कुछ ज्योतिषीय उपाय : जो सुगमता ला सकते है


किसी भी व्यक्ति को अगर जीवन मे सफल बनना है तो उसे एक निश्चित क्षेत्र चुनकर उसमे मेहनत करनी ही पड़ेगी।
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सफलता का कोई भी शॉर्टकट नही होता है। किसी भी व्यक्ति को अगर जीवन मे सफल बनना है तो उसे एक निश्चित क्षेत्र चुनकर उसमे मेहनत करनी ही पड़ेगी। वो मेहनत शारीरिक हो चाहे मानसिक, पर जब तक आप अपना शत प्रतिशत नही दोगे,इच्छित सफलता की प्राप्ति मुश्किल ही नही नामुमकिन है, हां कोई सन्तोष धारण करके बैठ जाये तो उसे प्रारब्धानुसार फल मिलता तो है लेकिन वो न्यून होता है, उसी प्रकार होता है जैसे किसी बन्द कमरे में बैठे व्यक्ति को सूर्योदय होने पर प्रकाश तो मिलता है पर धूप नही मिल सकती है, वो महसूस तो कर सकता है कि सूर्य का उदय हो गया है लेकिन उसका आनन्द नही ले सकता। ठीक उसी प्रकार अकर्मण्य मनुष्य अपने प्रारब्ध के भरोशे बैठकर सिर्फ उतना ही प्राप्त करता है जितना उसको सृष्टि के नियमानुसार परमात्मा के घर से अवश्यम्भावी मिलना होता है।
लेकिन कई बार परिस्थितियां समान नही रहती है। प्रारब्ध के अनुसार तथा संचित कर्मो के परिणामस्वरूप कर्मठ व्यक्ति को भी कतिपय परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उसके द्वारा किये गए योग्य कार्यो का भी उसको प्रतिफल नही मिलता है बल्कि कभी कभी तो विपरीत परिणाम भी मिल जाता है। उस समय व्यक्ति निराश हो जाता है। उसका अपने कर्म में मन नही लगता है तथा धीरे धीरे मेहनतकश होते हुए भी अवनति को प्राप्त हो जाता है।

ऐसे मामलों में जब कोई दिशा न मिले तब किसी योग्य ज्योतिषी का सम्पर्क करने के लिए लोग बताने लगते है। आज का आलेख उसी सन्दर्भ में है। यद्यपि मैं स्वयं एक एस्ट्रोलॉजर हूँ परन्तु मैं सर्वाधिक कर्म में ही विश्वास करता हूँ। बिना कर्म किये कुछ नही मिलता जैसे कि थाली सामने भी अगर हो तो भी भोजन हमे स्वयं ही करना पड़ता है, प्रारब्धानुसार मिले भोजन का भी ग्रास हमारे मुंह तक तभी कोई देता है जब हाथों की स्थिति कौर को मुंह तक ले जाने की न रहे। अतः कभी भी प्रारब्ध के भरोशे न रहकर कर्म पर निर्भर रहना चाहिए। आगे का लेख वही पढ़े जिन्हें अपने कर्म तथा ईश्वर पर विश्वास है।

अब मैं कुछ ज्योतिषीय बाते आपको बताना चाहता हूं जो जीवन मे सदैव आपके लिए उपयोगी रहेगी। जब किसी भी व्यक्ति को लगे कि उसके द्वारा किये गए कार्यों का उचित परिणाम नही मिल रहा बल्कि गाड़ी ओर ज्यादा रिवर्स जा रही है ,तब सबसे पहले खुद के द्वारा किये गए कार्य का अवलोकन करना चाहिए कि इसमें कोई गलती तो नही रह गई। उसके बाद भी योग्य परिणाम न मिले तथा कोई भी भूल न लगे तो भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके रेमेडीयल उपाय कर सकता है।

आज बुधवार युक्त अमावस्या है।आज का दिन राहु तथा केतु से सम्बंधित उपायों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। एक ज्योतिषी के रूप में मैने पाया है कि वर्तमान में राहु केतु के क्रूर प्रभावों के कारण काफी व्यक्ति परेशानी में रहते है। इन दोनों छाया ग्रहों के प्रभाव से जो दूषित योग बनते है उनमें काल सर्प योग, ग्रहण योग, गुरु चंडाल योग तथा पितृ दोष प्रमुख है। कुंडली के जिस भाव मे यह छाया ग्रह बैठते है तो उसके स्वामी का फल प्रायः इनके द्वारा दिया जाता है। लेकिन जहाँ यह मौजूद होते है उस स्थान को दूषित भी करते है। इसके अलावा जिनको यह फलदायी होते है उनको भी देरी से फल देते है। व्यक्ति की अवस्था जब चालीस से ऊपर की होती है तब राहु महाराज अंगड़ाई लेकर कार्यरत होते है, अगर शुभ फलदाई हो तो। अशुभ फल का परिणाम तुरन्त इसलिए भी मिलता है क्योकि उस अवस्था मे व्यक्ति किंचित अकर्मण्य भी हो जाता है, तो दोनो तरफ से अनपेक्षित परिणाम मिलने की संभावना अधिक हो जाती है।

अगर किसी की कुंडली मे राहु केतु दोषजन्य है तो उसे आज शिव आराधना करनी चाहिए। भगवान आशुतोष को चांदी के सर्प का जोड़ा चढ़ाए। इसे आप बहते जल में प्रवाहित भी कर सकते हो। इसके अलावा आज किया गया राहु का दान बहुगुणित होकर फलदाई होता है। अपने शयनकक्ष में अखंडित मोरपंख लगाए। इसके अलावा भी कुंडली मे भावानुसार राहु केतु का उपाय होता है। लेकिन सबसे बढ़िया उपाय एक ही है कि मिथ्या बोलने से बचे ओर अपने से बड़ो का सम्मान करें। इससे आप पितृदोष से मुक्त हो सकते है जो वर्तमान में सर्वाधिक देखने को मिलता है।

आखिरी महत्वपूर्ण बात, राष्ट्र में अपनी निष्ठा जरूर रखे।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय