डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन से विकलांग इंटरनेशनल क्रिकेट तक का सूरत के प्रविण का सफर


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कहते हैं यदि व्यक्ति किसी भी चीज़ को शिद्दत से चाहे तो पूरी कायनात उस व्यक्ति के सपनों को पूरा करने में लग जाती है। ऐसा ही कुछ हुआ सूरत के होनहार युवक प्रविण वानखेडे के साथ।

प्रविण वानखेडे को बचपन से क्रिकेट में काफी रूचि थी। उसकी गेंदबाजी और बल्लेबाजी के उसके जान-पहचान के लोग कायल थे। जैसा कि हर क्रिकेट चाहक की कामना होती है कि वह राष्ट्रीय व अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर खेले और देश का नाम रौशन करे। वह इसके लिये काफी मेहनत भी करता। सचिन तेंदूलकर को वह अपना आदर्श मानता है।

शुरु में गैर के सिलिंडरों की डिलीवरी और वर्तमान में पालिका के डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन का काम करने वालप प्रविण का दुर्भाग्यवश आठ वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में एक पैर गंवाना पड़ा। उसका पैर टेम्पो के नीचे आ गया था। अचानक उसके सपने मानो चूर-चूर हो गये। वह हमेशा के लिये दिव्यांग हो गया। बावजूद इसके प्रविण ने हिंमत नहीं हारी और क्रिकेट खेलना जारी रखा। अपना पैर गंवा देने के बाद भी जब प्रविण पूरी तन्मयता के साथ क्रिकेट खेलता था तो लोग उस पर हंसते थे। लेकिन उसने हार नहीं मानी। अब तकदीर ने उसका साथ दिया है।

प्रविण वानखेडे को विकलांग इंटरनेशन क्रिकेट मैच खेलने के लिये भारतीय टीम में चुना गया है। आगामी १२ मार्च को इंटरनेशन टी-२० मुकाबले में वह भारत की टीम की ओर से नेपाल के साथ भिड़ेगा।

इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने के लिये चुने जाने पर प्रविण के घरवाले भी खुश हैं। उम्मीद करते हैं प्रविण वानखेडे सफलता के नये सोपान तय करें।