अपने बच्चों को ‘रिडर्स अड्डा’ पर भेजिये, उनमें किताबें पढऩे का शौक जगाइये!


बच्चे, बड़े और युवा पीढ़ी सभी मोबाइल, टी.वी, कम्प्यूटर इत्यादि से इस तरह जुड़ चुके हैं कि इनके बिना जी पाना असंभव सा लगता है।
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सूरत की ज्योति डोरा का साहस, पाल और भटार में कार्यरत हैं शाखाएं

(ऋषभ भनसाली)

आज का युग आधुनिक एवं टेक्नोलोजी से भरपूर है, ऐसे में बच्चे, बड़े और युवा पीढ़ी सभी मोबाइल, टी.वी, कम्प्यूटर इत्यादि से इस तरह जुड़ चुके हैं कि इनके बिना जी पाना असंभव सा लगता है। लोग एक दिन खाना खाए बिना गुजार सकते हैं परंतु इनके बिना नही। इसी आधुनिकरण के चलते लोग अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं, और वह है किताबें पढऩा। किताबें ज्ञान का भंडार तो होती ही हैं साथ ही साथ मनोरंजन का भी बहुत ही महत्वपूर्ण साधन भी होती हैं। इसी को मद्दे नज़र रखते हुए श्रीमती ज्योति डोरा ने बच्चों में रीडिंग के लिए रूचि बढ़ाने के लिए ‘रीडर्स अड्डा’ नामक संस्था स्थापित की है। इसका प्रारंभ करने का उनका उद्देश्य था बच्चों में किताबें पढऩे उतनी ही उत्सुकता पैदा करना जितनी खेलने, मोबाइल चलाने तथा टी.वी. देखने के लिये होती है।

यूं तो ज्योतिजी को बचपन से ही पुस्तकों में रूची थी परंतु उन्होंने कभी ये नहीं सोचा था कि वे व्यावसायिक स्तर पर कुछ ऐसा करेंगी। अपनी पुत्री में भी पुस्तकों के लिए रूची बढ़ाने के लिए बचपन से ही उन्होंने घर पर किताबों का भंडार रखना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे उनकी पुत्री की किताबों में रुची बढ़ी उन्होंने उसमें एक परिवर्तन सा महसूस किया जैसे कि उसके अंकों में बढ़ोतरी तथा स्कूल में सभी शिक्षक उसकी प्रशंसा करने लगे। वहीं उन्होंने दूसरी ओर देखा के सभी पैरेन्टस अपने बच्चों के प्रदर्शन में गिरावट और उनके अधिक मोबाइल चलाने की आदत से नाखुश हैं तभी उनके दिमाग में यह ख्याल आया कि यदि मेरी बेटी को पढऩे में इतना मजा आ रहा है और इससे उसकी उन्नती भी हो रही है तो बाकी बच्चे इससे इतना क्यों दूर भागते हैं और इसी समस्या के हल स्वरूप उन्होंने रीडर्स अड्डा की नींव डाली।

रीडर्स अड्डा में बच्चों को अकेडमिक पढ़ाई नहीं कराई जाती बल्कि बच्चों में किताबें पढऩे के प्रति प्रेम उत्पन्न हो इसकी कोशिश की जाती है। एक घंटे के समय काल में बच्चों को पहले कहानी सुनाई जाती है जिसके पश्चात बच्चे अपने पसंद की पुस्तकें पढ़ते हैं। छोटे-छोटे बच्चे भी इतनी अच्छी रीडिंग करते हैं कि अभिभावक देख कर चकित रह जाते हैं। अब तक इसके दो सेन्टर्स हैं जिनमें से एक पाल और एक भटार में है। आने वाले समय में इन्होंने 3 सेन्टर्स और (वेसु, वराछा, पाटिया) खोलने की योजना बनाई है।

नर्सरी से ले कर बड़ी कक्षाओं तक कई उम्र वर्ग के बच्चे यहां आते हैं, जिनको अलग-अलग वर्ग में बांटना तथा हर बच्चे का ध्यान रखना ये सब ज्योतिजी इतनी बाखुबी करती हैं कि बच्चे यहां आने से छुठ्ठी भी नहीं करना चाहते। बड़े ही खुशमिजाज स्वभाव की ज्योतिजी बच्चों को इतनी पसंद हैं कि बच्चे उन्हें एक पल भी नहीं छोड़ते।  रीडर्स अड्डा की खास बात यह है कि यहां बच्चे शौक से आते हैं, शौक से पढ़ते हैं क्योंकि यहां उनके लिए कोई कोर्स नहीं है, कोई सिलेबस नहीं है। चूंकी यह एक रीडिंग अड्डा है तो यहां बच्चे अपनी रूची से कुछ भी पढ़ सकते हैं, जिसकी बदौलत बच्चों को पढऩे में मज़ा आता है। सभी लोग अपने बच्चों को यहा भेजकर उनकी मोबाइल, टी.वी. के साथ-साथ किताबों में भी रूची बढ़ा सकते हैं जिसके फल स्वरूप बच्चों को किताबें पढऩा अच्छा लगेगा और कुछ भी पढऩा व समझना उनके लिए आसान हो जाएगा जिससे उनके स्कूल में भी प्रदर्शन में बढ़ोतरी होगी, ऐसा रीडर्स अड्डा की संचालिका श्रीमती ज्योति डोरा का मानना है।

रिडर्स अड्डा में आप 8460324296 पर सम्पर्क भी कर सकते हैं।