्लास के व्यापारियों को मुसीबतों को सामना करना पड़ रहा है। कपड़ा मार्केट से मिली जानकारी के अनुसार करीब 5 हजार बड़े व्यापारियों ने अलग-अलग मंडियों के बड़े व्यपारियों के यहां अपना सेल बढ़ाने के लिए काउंटर खोल दिये हैं। प्रतिस्पर्धा में सेल बढ़ाने के चक्कर में हाल में बड़ी मंडियों के बड़े व्यापारियों के यहां सूरत के नामचीन व्यपारियों का कपड़ा काउंटर खोलकर बेचा जा रहा है। जिसकी सीधी मार सूरत व बाहर की मंडियों के छोटे व्यापारियों को पड़ रही है। बाहर की मंडियों से लेट पेमेंट की समस्या भी इन काउंटर की वजह से हो रही है।

काउंटर खुलने का मतलब

सुरत का व्यापारी अच्छी सेल्स वाली दुकान पर अपने खर्चे पर अपना सेल्समैन अपना माल बेचने के लिए बिठाता है।

वह सेल्समैन ही जरूर के हिसाब से सूरत में माल का आर्डर देता है व ज्यादा से ज्यादा माल बेचने की चेष्टा करता है।

बहार गांव का व्यापारी जैसे-जैसे माल बिकता है अपने सेल्स से कमीशन काट कर सूरत वाले को भेज देता है।

न स्टॉक मेंटेन करना, न माल बेचने का टेंशन, सब सूरत वाले को करना है।

संजय जगनानी

सूरत के बड़े व्यापारी थोकबन्द कपड़ा काउंटर पर भेजते हैं, जिससे वो अपना सेल व कमीशन के चक्कर में रिटेल में लंबी उधारी में बेचते हैं।व्यापारी काउंटर सेल का पेमेंट भी उसी हिसाब से लेट ही भेजते हैं। साधरणतः पहले रिटेल व्यापारी मंडी में जाता था, तो अलग-अलग दुकानों से रोटेशन के हिसाब से पेमेंट कर थोड़ा-थोड़ा कपड़ा खरीदकर अपना कोटा पूरा करता था। जिससे सूरत मंडी का पेमेंट भी समय पर आ जाता था। लेकिन अब रिटेल व्यापारियों को सूरत के नामचीन पैढियों के काउंटर थौकबन्द कपड़ा लंबी उधारी में मिल जाता है व नहीं बिका व वापसी भी हो जाता है, उसका भी फायदा मिल जाता है। इससे रिटेल का व्यापारी अन्य छोटे व्यापारियों के यहां पहुच ही नहीं पाता। इसी कारण बाहर की मंडियों के छोटे व्यपारियों का रोटेशन पेमेंट व बिक्री भी कम हो गई है। इस वजह से मंडियों से छोटे व मध्यम व्यपारियों का पेमेंट लेट होता ही है, वहीं बड़े व्यापारियों का काउंटर पेमेंट भी।

जिन व्यापारियों ने बाहर मंडियों में अपने काउंटर लगाए हैं, वो सेल बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा में थौकबन्द कपड़ा भेज रहे हैं। वहीं पेमेंट भी दुकानदार सहूलियत से भेजते हैं। सामान्यतः पहले पेमेंट की धारा 90-100 दिन नो लेस की रहती थी, वो अब 180 दिन से ऊपर हो गई है।हालांकि काउंटर होने से बड़े व्यपारियो को सेल में वृद्धि हुई है पर पेमेंट की धारा पूरे सूरत टेक्सटाइल मार्केट की बिगड़ी है। पहले सूरत का व्यापारी अपना सेल्समेन काउंटर पर रखता था, पर उसके रहने, खाने-पीने का खर्च ज्यादा था व रिटेल मंडियों का कम अनुभव होने के कारण अब काउंटर में वहीं के यानि दुकानदार के स्टाफ को ही अलग-अलग काउंटर सम्भला दिए हैं। जिसकी पगार का भुगतान बिल हर महीने सूरत के व्यापारी को करना पड़ता है। रिटेल में सेल बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा से माल बेचकर पेमेंट करने व न बिका माल वापसी की थीम का व्यापार सूरत के बड़े व्यापारियों को मुनाफा करवाए या नुकसान ये तो वो ही समझ सकते हैं। पर दोनों ओर के छोटे व्यपारियों को अपनी सेल व पेमेंट दोनों का भारी नुकसान हो रहा है। काउंटर सेल में वहाँ के दुकानदार अपनी सहूलियत से भुगतान करते हैं, तो छोटे व्यापारी अपनी काउंटर की वजह से घटे सेल से।

कुल मिलाकर लेट पेमेंट की मार सूरत के बड़े व छोटे व्यापारियों को ही पड़ रही है। काउंटर दुकानदार को सेल बढ़ाने के लिए सूरत के व्यापारी को सभी सुविधाओं के साथ स्टाफ की पगार व अच्छा खासा कमीशन भी मिलता है। मुख्य अनसोल्ड कपड़ा 6-12 महीने से भी रिटर्न स्वीकार कर लिया जाता है। इससे दुकानदार तो आराम से अपना काम बढ़ाता है। नए-नए सूरत के व्यापारी भी काउंटर लगाने की हौडा-हौड़ में सम्पर्क करते हैं। काउंटर से सेल तो बढ़ा है लेकिन पूरे सूरत मार्केट के पेमेंट की हालत दिनों दिन बिगड़ी है इसमें कोई दो राय नही।

 

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