नेताओ के बिगड़े बोल


जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे है कई नेताओं के बयानों का स्तर गिरकर रसातल पर पहुंच रहा है।
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जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे है कई नेताओं के बयानों का स्तर गिरकर रसातल पर पहुंच रहा है। उनके बयानों को देख यह नही लगता कि वो लोकतंत्रात्मक पद्धति से चुनाव लड़कर जनता का दिल जीत, उसका समर्थन पाकर सत्ता प्राप्त करना चाहते है, बल्कि इसे देख यह लग रहा है कि वो सिर्फ अपने मकसद को पूरा करना चाहते है कि कैसे ही सत्ता प्राप्त हो जाये। इससे तो राजतंत्र व्यवस्था अच्छी थी, कमसे कम एक राजा दूसरे राजा का सम्मान तो करता था। युद्ध की परिस्थिति में भी वो धर्म तथा स्त्री सम्मान के साथ साथ एक दूसरे को आदर देना नही भूलते थे। लेकिन आजकल आप देखोगे तो विचित्र स्थिति आपको देखने को मिलेगी।

हाल ही की बयानबाजी पर गौर फरमाएं तो सपा नेता आजम खान ने रामपुर से भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा के खिलाफ बेहद भद्दे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस पर अमर सिंह ने जवाब दिया कि वह एक राक्षस हैं। इसके बाद उन्होंने अखिलेश यादव सरकार का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब मुजफ्फर नगर में दंगे हो रहे थे तो अखिलेश यादव मल्लिका शेरावत के ठुमके देख रहे थे।

आजम खान ने जयाप्रदा का नाम लिए बगैर एक बयान दिया था कि जिसकी उंगली पकड़कर हम रामपुर लेकर आए। रामपुर की गलियां और सड़कों की पहचान कराई। उसके शरीर से किसी का कंधा नहीं लगने दिया, आप गवाही दोगे। छूने नहीं दिया, गंदी बात नहीं करने दी। रामपुर वालों, उत्तरप्रदेश और हिंदुस्तान वालों, उसकी असलियत समझने में आपको 17 बरस लग गए, मैं 17 दिन में पहचान गया। आगे उन्होंने जो कहा वो मेरे द्वारा यहां लिखने योग्य नही है।

कल सोमवार को आजम खान विदिशा में थे। राज्यसभा के पूर्व सांसद मुनव्वर सलीम के अंतिम संस्कार में पहुंचे थे। तभी मीडिया ने उन्हें घेर लिया ओर जया प्रदा वाले बयान पर सवाल पूछ लिया। रिपोर्टर अपना सवाल पूरा भी नहीं कर पाए थे तभी आजम खान बोल बैठे ‘आपके वालिद की मौत में आया था, आपके वालिद मर गए हैं उसमें आया था।’ ये कहते हुए वे बिना सवालों के जवाब दिए हुए निकल गए।
अब आप ही बताये की यह कैसा स्तर है? इसके अलावा उन्होंने अफसरों को तनखैया बताते हुए उनसे जूते साफ करवाने की बात भी की थी।
शिवसेना सांसद संजय राउत कह रहे है कि हम ऐसे लोग हैं, भाड़ में गया कानून, आचार संहिता भी हम देख लेंगे। जो बात हमारे मन में है, वो अगर मन से बाहर न निकालें तो घुटन होती है।

वरुण गांधी जो कि पीलीभीत से भाजपा के उम्मीदवार है उन्होंने अपने सामने के प्रतिद्वंद्वी गठबंधन उम्मीदवार को जीते जी श्रद्धांजलि दे डाली। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को मेरी शुभकामनाएं ओर प्रत्याशी हेमराज वर्मा को मेरी श्रद्धांजलि।

इसके अलावा भी सतपाल सिंह, अजीज कुरेशी आदि के विवादित बयान सामने आये है। पर सो बात की एक बात है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो भारत की राजनीति का स्तर तथा साख गिरेगी ही। वैसे विवादित बयानों के कारण योगी आदित्यनाथ, मायावती, आजमखान तथा मेनका गांधी पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया है तथा 48 से 72 घण्टे प्रचार से दूर रहने के लिए पाबंद किया है। पर इनको क्या फर्क पड़ेगा यह पता नही है, बाकी तो आप सब समझदार है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय