माँ अमृतम कार्ड को लेकर क्या घपले कर रहे हैं एजेंट


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भारत में कोई भी सरकारी कार्य करवाना हो तो लोगों को सरकारी कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। चाहें वो सरकारी बैंक में खाता खुलाने का हो या भले ही आधार कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादी का हो। सभी कार्यों के लिए आपको दस्तावेजों के कारण बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जहां सरकारी दफ्तर आपको बार-बार चक्कर लगवाते हैं वहीं दूसरी ओर कुछ दलाल होते हैं जो आपका काम कम दस्तावेजों के साथ तथा आसानी से करवा देते हैं। ऐसे में जो लोग सक्षम होते हैं तथा अमीर होते हैं वे तो दलालों की मदद से अपने कार्य आसानी से करवा लेते हैं। परंतु गरीब तथा मध्यम वर्ग के लोगों को फिर भी सरकारी कार्यालयों के धक्के खाने ही पड़ते हैं। एसा ही एक किस्सा होल ही में सूरत में सामने आया।

गरीब लोगों को स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए, राज्य सरकार द्वारा माँ अमृतम कार्ड की योजना जारी की गई थी। तो सूरत में कई एजेंट माँ अमृतम कार्ड निकालने का व्यवसाय चलाते हैं। तो अगर आपको एजेंट के पास से माँ अमृतम कार्ड निकलवाना हो तो आपको किसी भी प्रमाण, आय पैटर्न की आवश्यकता नहीं होगी केवल एजेंट आपसे जितने पैसे मांगे उतने दे दीजिये। उसके बाद केवल 24 घंटे के भीतर आपका कार्ड आपको अपने हाथों में मिल जाएगा और हाँ इसमें वही लाभ मिल सकेंगे जो दूसरे कार्ड के धारकों को मिल सकते हैं। इस संबंध में सवाल यह है कि, अगर गरीब व्यक्ति को अपना अमृतम कार्ड निकलवाना हो तो सरकारी कार्यालयों में चक्कर लगाना पड़ता है और कुछ प्रमाणों की कमी के कारण वे कार्ड से वंचित रह जाते हैं। जबकी बड़े लोग ऐसे एजेंटों को पैसे देकर बिना कागज़ी कार्यवाही के माँ अमृतम कार्ड प्राप्त करने में सक्षम होते हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, सूरत में सामाजिक संस्था से जुड़े एक व्यक्ति को सूचित किया गया था कि सूरत में कुछ सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में पैसे लेकर बिना प्रमाण के माँ अमृतम कार्ड दिए जा रहे हैं। वह व्यक्ति सूरत के रांदेर स्थित हेल्थ सेंटर पहुंचा और एजेंट से मिलकर बात करी कि उनके पास कोई प्रमाण नहीं है और उन्हें ज़रूरी तौर पर माँ अमृतम कार्ड की जरूरत उत्पन्न हो गई है। तब एजेंट ने 2500 रुपये मांगे और कहा कि आय पैटर्न और राशन कार्ड मैं खुद बना लुंगा। जब संगठन के व्यक्ति ने 2500 रुपये एजेंट को सौंपे जिसके कारण अगले दिन माँ अमृतम कार्ड संगठन के व्यक्ति को मिल गया। जब कार्ड हाथ में आया था तो वे चौक गए क्योंकि वह सूरत के वराछा इलाके में रहते थे और उनके माँ अमृतम कार्ड बनाने के लिए इस्तेमाल किए मए सभी प्रमाण फर्जी तरीके से अडाजन इलाके के बनाए गए थे।