ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर


हमारे देश हिंदुस्तान में हमारे जो नेता है वो अपनी राजनीति के लिए किसी भी हद तक जा सकते है।
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हमारे देश हिंदुस्तान में हमारे जो नेता है वो अपनी राजनीति के लिए किसी भी हद तक जा सकते है। अब उनके जो फॉलोवर है वो भी अपने लीडर का ही अनुसरण करेंगे ना, तो वो भी अपने पक्ष की मजबूती के लिए वह सबकुछ करने के लिए तैयार है जिससे उनका पक्ष मजबूत हो, हमारा बूथ सबसे मजबूत आपने सुना ही होगा कि कैसे पुलवामा हमले के तुरन्त बाद ही भाजपा के कार्यकर्ता शहीदों की शहादत पर श्रद्धांजलि के लिए जलाई हुई मोमबत्तियां बुझने से पहले ही मेरा बूथ सबसे मजबूत के कार्यक्रम में लग गए थे। क्योकि उनके लीडर खुद किसी न किसी कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे। पढ़ने पर हो सकता है बुरा लगे लेकिन उस समय शहीदों की शहादत का शोक वैसा ही था जैसा सास के गुजर जाने पर आधुनिक बहु को होता है, जिक्र तो बहुत करती है पर अपने फायदे वाले कार्यक्रम भी चालू रखती है। खैर, जाने दीजिए उस घटना को धीरे धीरे लोग भूल रहे है क्योकि उन्हें मुम्बई हमला याद दिलाया जा रहा है, कम्पेयर किया जा रहा है कि तत्कालीन तथा वर्तमान प्रधानमंत्री में क्या अंतर है। इसके अलावा कुछ शक्की मिजाज के लोग जो सरकार ही नही सेना को भी शंकास्पद निगाहों से देखते है वो प्रश्नवाचक चिन्ह खड़ा कर रहे है। उनको ट्रोल भी खूब किया जा रहा है। एक प्रवक्ता ने तो उन्हें हिंदुस्तान में तैनात पाकिस्तानी कर्नल भी बता डाला, फिर हैशटैग करते हुए स्पेशल नाम भी लिखा जो यहां लिखना उचित नही होगा। उस पर प्रतिक्रिया देते हुए नेताजी यह भी बोल गए कि हम भी ऐसा कर सकते है पर हम हिन्दू है इसलिए संस्कारी है। चलो इस बहाने सेक्युलरिज्म से हिंदुत्व पर तो आये। वैसे अपने धर्म के संस्कार होने भी चाहिए। राजनीति में सेक्युलरिज्म का ढोंग करो वो अलग बात है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ड्राई फ्रूट्स बेच रहे दो कश्मीरी व्यापारियों पर हुए हमले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार प्रतिक्रिया करते हुए कश्मीरी व्यापारियों पर हुए हमले का वीडियो शेयर किया और इसकी कड़ी निंदा की। राइट विंग संगठन से जुड़े लोगों के चंगुल से कश्मीरियों को बचाने वाले उस बहादूर शख्स को भी राहुल गांधी ने सलाम किया है। दरअसल, गुरुवार को मामला सामने आया, जिसमें यह कहा गया कि बुधवार को ड्राई फ्रूट्स बेच रहे दो कश्मीरियों को भगवाधारी हमलावरों ने लाठी-डंडे और थप्पड़ों से पीटा। इतना ही नहीं, हमलावरों ने दोनों कश्मीरियों को आतंकवादी और पत्थरबाज भी कहा।

राहुल गांधी ने वीडियो शेयर कर अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि उत्तर प्रदेश में कश्मीरी व्यापारियों पर हुए हमले के वीडियो से मैं परेशान हूं। मैं उस बहादूर को सलाम करता हूं जिन्होंने हमलावरों को चुनौती दी। हमारे देश के हर कोने से भारत अपने नागरिकों का है। मैं हमारे कश्मीरी भाइयों के खिलाफ हिंसा के सभी कृत्यों की कड़ी निंदा करता हूं।

राहुलजी हमारे देश के हर कोने की बात करते हुए संविधान के अनुच्छेद 370 को भूल गए, जिसमे हिंदुस्तान से प्रत्येक व्यक्ति को वहां बसने का अधिकार नही है। अगर वाकई में आप हर कोने में भारतीयता चाहते है तो अनुच्छेद 370 तथा 35A को निपटा दीजिये सभी दलों के साथ मिलकर, नही तो यह कोने कोने वाली बात में पूरा दम नही रह जाता है। वैसे जितना दुःख उन्हें कल हुआ है, वैसे अवसर काफी आते होंगे, जब निरपराध व्यक्ति का उत्पीड़न होता होगा। शायद उन्हें पता न चलता होगा, या राजनैतिक फायदा न मिलने के कारण ट्वीट नही करते होंगे। ट्वीट से याद आया कि लोग शिवरात्रि पर भी राहुलजी के ट्वीट का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जैसे उनकी शुभकामनाओं बिना महाशिवरात्रि अधूरी रह जायेगी, वैसे हो भी सकता है क्योकि चुनावो में वो ही देश के सबसे बड़े शिवभक्त लग रहे थे। अब शायद अगले चुनाव में फिर से लगे भी।

कुल जमा बात यह है कि यहां कोई भी काम राजनैतिक फायदा देखकर ही किया जाता है और यह चीज कहने में भी राजनेताओं को कोई गुरेज नही है। एक लाइव परिचर्चा में मुझे भी खुद भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने यह कहा था कि हम हर काम राजनीति देखकर करते है। मैने जब आपत्ति दर्ज की तो बोले इसमे गलत क्या है? लेकिन उनका कहना भी सही है क्योकि नेताओ के फॉलोवर इतने ज्यादा अग्रेसिव होते है कि वो गलत को भी सही साबित करवा देते है।

पार्टी चाहे कोई भी हो पर लक्ष्य सिर्फ भारत माता को परम वैभव प्राप्ति करवाना होना चाहिए। उसके लिए भी कार्य करना चाहिए और राजनीति भी।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय