नेशन फर्स्ट, सेल्फ लास्ट


देश वासियों की निष्ठा सदैव इस राष्ट्र पर रही है। पुराणो में इसे धन्य बताते हुए कहा है कि देवताओं द्वारा भी यह वंदनीय है।
Photo/Loktej

हमारा देश संसार मे ऐसा एक मात्र देश है जिसे इसके नागरिक ईश्वर तुल्य समझते है। देवताओं के समान सम्पुजित केवल यही देश है जिसके नाम के साथ माता शब्द का उच्चारण होता है। देश वासियों की निष्ठा सदैव इस राष्ट्र पर रही है। पुराणो में इसे धन्य बताते हुए कहा है कि देवताओं द्वारा भी यह वंदनीय है।

ऐसा महान देश, जिसकी देशभक्ति की कथाएं दुनिया भर में प्रचलित है। जहाँ के नागरिकों द्वारा नित्य इसकी स्तुति गान किया जाता है। परन्तु एक छोटी सी घटना में ही सबके व्यक्तित्व तथा कृतित्व का पता चल गया। व्यक्तित्व कुछ और तो कृतित्व कुछ और कई लोगो का नजर आया। क्या हम देश के संकटकाल में भी पार्टी लाइन में रहकर टिप्पणी करेंगे? सबसे पहले जब पुलवामा हादसा हुआ तब सबकी देशभक्ति साथ मे जागृत हुई थी लेकिन दूसरे ही दिन सत्ता पक्ष अपने रूटीन कार्यक्रम करके चुनावी रणनीति में लग गया और विपक्ष सत्तापक्ष की खिंचाई करके अपने फायदे के लिए मशगूल हो गया। उसके बाद भी जब वायुसेना ने एयर स्ट्राइक की तब भी एक दिन के लिए सभी मे देशभक्ति का ज्वार उमड़ा, पक्ष विपक्ष सभी ने इसकी भूरिभूरि प्रशंसा मुक्तकंठ होकर की। लेकिन दूसरे ही दिन पक्ष इसका फायदा उठाने की गतिविधि में लग गया जबकि विपक्ष इस बार फिर सुबूत मांग कर सेना पर ही प्रश्नचिन्ह लगाने में लग गया। हालांकि वायुसेना प्रमुख ने यह स्पष्ट कर दिया कि हमने बताये गए टारगेट को हिट किया है और एक एफ सिक्सटीन भी गिराया है लेकिन दुश्मन का नुकसान गिनना हमारा काम नही है। मतलब गिने वो जिसको अपना फायदा उठाना हो। और गिनना चालू भी कर दिया। पक्ष ने गिनती बढ़ाचढ़ाकर बताना चालू किया तो विपक्ष तो किसी भी आंकड़े को मानने के लिए तैयार नही था, उन्हें तो सुबूत चाहिए था।

अब कैसे कहे कि देश से इन्हें प्रेम है? देश से प्रेम सभी को है लेकिन अपनी शर्तों के अधीन। यह कौनसी बात हुई? क्या हमारे व्यक्तिगत फायदे, पार्टी के फायदे से यह देश कमतर है?क्या हमने जो धारणा बनाई है वो गलत है? क्या नेशन फर्स्ट, पार्टी सेकंड, सेल्फ लास्ट वाली बाते केवल किताबी ही है?

हमे वाकई सोचने की जरूरत है। हम सामरिक घटना को कैसे स्वयं के फायदे की दृष्टि से देख सकते है? इसी कारण 1971 का युद्ध जिसपर सभी भारतीयों को नाज़ है, उस पर भी सवाल उठना चालू हो गया है,क्योकि इसका फायदा विपक्ष उठाना चाहता था। यह देश के लिए अच्छा नही है।

इसी बीच कुछ राजनेता ऐसे भी है जो किसी राजनैतिक फायदे या नुकसान की परवाह नही करके सिर्फ देश की सोचते है, उनमे से एक पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह है। अभी तक वो बिना किसी सन्देह तथा विवादित बयान के सेना के साथ खड़े है। उन्होंने पार्टीलाइन को नही देखा न ही अपने पार्टी के नेताओ के बयान की परवाह की।

उन्होंने पुलवामा हादसे के बाद तुरन्त ट्वीट करके इमरान खान को सम्बोधित करते हुए कहा कि आपके पास मसूद अजहर है,बहावलपुर में बैठा है। जाइये ओर उसे पकड़िए, आपसे नही होता तो हमे बताइये, हम यह आपके लिये कर देंगे। इसके अलावा एयर स्ट्राइक को लेकर उठ रहे विवाद पर भी वो बोले थे कि एक मरे चाहे सो, लेकिन यह संदेश स्पष्ट गया है कि भारत अपने जवानों ओर नागरिकों की शहादत को बेकार नही जाने देगा।

इस कारण वो एकमात्र कांग्रेसी नेता है ट्रेंड हो रहे है पर जिन्हें एक भी गाली नही पड़ रही बल्कि प्रशंसा हो रही है। देश सर्वोपरि है तथा सबके मन मे यह बात होनी चाहिए तथा युद्धकाल में यह दिखना भी चाहिए, जिससे हमारी सेना का मनोबल कभी भी कमजोर न हो।
देश है तभी हम है,पार्टी है ओर सबकुछ है, देश पर आई हुई विपत्ति किसी न किसी रूप में हमारे को प्रभावित करने वाली ही है। अतः निजी स्वार्थों के आंकलन किये बिना हमे देशसेवा में रत रहना चाहिए।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय