जनप्रतिनिधि कर रहे जूतमपैजार: यह क्या हो रहा है सरकार


राजनीति वाकई में विचित्र है। कब क्या हो जाये इस बारे में कोई कह नही सकता। अभी जो कल हुआ वो तो बहुत ही अजीब था।
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राजनीति वाकई में विचित्र है। कब क्या हो जाये इस बारे में कोई कह नही सकता। अभी जो कल हुआ वो तो बहुत ही अजीब था। भारत के अंदर जितने राजनैतिक दल है उनमें सबसे अधिक राज्यो में सत्ताधारी तथा केंद्र में भी जो सत्तानसीन दल है, जिस दल के सदस्य यह कहते है कि हमारी पार्टी सबसे अधिक राष्ट्रवादी है, सबसे अधिक लोकतांत्रिक है,सबसे अधिक अनुशासित पार्टी का दावा जिस पार्टी के लिए किया जाता है, उस पार्टी की कलेक्ट्रेट में हुई संकलन मीटिंग जिसमे राज्य के मंत्री भी उपस्थित थे, वहां जूतमपैजार हो गया।
जानकर बड़ा अजीब लगता है कि मामूली सी बात पर अनुशासित पार्टी के जनप्रतिनिधि हिंसक हो गए, वो पार्टीलाइन भूल गए, वो भूल गए कि यह बन्द कमरे की मीटिंग तो है पर यहां भी काफी लोग मौजूद है जिनके हाथ मे कैमरा भी है, सब कुछ ताक में रखकर दे दनादन में लग गए।

दरअसल हुआ यह कि संतकबीरनगर कलेक्ट्रेट में योगी सरकार के प्राविधिक तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन की अगुआई में बुधवार को जिला कार्ययोजना समिति की बैठक हुई। इस दौरान शिलापट में नाम ना होने को लेकर भाजपा विधायक राकेश सिंह बघेल और भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी में विवाद हो गया। स्थिति ये हो गई कि सांसद त्रिपाठी ने विधायक बघेल को जूते से पीट दिया।
अधिकारियों ने बीच बचाव कर किसी तरह मामला तो शांत कराया पर विधायक के समर्थकों ने कलेक्ट्रेट में जमकर नारेबाजी की। इस बीच सांसद करीब तीन घंटे तक कमरे में बैठे रहे। आरोप है कि गुस्साए समर्थकों ने तोड़फोड़ भी की। इसके बाद पुलिस के लाठीचार्ज में विधायक के दर्जनों समर्थक घायल हो गए।

छोटी सी बात वो भी केवल मरम्मत कार्य के शिलान्यास पट्टिका पर नाम को लेकर, जो इतनी बढ़ गई कि एक ही पार्टी के जनप्रतिनिधि भीड़ गए। सांसद शरद त्रिपाठी जूता हाथ में लेकर विधायक राकेश सिंह बघेल को पीटने लगे, विधायक ने भी सांसद पर हाथ चलाए। अधिकारियों ने किसी तरह इन्हें अलग किया। मामला बढ़ता देख मेहदावल विधायक के समर्थक सांसद को मारने के लिए उनकी ओर बढ़े लेकिन एएसपी असित श्रीवास्तव व अन्य पुलिस कर्मियों तथा अधिकारियों ने किसी तरह बीच-बचाव किया।

इसका वीडियो कल खूब वायरल हुआ। जिसमे साफ दिख रहा है कि सांसद ने विधायक को सात बार जूते से मारा। इसके बाद विधायक बघेल ने उन्हें दो थप्पड़ मारे। बाद में मारपीट के चलते मीटिंग में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। अब इस घटना के बाद भी कोई यह कहे कि अनुशासन अभी भी मौजूद है तो यह बेमानी होगी। इसके अलावा कोई इसे एक सामान्य घटना कहे तो भी सही नही होगा क्योकि दोनो व्यक्ति जनता के विश्वास को तोड़ कर केवल नाम के लिए झगड़ा कर रहे है। अगर कोई दूसरी पार्टी में यह घटना बनती तो पता नही कितना ट्रोल हो जाता।

वैसे सो बात की एक बात है कि जब भी किसी ने अपना ही नाम करने की सोची है और देश और जनता से ज्यादा खुद को सर्वोपरि माना है तो उस अभिमानी को जूते पड़े ही है, चाहे वो जनता ने चुनाव में वोट के रूप में ही क्यो न मारे हो। जनता क्या करेगी वो तो वो जाने लेकिन राष्ट्रवादी नागरिक इससे खफा जरूर है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय