कइयों की आंख में अखर रहा लालकालीन


लालकालीन ट्विटर पर ट्रोल भी हुआ। लोग यहां तक कह दिए कि यह भगवान शिव का अनादर है। भला कोई मंदिर में भी रेड कार्पेट बिछवाकर जाता है।
Photo/Loktej

कल लाल कालीन की चर्चा दिनभर रही थी। लालकालीन ट्विटर पर ट्रोल भी हुआ। लोग यहां तक कह दिए कि यह भगवान शिव का अनादर है। भला कोई मंदिर में भी रेड कार्पेट बिछवाकर जाता है। भला कोई ध्यान करते हुए भी फोटो खिंचवाता है? बस यही कुछ प्रश्न कल सोशल मीडिया पर चल रहे थे। लेकिन उनके समर्थक उनके पक्ष में ही लिख रहे थे। सिवाय गाँधीजी तथा गोडसे पर उनके विचारों के, कोई भी उनके विपरित नही बोलता है, लेकिन इन दोनों पर उनके विचार के विपरीत कल भी बहुत लोग देखने को मिले थे।

चलो अब मुख्य विषय पर आते है जिसके लिये कल चर्चा रही। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल उत्तराखंड की दो दिवसीय यात्रा पर केदारनाथ पहुंचे। उन्होंने करीब आधे घंटे पूजा अर्चना की। इसके बाद मोदी 2 किमी तक चढ़ाई कर एक गुफा में पहुंचे। प्रधानमंत्री कल सुबह तक वहीं ध्यान लगाएंगे। कुछ शुरुआती तस्वीरों के बाद अब यहां मीडिया पर पाबंदी लगा दी गई है।

प्रधानमंत्री बनने के बाद यह नरेंद्र मोदी की चौथी बार केदारनाथ की यात्रा है। लेकिन पहली बार ऐसा हो रहा है कि प्रधानमंत्री का रात्रि विश्राम केदार में हो रहा है। प्रधानमंत्री कल बद्रीनाथ के दर्शन भी करेंगे।

अब बात करते है लाल कालीन की, वैसे तो ईश्वर के दरबार मे हम नँगे पैर ही जाते है, वहां चाहे कोई राजा हो या कोई रंक, चाहे वो प्रधानमंत्री हो या कोई मामूली इंसान, ईश्वर की बारगाह में सभी समान है तो सबके लिए नियम भी समान ही होते है। हाँ, आजकल पुजारियों में कुछ बदलाव है, हो सकता है वो पहले से भी होगा, कि कोई वीआईपी आता है तो उनके नियम बदल जाते है। यह तो प्रधानमंत्री आये थे तो सबकुछ बदलना तो लाज़मी ही था, रेड कार्पेट कौनसी अनोखी वस्तु है? पुजारी के लिए भगवान जितने महत्वपूर्ण भगवान के भक्त भी होते है तो यह वाला भक्त तो ज्यादा महत्वपूर्ण था ही। क्योकि बाहर निकलते ही मीडिया ने उसको घेर कर यह भी पूछा होगा कि उन्होंने क्या किया? कैसे पूजा की? उनके भाव कैसे थे, इत्यादि इत्यादि। पुजारी भी अपने आपको वीआईपी महसूस किया होगा। फिर भी लोग रेड कार्पेट पर उलझे हुए है। जबकि यह चर्चा का विषय होना भी नही चाहिए।

लेकिन आपको यह नही लगा क्या कि प्रधानमंत्री को अपने आप को मीडिया में हाइलाइट करना आता है। यह उनकी बहुत बड़ी खासियत है। आखिरी चरण के चुनाव का प्रचार खत्म हो चुका है लेकिन हर चेनल पर प्रधानमंत्री है, विपक्ष चाहे कितना भी हो हल्ला करले लेकिन चुनाव आयोग भी इस विषय मे कुछ नही कर सकता। तो आप ही बताइए कि लाल कालीन बिछवा कर उन्होंने क्या गलत कर दिया? फिर भी आपको गलत लगे तो आप उनके एक बयान को शायद भूल गए हो जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं चार साल तक काम करूंगा ओर आखिरी साल में राजनीति करूँगा। याद आ गया तो आप समझ भी गए होंगे।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय