नही रहे पर्रिकर: जिन्होंने फर्ज के आगे बीमारी को बौना समझा


गोआ विधानसभा के जब भाजपा दो नम्बर की पार्टी के रूप में आई तो भी वहां भाजपा की सरकार बनी तो उसका मुख्य कारण मनोहर पर्रिकर की छवि थी।
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पिछले महीने में आपने सोशल मीडिया पर तस्वीरे देखी होगी, एक बीमार व्यक्ति अपनी बीमारी को, उससे आई कमजोरी को नजरअंदाज कर बड़ी मक्कमता से, पूरे जोश से लबरेज होकर काम कर रहा था। कभी सरकारी कामो का निरीक्षण करते हुए तो कभी अपने कार्यालय में फाइलें देखते हुए, तो कभी पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा को प्रगट करते हुए राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत अपने निवास पर पार्टी का ध्वज फहराते हुए, तो कभी विधानसभा में जाते हुए की तस्वीरें आपने देखी होगी।

नाक में नली लगे हुए जिसे राइल्स ट्यूब कहते है, बेहद कमजोर हो चुके यह सज्जन कोई और नही बल्कि राजनेता के रूप में सदियों तक याद जिनको किया जाएगा वो गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर थे। गोआ के विधानसभा के चुनाव के बाद जब भाजपा दो नम्बर की पार्टी के रूप में आई तो भी वहां भाजपा की सरकार बनी तो उसका मुख्य कारण मनोहर पर्रिकर की छवि थी। दूसरी छोटी पार्टीयो तथा निर्दलीय विधायको ने पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाने की शर्त पर समर्थन दे दिया और उसी कारण भाजपा की गोआ में सरकार बनी।

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अभी उनकी बीमारी के कारण कांग्रेस को यह लगा भी की सरकार को विश्वासमत में घेर लेंगे क्योकि पर्रिकर अनुपस्थित रहेंगे, ओर उन्होंने इसके लिए राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया। खैर सत्ता में कोई रहे यह इतना महत्वपूर्ण नही है लेकिन गोआ के प्रथम भाजपाई मुख्यमंत्री ही नही बल्कि एक साफ सुथरी छवि के राजनेता के रूप में वो ज्यादा जाने जाएंगे।
2014 में उन्हें केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री का दायित्व दिया गया था तब भी इन्होंने बखूबी इसे बहुत अच्छे से निभाया। उससे पहले जब पर्रिकर गोआ के मुख्यमंत्री थे तब इनकी सादगी तथा ईमानदारी के किस्से आप सभी ने पढ़े होंगे। बिना प्रोटोकॉल के गोआ की सड़कों पर बिना किसी सुरक्षा का टॉम झाम लिए मनमौजी स्वभाव के यह नेता घूमते थे तब कोई यह नही समझ पाता था कि यह राज्य के मुख्यमंत्री है।

वो मनोहर पर्रिकर अग्नाशय कैंसर से लंबे समय से पीड़ित थे। उनके निधन पर केंद्र सरकार ने 18 मार्च को राष्‍ट्रीय शोक की घोषणा की है। केंद्र सरकार की तरफ से बयान जारी कर कहा गया कि मनोहर पर्रिकर का राजकीय सम्‍मान के साथ अंतिम संस्‍कार किया जाएगा। बता दें कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सबसे पहले ट्वीट कर मनोहर पर्रिकर के निधन की पुष्टि की।

भारतीय राजनीति में मनोहर पर्रिकर की पहचान ‘मिस्टर क्लीन’ के रूप में होती है। उन्होंने 1978 में आईआईटी मुंबई से ग्रेजुएशन किया। मनोहर पर्रिकर भारत के किसी राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले वह पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने आईआईटी से ग्रेजुएशन किया था।
सभी नेताओ ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। लगभग सभी ने शोकसन्देश के ट्वीट किए है। वाकई में उनके जाने से भारतीय राजनीति ने एक साफ छवि का ऐसा नेता खो दिया है जिसका वर्णन शब्दो मे करना मुश्किल है। भारत माता के इस सपूत जो मेरा भी हृदय की गहराइयों से श्रद्धानवत नमन क्योकि चुनिंदा नेता जो मुझे भी प्रिय है उनमें एक पर्रिकर भी है।
सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय