मिठो मिठो बोल, तोल मोल बोल


शब्द ब्रह्म है, यह सूक्ति है। एक बार अगर शब्द मुंह से बाहर निकल जाए तो फिर उसे बदला नही जा सकता। उसकी फिर चर्चा ही होती है।
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शब्द ब्रह्म है, यह सूक्ति है। एक बार अगर शब्द मुंह से बाहर निकल जाए तो फिर उसे बदला नही जा सकता। उसकी फिर चर्चा ही होती है। अगर खराब निकला तो माफी मांगनी पड़ती है और अच्छा निकला तो कोई बात ही नही है। बात यानी अपने मुंह से निकले कथन से ही व्यक्ति की पहचान होती है तथा मान अपमान भी उसी से होता है। प्रशंसा भी शब्दो के कारण होती है तथा भृत्सना भी शब्द ही करवाते है। इसलिए ही यह कहावत है कि बातन हाथी पाइए, बातन हाथी पांव। मतलब अपने अच्छे शब्दो के कारण व्यक्ति हाथी इनाम के रूप में प्राप्त करता है, ओर खराब शब्दो के कारण हाथी के पांवों में दण्ड स्वरूप कुचला जा सकता है।

हालांकि यह हाथी वाली बात सामंती काल वाली हो गई। अभी तो लोकतंत्र का युग है, तो यह कह सकते है कि सत्ता की प्राप्ति तथा उससे दूरी भी व्यक्ति के शब्द ही तय करते है। अच्छे तथा दमदार शब्दो वाले भाषण को लोग बड़े ध्यान से सुनते है और आत्मसात भी करते है, लेकिन जहां भी शब्दो मे चूक हो जाये वहां खिल्ली उड़ते भी देर नही लगती है। कुछ उल्टा पुल्टा मुंह से निकला, मतलब ज्यो ही जबान फिसली त्यों ही सोशल मीडिया के इस जमाने मे व्यक्ति तुरन्त ट्रोल होना चालू हो जाता है। फिर उसे अलग अलग तरह के मन्तव्य सहन करने तो पड़ते ही है साथ ही खिल्ली भी उड़ती है सो अलग।

अभी परसो ही चुनावो की घोषणा हुई है। उससे पहले से ही पक्ष विपक्ष द्वारा आरोप प्रत्यारोप चालू है। तो कभी कभी नेताओ की जबान फिसल ही जाती है।कल कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। अब ताजा-ताजा चुनावों की घोषणा हुई है तो जोश लाजमी भी है। नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर दे तीर, दे तीर चला रहे थे, पर ये करते करते राहुल कुछ ज्यादा ही जोश में आ गए। एक तीर खुद पर ही चला दिए। पुलवामा हमले पर केंद्र सरकार को घेरते-घेरते वो इस वक्त देश के लिए सबसे बड़े विलेन मसूद अजहर को मसूद अजहर जी बोल गए।

अब आप ही बताइए कि अगर राहुल गांधी कुछ बोलते है तो उनके तो अच्छे भाषणों में भी काट पिट कर खामियां निकाल ली जाती है। तो यह आतंकी को जी का सम्बोधन लोग कैसे चला लेते? उन्होंने मोदीजी को घेरते हुए बोला कि ये 56 इंच छाती वाले, आपको याद होगा कि जब इनकी पिछली सरकार थी तो एयरक्राफ्ट में ‘मसूद अजहर जी’ के साथ बैठकर जो आज नैशनल सिक्युरिटी एडवाइजर हैं, अजीत डोवल, वो मसूद अजहर को जाकर कंधार में हवाले करके आ गए थे।

आगे राहुल बोले कि पूरा देश समझता है, नरेंद्र मोदी के मुंह से सच्चाई नहीं निकल सकती है। अब नरेंद्र मोदी के मुंह से क्या निकलेगा, जनता उस बात का उनसे हिसाब मांगेगी। ओहो! मगर फिलहाल राहुल गांधी ये बताएं कि ये मसूद अजहर के आगे जी लगाने का आइडिया उनको किसने दिया? क्या ये उनके भाणण के फर्रे पर लिखा था? या उन्होंने खुद ही इस जी का आविष्कार किया?

बड़ी मुसीबत है, सबसे ज्यादा तो उनके लिए हो जाती है जो इनके फॉलोवर है, बेचारे सफाई देते देते थक जाते है पर हार नही मानते है।यह लोग कह सकते हैं कि अरे राहुल तो व्यंग कर रहे थे। अरे तो कीजिए न मसूद अजहर के आगे जी लगाने की क्या जरूरत? फिर आप कोई गली के नेता तो हैं नहीं कि लड़के हैं गलती हो जाती है कहकर पल्ला झाड़ लिया जाए। एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष हैं तो खयाल तो रखना ही होगा।

खैर जबान का क्या है कभी भी किसी की भी फिसल ही सकती है जैसे एक बार प्रधानमंत्री जी ने कहा दिया था कि उनको 600 करोड़ मतदाताओं ने चुना है। अब आप ही बताईये की इस बार कितने होंगे। लेकिन जो भी हो ट्रोल दोनो तरफ के लोग हो रहे है इसलिए अभी तो सोच समझकर ही भाषण देना चाहिए वो भी पूरी तैयारी के साथ। नही तो पता नही कब नाप दिए जाओ।

लेकिन आतंकी के आगे जी, साहब आदि सम्बोधन तो कतई नही लगाना, क्योकि इस देश के प्रत्येक नागरिक को इस मिट्टी से जितना प्रेम है उतनी ही इन आतंकियों से घृणा भी है जो इस मिट्टी को अपवित्र करने का मंसूबा रखते है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय