भाजपा के लिये ‘एक पन कई काज’ संवार सकता है सूरत से महेश सवाणी को टिकट


(PC : outlookbusiness.com)

सूरत। पाटीदार आंदोलन के बाद सूरत में भाजपा के किसी बड़े नेता की सभा करवाने को जोखिम महेश सवाणी ने उठाया था, और वही महेश सवाणी का नाम सूरत संसदीय क्षेत्र के संभवित भाजपा उम्मीदवार के रूप में सबसे आगे चल रहा है। यदि यह संभावना सही साबित होती है और भाजपा आलाकमान महेश सवाणी को सूरत से टिकट देता है तो एक पन कई काज वाली बात हो जायेगी। कुल मिलाकर ऐसा कोई भी निर्णय भाजपा के लिये लाभकारी ही साबित होगा।

बता दें कि पाटीदार आंदोलन के बाद भाजपा के किसी नेता के लिये हीरा उद्योग के केंद्र समान वराछा में जाना दुभर हो गया था। ऐसे विकट राजनीतिक माहौल में महेश सवाणी ने वराछा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का सत्कार समारोह रखा था। वर्ष 2016 में उस वक्त मानो पूरी सरकार वहां मौजूद थी। यद्यपि, हार्दिक पटेल के समर्थकों द्वारा कुर्सियां उछालने से समारोह समय से पहले समाप्त कर दिया गया था। समारोह का आयोजन और खर्च महेश सवाणी ने ही उठाया था, ऐसी चर्चा थी।

महेश सवाणी यूं तो उद्योगपति हैं, लेकिन समाजसेवा के लिये भी उतने ही मशहूर हैं। उन्होंने अनाथ हों ऐसी लगभग तीन हजार बेटियों का ब्याह करवाया है। उनकी अनेकों शालाएं और पीपी सवाणी नाम से युनिवर्सिटी कार्यरत है। इस प्रकार वे सामाजिक रूप से सक्रिय तो हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी में प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय नहीं हैं। पिछले कुछ समय से सूरत जैसी सुरक्षित मानी जानी वाली लोकसभा सीट से उनका नाम चलने संबंधी चर्चाओं के जवाब में वे यही कहते रहे हैं कि वे राजनीति में आना नहीं चाहते। यद्यपि अब जबकि प्रदेश की आधी से ज्यादा लोकसभा सीटों के भाजपा प्रत्याशियों की घोषणा की जा चुकी है और सूरत की सीट की घोषणा में विलंब किया जा रहा है, ऐसे समय में जब उनसे पूछा गया कि क्या वे चुनाव लड़ेंगे, तो इस बार उनके सूर बदते हुए थे और कहा कि टिकट मिला तो वे अवश्य चुनाव लड़ेंगे।

सूरत की राजनीति के जानकारों का कहना है कि सूरत की सीट भाजपा के लिये सुरक्षित सीट है। अब तक यह सीट मूल सूरतियों के हिस्से में रही। वर्तमान सांसद दर्शनाबेन जरदोष से पहले काशीराम राणा यहां का प्रतिनिधित्व करते थे। उनसे पहले मोरारजी देसाई भी सूरत से ही चुनाव जीतते थे। लेकिन अब सूरत संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं का चित्र बदल रहा है। इस संसदीय क्षेत्र में अब वराछा का एक बड़ा हिस्सा भी शामिल है। यहां पाटीदारों का प्रभुत्व है। यदि महेश सवाणी को टिकट मिलता है तो सूरत में पाटीदार आंदोलन के बाद हार्दिक पटेल का बचा-कूचा असर भी खत्म हो जायेगा। इसका दूसरा लाभ भाजपा को सौराष्ट्र क्षेत्र में मिल सकता है क्योंकि महेश सवाणी मूल रूप से सौराष्ट्र के हैं और वहां भी सामाजिक रूप से सक्रिय है। एक बड़े उद्योगपति होने के कारण पार्टी को आर्थिक मदद भी कर सकते है।

नवसारी सीट से सीआर पाटिल को तीसरी बार ‌रिपिट किया जा चुका है। सूरत सीट से नाम की घोषणा नहीं की गई, इससे साफ प्रतीत होता है‌ कि वर्तमान सांसद दर्शनाबेन जरदोश का पत्ता कट चुका है। अब शायद आलाकमान यही अनुमान लगाने की कोशिश में दिख रहा है कि महेश सवाणी को टिकट देने का राजनीतिक असर क्या पड़ेगा।