हमारे देश का सोशल मीडिया: फेक का भंडार


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हमारे देश मे जुबानी जंग बहुतायत में होती है। नेता और उनके समर्थक जबान से ऐसे लड़ते है जैसे सीमा पर जवान गोलीबारी कर रहे हो। पिछले पांच छह साल में यह अत्यधिक हो चुका है। जबानी जंग करते करते यह लोग किस स्तर तक चले जाएं उसका भी पता नही चलता है। यहां तक कि कई ऐसे समाचार भी डाल देते है जिनका कोई भी वजूद नही होता है। फिर उन्हें फैक्ट चेक में डाल कर देखना पड़ता है कि क्या सच मे ऐसा घटित हुआ था।

न जाने आईटी सेल वालों की सही इन्फोर्मेशन से क्या दुश्मनी है। यह लोग ऐसे हैं कि सच्ची घटना को बढ़ा-चढ़ा दिखाने के चक्कर में आए दिन झूठ ठेल देते हैं। तथा यह भी कहते है कि यह सब आपको बिकी हुई मीडिया नही दिखाएगी। अरे भाई कुछ हुआ होगा तब तो दिखाएगी ना। मीडिया हाउस घटनाओं को खबरों के रूप में दिखाते है, न कि मनगढ़ंत घटनाएं बनाते है। कोई भी घटना का कवरेज करना मीडिया की जिम्मेदारी ही नही बल्कि यही काम भी है, अगर कवरेज न करे तो चलाएंगे क्या? छापेंगे क्या? पर वो जिसका कोई तथ्य ही न हो जिसका सत्य से दूर दूर तक का कोई वास्ता ही न हो वो खबरे तो नही चल सकती ना? ओर उसी के लिए मीडिया को कोसा भी जाता है।

अभी हाल ही में पुलवामा हमले के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो बड़े पैमाने पर शेयर हो रहा है। वीडियो में दावा किया गया पिछले 8 घंटों में 36 आतंकियों को मार गिराया गया है। सबसे पहले बीते शनिवार यानी 17 फरवरी, 2019 को एक फेसबुक पेज “कड़वी सच्चाई” पर यह वीडियो अपलोड हुआ था।

इसे हज़ारो बार शेयर भी किया गया है तथा दो लाख से अधिक लोगो ने पांच दिनों में देख भी लिया है। वैसे इस वीडियो की कोई सच्चाई नही है। यह वीडियो 20 सितंबर 2016 को यूट्यूब पर पोस्ट किए गए एक वीडियो का ही हिस्सा है। यूट्यूब वीडियो 1.12 मिनट का है, जिसे कांट-छांट कर 45 सेकेंड का किया गया है। पुलवामा हमले से पहले ही अपलोड किया जा चुका था। सो साफ तौर पर इसका पुलवामा हमले या उसके बदले से कोई लेना-देना नहीं है।

यह तो एक उदाहरण मात्र था। ऐसे कई फेक वीडियो तथा समाचार काफी तादात में सोशल मीडिया पर घूमते रहते है। लोगो ने 15 फरवरी को तो एक बार युद्ध का भी एलान कर दिया था। खबरे लगा दी गई कि सीमाओं पर फोजे तन गई है और कभी भी युद्ध चालू हो सकता है। जबकि इस बात में कोई भी तथ्य नही था। एक खबर यह भी चल रही है कि प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया है। उसका भी अभी तक कोई प्रमाण नही आया है और रक्षामंत्री बखूबी अपना काम कर भी रही है।

सबसे अधिक फेक वीडियो राहुल गांधी के बनते है। वो इन आईटी वालो के शॉफ्ट टारगेट है। कैसे भी करके उनके भाषणों को सम्पादित करके या तो हास्यास्पद बना देते है या फिर देश विरोधी। लेकिन अब धीरे धीरे जनता भी समझदार हो रही है। जल्दी बहकावे में नही आती है। लेकिन इस तरह के कृत्य न सिर्फ लोकतंत्र के लिए हानिकारक है बल्कि इससे विश्वास भी जा रहा है।

कुछ लोग तो ऐसे भी है जिन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति को भी नही छोड़ा, उनसे भी मोदीजी का प्रचार करवा लिया। लेकिन जैसे ही हम फैक्ट चेक करते है वो गलत होने का प्रमाण भी सामने ही मिल जाता है। आखिर कब तक ऐसा चलता रहेगा यह तो मैं नही कह सकता परन्तु यह आग्रह जरूर करूँगा की तथ्यरहित बाते हमे न तो फैलानी चाहिए न उसे फैलाने वालों को सह देनी चाहिए।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय