बिछड़ रहे है बारी बारी


कांग्रेस के विधायक ऐसे सरक सरक कर जा रहे है जैसे कि नीचे का पत्थर सरक जाने ऊपर के सारे पत्थर धड़ाधड़ नीचे सरकते है।
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देखी जमाने की यारी, बिछड़े सभी बारी बारी।

यह कहावत आपने काफी सुनी होगी। लेकिन कांग्रेस के मामले में यह चरितार्थ भी हो रही है। कांग्रेस के विधायक ऐसे सरक सरक कर जा रहे है जैसे कि नीचे का पत्थर सरक जाने ऊपर के सारे पत्थर धड़ाधड़ नीचे सरकते है।

गोआ में कांग्रेस पार्टी सरकार बनाने को रोज ललचाती थी पर उसके दो विधायको ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। वैसे अपनी चालू विधायिकी में इतना बड़ा रिस्क लेना बहुत बड़ी बात है। सामने वाला कितनी दूर की सोचता है या वो कितना मजबूर होता है यह तो वही जानता है। परन्तु इस जोखिम को किसी मायने में हम कम नही आंक सकते।

गुजरात मे तो यह क्रम निरन्तर जारी है। जिस प्रकार विधायक कांग्रेस पार्टी को छोड़ रहे है ऐसा लगता है जैसे कोई भेड़चाल हो। गुजरात में पिछले तीन माह में 8 विधायक कांग्रेस का दामन छोड़ चुके हैं। फरवरी में उंझा से पहली बार विधायक बनीं आशा पटेल ने सदन और कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा देकर सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो गई थी। वरिष्ठ नेता जवाहर चावड़ा गुजरात विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए थे। जामनगर (ग्रामीण) से विधायक वल्लभ धारविया, ध्रांगध्रा-हलवद सीट से विधायक पुरुषोत्तम साबरिया भी कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं।

ओर अब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बहुत बड़ा झटका गुजरात से लगा है। पार्टी के विधायक लगातार उसका साथ छोड़ रहे हैं। इसी कड़ी में अल्पेश ठाकोर ने भी इस्तीफा दे दिया है। अल्पेश ठाकोर के साथ ठाकोर समुदाय के दो अन्य विधायकों ने भी कांग्रेस से नाता तोड़ लिया है। विधायक धवल सिंह ठाकोर और विधायक भरत जी ठाकोर के साथ तीनों ठाकोर विधायको ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है।

अल्पेश 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस में शामिल हुए थे। उन्होंने पिछले महीने ही मुख्यमंत्री रूपानी और गुजरात भाजपा अध्यक्ष जीतूभाई वाघवानी से मुलाकात कर कांग्रेस नेतृत्व की रातों की नींद उड़ा दी थी। बाद में कांग्रेस नेतृत्व के साथ बैठक के बाद उन्होंने अपना इरादा बदल दिया था।

लेकिन कल उनके सहित तीन विधायको ने एक साथ कांग्रेस छोड़कर अभी तो पार्टी की दुविधा ओर भी बढ़ा दी है। एक सोशल मीडिया की कहावत याद आ गई कि राजनेता हर हालत में सेवा करके ही मानते है, अगर एक पक्ष ने सेवा का मौका नही दिया तो दूसरी पार्टी जॉइन करके सेवा करेंगे लेकिन सेवा करके ही मानेंगे। वैसे अल्पेश ठाकोर को भी पाटन से सेवा करनी थी पर मौका नही मिला। अब आगे आगे देखिए होता है क्या?