मोबाइल नही समय दे बच्चो को


तकनीकी का विकास सभी मायनो में अच्छा है लेकिन इसका दुरुपयोग भी वृहद मात्रा में होता है। ऐसा ही स्मार्ट फोन के साथ भी हुआ है।
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तकनीकी का विकास सभी मायनो में अच्छा है लेकिन इसका दुरुपयोग भी वृहद मात्रा में होता है। ऐसा ही स्मार्ट फोन के साथ भी हुआ है। आजकल हर हाथ मे मोबाइल है। लेकिन इसका जो उपयोग होना चाहिए वो नही हो रहा है। वैसे फोन का उपयोग बात करने तथा मेंसेज का आदान प्रदान करने के लिए होना चाहिए लेकिन मोबाइल का वर्तमान उपयोग गेम खेलने में ज्यादा हो रहा है। जिसको देखो वो पबजी जैसे गेम खेलते आपको मिल जाते है।

दिन प्रतिदिन लोगों में मोबाइल एडिक्शन बढता जा रहा है और खासतौर पर ये एडिक्शन बच्चो में काफी तेज़ी से बढ़ रहा हैं और इसमें सबसे अहम् भूमिका निभा रहे है खुद बच्चो के माता पिता। वह इस बात से बिलकुल अनजान है की अपने बच्चो को ज़रूरत से ज्यादा फ़ोन देना उनके बच्चों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है, उनको शायद अंदाज़ा भी नहीं होता की जब भी वह अपने बच्चे को फ़ोन देते है तो वो फ़ोन के रूप में दरअसल उन्हें ड्रग्स की एक डोज़ दे रहे है क्योंकि फ़ोन का एडिक्शन भी ड्रग्स के एडिक्शन जितना खतरनाक है, जिससे कुछ समय बाद कई समस्याएँ हो सकती हैं।

बच्चों में मोबाइल फोन, टीवी और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग से उनमें बचपन से उनकी सोशल लाइफ, व्यवहार और शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। इसे स्क्रीन एडिक्शन के नाम से जाना जाता है। हाल ही में वडोदरा में 16 साल तक के बच्चों में सर्वे करने पर यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि यहां 45 हजार बच्चे स्क्रीन एडिक्शन के शिकार हैं। पूरे भारत में यह आंकड़ा 4 करोड़ है। यह बच्चों के लिए नुकसानदेह है।

आधुनिक युग में टेक्नालॉजी ने इंसान की जिंदगी को सरल बनाने के लिए काफी काम हुए हैं। परंतु जिस तरह से एक चीज के दो पहलू होते हैं, ठीक उसी तरह इस टेक्नालाॅजी के दूसरे पहलू के रूप में स्क्रीन एडिक्शन नामक बीमारी ने जन्म लिया है।

पहले पुराने जमाने मे हमने सुना था कि जब बच्चा ज्यादा परेशान करता था तो माताएं अमल चटा देती थी। लेकिन आजकल अभिभावक अपने बच्चों को शांत रखने, उसे व्यस्त रखने के लिए उसे मोबाइल या टीवी का रिमोट दे देते हैं, जिसका बच्चे पर बहुत ही गलत प्रभाव पड़ता है। जो बच्चे मोबाइल और टीवी में उलझे रहते हैं, उनका शारीरिक मानसिक विकास सही तरीके से नहीं हो पाता। अभिभावकों को इस बात का खयाल रखना चाहिए। उन्हें बच्चों को इन चीजों से दूर रखना चाहिए।

कुछ सावधानियो और कदमो से हम अपने बच्चो को इस एडिक्शन से बचा सकते है जैसे की घर में विशेष नो फ़ोन ज़ोन बनाएं, जैसे की फ़ोन को ऐसी जगह रखे जहाँ बच्चो का ध्यान फ़ोन पर कम जाए, फ़ोन को बेड पर न रखे आदि। घर में फ़ोन का उपयोग कम से कम करे और उपयोग के लिए विशेष समय सेट करें, अपने बच्चो के स्मार्टफोन की गतिविधियो पर नज़र रखे, बच्चे को फिजिकल एक्टिविटी में ज्यादा डाले, अपने बच्चे को बताएं कि एक माता पिता के रूप में उनको अपने बच्चो के ऑनलाइन गतिविधियो की निगरानी करने का हक़ है चिकित्सा अथवा किसी रिकवरी सेंटर का संदर्भ लें, बच्चे के साथ समय बिताए जिससे की बच्चा फ़ोन की और कम से कम जाए।
अगर माता पिता बच्चो को पर्याप्त समय दे तथा खुद बच्चो के सामने फोन का अधिक इस्तेमाल न करे तो बच्चे अपने आप उससे दूर रहेंगे। बच्चो के बेहतर भविष्य के लिए हम इतना तो कर ही सकते है। क्योकि बच्चे ही हमारे देश का भविष्य है। उन्हें बेहतर कल दे न कि इस प्रकार का एडिक्शन।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय