सूरत : बीमा कंपनी ने कार-दुर्घटना क्लेम ठुकराया, ग्राहक सुरक्षा अदालत ने न्याय दिलाया


ग्राहक अदालत ने बीमा कंपनी को क्लेईम की राशि चुकाने का आदेश दिया।
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दुर्घटनाग्रस्त कार चालक के पास ड्राईविंग लायसन्स नहीं था, ऐसे गलत अनुमान के आधार पर निरस्त किया गया था बीमा क्लेब

सूरत। दुर्घनाग्रस्त कार का इन्श्योरन्स क्लेम वेलीड ड्राईविंग लायसन्स न होने वाला व्यक्ति कार चला रहा होने का अनुमान कर बीमा कंपनी ने क्लेम नामंजूर किया था। इस संदर्भ में ग्राहक अदालत ने बीमा कंपनी को क्लेईम की राशि चुकाने का आदेश दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पार्ले पोईन्ट क्षेत्र के निवासी डॉ. मुकेश जयंतिलाल शाह ने एडवोकेट श्रेयस देसाई और प्रांती देसाई के माध्यम से जिला ग्राहक अदालत में फ्यूचर जनरल इंडिया इन्श्योरन्स कंपनी लि. के खिलाफ शिकायत दायर की थी। शिकायर्ता मुकेश शाह निसान सन्नी एक्सएल डिजल मोटर कार के मालिक हैं। इस कार का बीमा उक्त कंपनी से लिया गया था। बीमा के वेलिड पिरियड के दौरान 9-10-2015 को मुकेश शाह के मित्र डॉ. भवानीसिंग मीना तथा अन्य दो मित्र कार में बारडोली महुवा हाईवे से गुजर रहे थे। तभी भवानीसिंग कार चला रहे थे और मालिबा कॉलेज के पास दुर्घटना हुयी और कार को भारी नुकसान हुआ।

बीमा कंपनी को इस संदर्भ में जानकारी दिये जाने के बाद कार को प्रमुख ऑटो मोबाईल कंपनी के डीलर के सूरत-डुमस रोड स्थित वर्कशॉप में ले गये। बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने जरूरी कार्यवाही की। सर्वेयर द्वारा शिकायतकर्ता से लायसन्स मांगे जाने पर लायसन्स दिया गया। प्रमुख ऑटो के स्टाफ नयनाबेन द्वारा क्लेम फोर्म में चालक की जानकारी भूलवश डॉ. भवानीसिंह मीना के स्थान पर कार मालिक डॉ. मुकेश शाह लिखा  गया और कार वे स्वयं चला रहे थे, ऐसी जानकारी फिलअप की गई। दुर्घटना से पूर्व ही डॉ. मुकेश शाह का लायसन्स एक्सपायर होने से उनको क्लेम मिलने योग्य नहीं है, ऐसी सूचना बीमा कंपनी ने दी।

कार डॉ. भवानीसिंह मीना द्वारा चलाये जाने की पेशकश डॉ. मुकेश द्वारा करने पर प्रमुख ऑटो के मैनेजर पंकजभाई द्वारा ऐफिडेवीट भी दिया गया। फिर भी बीमा कंपनी ने क्लेईम नकार दिया। इस संदर्भ में एडवोकेट श्रेयस देसाई ने दलिलें पेश कर दुर्घटना के समय पर डॉ. मुकेश शाह नहीं बल्कि डॉ. भवानीसिंह मीना कार चला रहे थे। मगर क्लेईम फोर्म में प्रमुख ऑटों के स्टाफ द्वारा भूल से गलत नाम लिखा गया था, जिसके लिए एफिडेवीट भी पेश की गयी है। दुर्घटना समय पर कार चला रहे डॉ. मीना के पास वेलिड लायसन्स था जिससे क्लेम नामंजूर करना योग्य नहीं है।

जिला ग्राहक अदालत के न्यायाधिश ए.एम.दवे तथा सदस्य मेघा बेन जोशी ने इस मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। अपने आदेन में अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी ने गलत अनुमान के आधार पर क्लेम निरस्त किया था। यह सेवा में लापरवाही बरतने का मामला है। अदालत ने बीमा कंपनी को 73,500 रुपये तथा कोर्ट खर्च के 5000 रुपये सहीत कुल रकम 8 प्रतिशत ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया।