पुलवामा आतंकी हमला: स्थायी समाधान की जरूरत


जम्मू से श्रीनगर जा रही सीआरपीएफ की 78 गाड़ियों के काफिले पर कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने फिदायीन हमला कर दिया।
Photo/Loktej

कल जम्मू से श्रीनगर जा रही सीआरपीएफ की 78 गाड़ियों के काफिले पर कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने फिदायीन हमला कर दिया। इस हमले में करीब 40 जवान शहीद हो गए, कई घायल हैं। इस काफिले में 2547 जवान शामिल थे। आतंकवादी संघठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ले ली है। विस्फोटकों से भरी गाड़ी के जरिए यह अब तक का सबसे बड़ा हमला है। इससे पहले अक्टूबर 2001 में कश्मीर विधानसभा और जनवरी 2004 में सुरक्षा बलों के काफिले पर भी इसी तरह हमला हुआ था। विधानसभा पर हमले में 38 मौतें हुई थीं।
जैश ए मोहम्मद के आत्मघाती आतंकी आदिल अहमद उर्फ वकास कमांडो ने दोपहर 3:15 बजे यह फिदायीन हमला किया। उसने एक गाड़ी में विस्फोटक भर रखे थे। जैसे ही सीआरपीएफ का काफिला लेथपोरा से गुजरा, आतंकी ने अपनी गाड़ी जवानों से भरी बस से टकरा दी। बताया जा रहा है कि आदिल ने स्कॉर्पियो में 350 किलोग्राम विस्फोट भर रखा था। पुलवामा के काकापोरा का रहने वाला आदिल 2018 में जैश में शामिल हुआ था।
देश के सभी राजनेताओं तथा नागरिकों ने इस हमले की निंदा की है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हमला घृणित है। जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी। पूरा देश जवानों के परिवार के साथ खड़ा है। राहुल गांधी ने भी इस हमले पर दुख जाहिर किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि यह कायराना हरकत से मैं बुरी तरह व्यथित हूं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द की। उन्होंने कहा कि यह समय राजनीति पर बात करने का नहीं है। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि आतंकियों के इस कृत्य के लिए ऐसा सबक दिया जाएगा, जिसे वे कभी न भूल नही पाएंगे।
भारत में अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने कहा कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर में हुए इस आतंकी हमले की निंदा करता है। पीड़ितों के परिवार के साथ हमारी संवेदनाएं हैं। अमेरिका आतंक के खिलाफ लड़ाई में और उसे हराने में भारत के साथ खड़ा है। अमेरिका ने अपने नागरिकों को पाकिस्तान तथा इसके समीपवर्ती इलाको में यात्रा करने के बारे में पुनर्विचार करने का अनुरोध दिया है।
इस प्रकार का हमला बेहद निंदनीय है। भारत हर तरीके से आज सक्षम है। यह भी सत्य है कि पहले से अभी आतंकी घटनाएं कम हुई है लेकिन उसको पूर्णतया नेस्तनाबूद करने की परम आवश्यकता है। अगर एक भी आतंक का बीज बचा तो वो फिर से वृक्ष बनने की कोशिश जरूर करेगा। इसलिए हमारे यहां भी इजराइल की तरह ही नीति बननी चाहिए। जैसे मोसाद अपने नागरिकों तथा सेनिको के हत्यारों को ढूंढ ढूंढ कर समाप्त करती है वैसे ही हमारी एजेंसियों को भी इसी प्रकार का कार्य करना चाहिए। सिर्फ नोटबन्दी ही ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त नही है।
माँ भारती के प्रिय पुत्रो की शहादत पर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।
सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय