आरोपी से मुजरिम बने नारायण साई की लाजपोर जेल में पहले से कठिन हो जायेगी जिंदगी


बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाये जाने के बाद नारायण साई और अन्य तीन मुजरिमों का लाजपोर जेल में दूसरा दिन बिता।

घर के खाने पर प्रतिबंध सहित लग जायेंगी कई बंदिशें, रोजाना करना पड़ेगा काम जिसका मेहनताना मिलेगा तीन महीने बाद

सूरत। बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाये जाने के बाद नारायण साई और अन्य तीन मुजरिमों गंगा, जमुना और हनुमान का सूरत की लाजपोर जेल में दूसरा दिन बिता। इससे पहले ये चारों अरोपियों के रूप में जेल में वर्षों से बंद थे। लेकिन अब चुंकि इनके खिलाफ जुर्म प्रमाणित हो चुका है और सजा का एलान हो चुका है, इसलिये इनकी सजा पहले से कठोर हो जायेगी। पहले नारायण को घर का खाना, सूखा मेवा भी मिलता था। लेकिन अब कैदी नंबर 1750 के रूप में पहचाने जाने वाले साई को मिलने वाली सुविधाओं में कटौति की जायेगी। अब तक जेल में साधु के वेश में रहने वाला साई अब सफेद कफनी और पीली टोपी पहनेगा। उसे एक थाली, कटोरी और ग्लास दिया गया है। ओढ़ने के लिये दो चद्दरे और एक तकिया दिया गया है। मुलाकाती उससे महिने में दो बार मिल सकेंगे। उसे उसके परिजन प्रति माह ८०० रुपये का मनी ऑर्डर भेज सकते हैं, जिससे वह जरूरत की चीतें खरीद सके।

सजा के बाद दूसरा दिन बित जाने के बाद भी फिलहाल नारायण व अन्यों को जेल में कोई काम नहीं सौंपा गया है। काम सौंपने में लगभग सप्ताह भर लगेगा। उसके बाद जेल के नियमों के अनुसार उन्हें रोज निर्धारित काम की ड्युटी अदा करनी होगी। कहते हैं ना कि मुजरिम जेल में चक्की पिसते हैं!? यानि कैदियों को उनके हिस्से का काम जेल में करना पड़ता है। हालांकि चारों को काम के एवज में निश्चित मेहनताना दिया जायेगा, जिसे मिलने में उन्हें कम से कम तीन महीने लगेंगे। जेल में काम करने के ७० से १०० रूपये का दैनिक वेतन मिलता है।

फिलहाल काम नहीं दिये जाने का आधिकारिक कारण यह है कि जेल सुप्रीन्टेन्डेंट मनोज नीनामा इन दिनों सरकारी अवकाश पर हैं और चुनावी ड्युटी पर पश्चिम बंगाल गये हुए हैं। वहां से लौटने के बाद जेल की कमिटी तय करेगी कि साई को क्या काम दिया जाए। शारीरिक क्षमता के अनुसार साई क्या जिम्मेदारी निभा सकता है उसका नियमों के आधार पर आकलन करने के बाद फैसला लिया जायेगा।