आत्महत्या: चिंतनीय विषय


आजकल लोगो की मनोवृति इतनी ज्यादा बदल गई है कि सहनशीलता नाम की कोई चीज ही नही रही है।
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आजकल लोगो की मनोवृति इतनी ज्यादा बदल गई है कि सहनशीलता नाम की कोई चीज ही नही रही है। ईश्वर का दिया हुआ यह जीवन बहुत ही अनमोल है। सुख तथा दुख आते जाते रहते है, तो उस पर ज्यादा विचार क्यो करने का? हानि लाभ, मान अपमान को मन पर लेकर ईश्वर के दिये हुए जीवन को क्षण में ही खत्म करने में आजकल लोग हिचकिचाते नही है। क्या मृत्यु से भी दुखद कोई चीज जीवन मे होती है? तो जरा से दुख के कारण उसका वरण क्यो करना। क्या हमें ईश्वर पर विश्वास नही है जो इस सृष्टि का नियंता है। अगर विश्वास नही भी है तो भी इस नायाब जीवन को खत्म करना कहाँ तक उचित है?

बड़ी उम्र के लोग जिम्मेदारी के बोझ तले दबकर अपनी इहलीला को खत्म कर लेते है लेकिन बच्चे जिनके ऊपर कोई जिम्मेदारी नही होती सिवाय पढ़ाई के, उनके द्वारा अगर जीवन खत्म कर लिया जाए तो कितना चिंतनीय है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि देश में रोजाना 14 साल तक की उम्र के आठ बच्चे आत्महत्या की राह चुन रहे हैं। ज्यादातर एकल परिवारों में माता पिता दोनों के कामकाजी होने की वजह से उनके पास बच्चों की समस्याओं पर ध्यान देने की फुर्सत नहीं होती, इससे लगातार कुंठा के चलते बच्चा मानसिक अवसाद की हालत में पहुंच जाता है।

भारत में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि देश में कम से कम 15 करोड़ लोग मानसिक अवसाद से पीड़ित हैं। लेकिन इनमें से महज तीन करोड़ लोग ही विशेषज्ञों की सलाह लेते हैं। इस कारण भी अवसादग्रस्त व्यक्ति आत्महत्या जैसे घृणित कदम को उठा लेता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में किशोरों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ने के बावजूद 10-12 साल के बच्चों की आमहत्या की घटनाएं अब भी बहुत है। उनका कहना है कि कई बार बच्चे अपना अपमान या अपनी मांग ठुकराए जाने जैसी चीजों को स्वीकार नहीं कर पाते।
हाल ही में तेलंगाना में छात्रों द्वारा आत्महत्या करने की बड़ी घटना हुई है। 18 अप्रैल को इंटरमीडिएट एग्जाम का रिजल्ट आया था। फेल होने की वजह से अब तक 22 छात्र मौत को गले लगा चुके हैं। पिछले चार सालों में रिजल्ट जारी होने के बाद आत्महत्या करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या सबसे ज्यादा है। 2018 में 12वीं का रिजल्ट जारी होने के बाद 6 छात्रों ने आत्महत्या की थी।

इस बारे में जारी रिपोर्ट में रिजल्ट प्रोसेस में खामियों की बात को स्वीकार किया गया है। रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि ओएमआर शीट में गड़बड़ी की वजह से सॉफ्टवेयर की ओर से सही अंक नहीं दिए गए। रिजल्ट जारी करने वाली कंपनी ग्लोबलरिना टेक्निकल प्राइवेट लिमिटेड ने माना है कि उसकी ओर से गलत रिजल्ट अपलोड किया गया। कम्पनी के सीईओ एसवीएस राजू का कहना है कि जो भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। सॉफ्टवेयर में खामी की वजह से गलत रिजल्ट अपलोड हुआ। मेरे पिता होने के नाते मैं बच्चों को खोने वाले माता-पिता का दर्द समझ सकता हूं।

और करे अपराध कोई, फल पाए कोई और की कहावत को चरितार्थ करते हुए कम्पनी के अपराध का दण्ड निरपराध बच्चो ने उठाया। लेकिन मैं यही कहना चाहूंगा कि जीवन अनमोल है। इसे नष्ट न करे, बल्कि इसे सदुपयोग में लगाये। हो सकता है आज हमने जितना खोया हो उससे कही अधिक हमे कल प्राप्त हो जाये।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय