कबीरा खड़ा बाजार में, देता लट्ठ बजाय


कुछ समर्थक मूक समर्थक होते है जो सिर्फ अपने वोट या अपने परिवार के वोट तक सीमित होते है तथा चुनाव के बाद वो पार्टी से कोई मतलब नही रखते।
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राजनीति में पार्टीयो के समर्थकों की कई स्टेज होती है। कुछ समर्थक मूक समर्थक होते है जो सिर्फ अपने वोट या अपने परिवार के वोट तक सीमित होते है तथा चुनाव के बाद वो पार्टी से कोई मतलब नही रखते। दूसरे स्तर पर वो समर्थक होते है जो पार्टी के समर्थन में दुसरो को भी मोटिवेट करते है,आग्रह करते है। तीसरे स्तर वाले समर्थक थोड़े अधिक अग्रेसिव होते है वो सोशल मीडिया से लेकर फील्ड तक पार्टी के लिए हमेशा रक्षात्मक रहते है तथा चुनाव के अलावा भी तर्क वितर्क करते रहते है। चौथे स्तर वाले समर्थक थोड़े खतरनाक किस्म के होते है। वो सिर्फ पार्टी तक ही सीमित नही रहते बल्कि उनका अपना एक नेता भी होता है जिसके लिए वो प्राणप्रण लेकर लगे रहते है। अपने नेता के प्रति उनकी दीवानगी तथा समर्पण किसी भी उदाहरण से इतर होती है। उनका नेता चाहे कैसा भी हो कही पर भी हो वो उनके ही साथ रहते है, अपने नेता के लिए वो हरसम्भव से भी ज्यादा करने के लिए तैयार रहते है।

कल पटना एयरपोर्ट पर ऐसे ही समर्थक आपस मे भीड़ गए थे। पटना एयरपोर्ट पर बीजेपी के रविशंकर प्रसाद और बीजेपी के ही आरके सिन्हा के समर्थक आपस में भिड़ गए। भिड़े ही नही बल्कि दोनों तरफ के समर्थकों के बीच खूब लात-घूंसे चले। खूब नारेबाजी हुई। हुआ कुछ ऐसा कि पटना साहिब से लोकसभा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद रविशंकर प्रसाद पहली बार पटना पहुंचे थे। उनके पहुंचने से पहले ही एयरपोर्ट पर बीजेपी राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा के समर्थक मौजूद थे। वो रविशंकर के विरोध में नारेबाजी कर रहे थे।

उसके बाद जब रविशंकर प्रसाद पहुंचे। अब केंद्रीय मंत्री पहुंचेंगे तो उनके भी समर्थक पहुंचेंगे ही ना उनके स्वागत में। बस एक तरफ आरके सिन्हा के समर्थक और दूसरी तरफ रविशंकर प्रसाद के समर्थक। दोनों के बीच खूब जूतमपैजार हुआ। दोनों के समर्थकों ने खूब एक दूसरे की पिटाई की। बिना इस बात का ख्याल किए हुए कि सभी बीजेपी के ही थे। क्योकि वो चौथी श्रेणी वाले समर्थक थे उनके लिए नेता से ज्यादा पार्टी महत्वपूर्ण नही थी, उनके नेता ही उनके लिए सर्वेसर्वा थे तो पार्टी का अनुशासन ताक पर रख दिया गया।

आप भी सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यो हुआ? क्योकि हर क्रिया की ही प्रतिक्रिया होती है। कुछ तो वजह रही होगी, यूंही कोई बेवफा नही होता। हर घटना का कोई न कोई कारण तो होता ही है तो इसका भी एक कारण था जो नेता के समर्थकों को भड़काने के लिए पर्याप्त था।

दरअसल पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट कटा था ओर इस सीट पर रविशंकर प्रसाद को टिकट मिला। लेकिन आरके सिन्हा भी पटना साहिब सीट से टिकट के लिए दावा ठोंक रहे थे। लेकिन आखिरकार आरके सिन्हा की जगह रविशंकर प्रसाद को टिकट मिल गया तो आरके सिन्हा समर्थक नाराज हो गए। कल इससे पहले कि रविशंकर प्रसाद पटना एयरपोर्ट पहुंचते वहां नारेबाजी करने लगे। रविशंकर जैसे ही पहुंचे दोनों के समर्थकों के बीच हाथापाई भी हो गई।

अब भी अगर कोई कहे कि एक पार्टी में तो ऐसा नही हो सकता है तो वो इस घटना को गौर से अध्ययन कर ले। यह केवल एक मात्र उदाहरण नही है ऐसे उदाहरण बहुतायत देखने को मिल जाते है। इसीलिए पार्टीया टिकिट आवंटन करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखती है क्योकि हर नेता कमोबेश चौथी श्रेणी वाले समर्थक रखते ही है। इनके लिए न देश प्रथम होता है, न पार्टी सेकंड न सेल्फ लास्ट। इनके लिए तो इनके नेता ही सर्वोपरि होते है। आखिर में क्या बोलूं, वही अपनी माँ को याद कर लेता हूँ रोज की तरह।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय।