टेक्सटाईल मार्केटों में दुकानों के ताले टूटने का सिलसिला जारी; व्यापारी खुद करें अपनी सुरक्षा


अपनी दुकानों के शटर पर ‘एलार्म सिक्योरिटी सोल्यूशन’ या ‘जीएसएम मोबाईल एलर्ट’ लगाएं व्यापारी

व्यावसायिक प्रतिष्ठान का बीमा भी करवाएं

सूरत के कपड़ा मार्केटों में कुछ महीनों पूर्व राधाकृष्‍णा टेक्सटाईल मार्केट में चोरी की सुनियोजित वारदातों का भंडाफोड़ हुआ था। कुछ दिनों की उहापोह के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब शुक्रवार को मिलेनियम टेक्सटाईल मार्केट में आरकेटी की ही तर्ज पर दुकानों के ताले खोलकर चोरी की वारतादों को अंजाम देते शातिरों को सीसीटीवी में कैद होते पाया गया।

मिलेनियम मार्केट की इस ताजा वारदात के बाद एक बार फिर शहर के विभिन्न टेक्सटाईल संगठन, कपड़ा अग्रणी और बयान-बहादुर सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गये हैं। मिलेनियम मार्केट परिसर में व्यापारी एकत्र भी हुए। व्यापारी नेता इस बात का मन बनाते दिख रहे हैं कि एक बार फिर उच्च प्रशासनिक स्तर पर मामले को उठाया जाए। अब इस मसले का हल क्या निकलेगा ये तो वक्त बतायेगा लेकिन व्यापारी कुछ प्राथमिक उपाय अपने व्यक्तिगत स्तर पर कर ही सकते हैं।

एलार्म सिक्योरिटी सोल्यूशन

बाजार में एक ऐसा उपकरण उपलब्ध है जिसे एलार्म सिक्योरिटी सोल्यूशन नाम दिया गया है और यह दुकान के शटर, गोदामों और ऑफिस के दरवाजों पर लगाया जा सकता है। इस प्रकार के यंत्र महंगे भी नहीं हैं। यह उपकरण शटर के निचले हिस्से में लगता है। दुकानदार अपनी दुकान बढ़ाते समय इस सिस्टम को ऑन करके शटर बंद कर देता है। शटर बंदर करने पर सिस्टम अपना काम करना शुरू कर देता है। अगले दिन दुकानदार दुकान पर आता है और दुकान खोलने के बाद सिस्टम को बंद कर देता है। लेकिन यदि कोई चोर या कोई अनधिकृत व्यक्ति मालिक की जानकारी के बगैर शटर को थोड़ा भी खोलता है तो तुरंत यह सिस्टम एक्टीवेट हो जाता है और एलार्म बजने लगता है। चोर यदि दुकान खोलकर अंदर भी आ जाए तो भी वक सिस्टम को बंद नहीं कर सकता क्योंकि उसके पास सिस्टम की चाबी नहीं होती। जब तक मालिक स्वयं आकर सिस्टम बंद नहीं करेगा तब तक एलार्म बजना चालू रहेगा। एलार्म बजने पर संबंधित दुकान के आसपास के सुरक्षाकर्मियों को सूचना मिलेगी और चोर भी घबरा कर भाग जायेंगे। देखें वीडियोः

मोशन डिटेक्शन सिस्टम

व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिये दूसरा एक उपकरण बाजार में उपलब्ध है जिसे मोशन डिटेक्शन सिस्टम कहा जाता है। इस सिस्टम के दुकान पर लगाने से जब कभी इसके आसपास कोई हलचल होती है तो सिस्टम उसे डिटेक्ट कर लेता है और एलार्म बजना शुरू हो जाता है। साथ ही रजिस्टर्ड मोबाईल पर एक एलर्ट एसएमएस चला जाता है। कुछ सैंकड बाद सिस्टम से रजिस्टर्ड मोबाईल पर एक फोन कॉल भी जाता है। दुकानदार चाहे तो अपने मोबाईल से एलार्म बंद भी कर सकता है। देखें वीडियोः

इस प्रकार के सुरक्षा उपकरणों के उपरांत दुकानदारा को आईयुक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिये। प्रति कैमरा लगभग २००० रुपये का खर्च आता है। यदि सुरक्षा उपकरण सक्रिय होने पर एलार्म बजना शुरू हो गया और मोबाईल पर एसएमएस या कॉल आ गया तो दुकानदार तुरंत अपने मोबाईल पर सीसीटीवी के माध्यम से दुकान के लाईव दृश्य देख सकता है।

युवा उद्यमी पुनित खेमका ने बताया कि व्यापारियों को तकनिक का भरपूर उपयोग करना चाहिये। सुरक्षा उपकरणों में छोटा सा निवेश बड़ी चोरी या नुकसार से बचा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारियों को चोरी का इंश्योरंस भी कराना चाहिये। इस गलतफहमी कि ताला टूटने पर ही इंश्योरंस पास होता है, खुलने पर नहीं के विषय में पुनित खेमका बताते हैं कि यह इंश्योरंस कंपनी पर निर्भर करता है और व्यापारी को अपनी आवश्यकता के अनुरूप इंश्योरंस कंपनी पसंद करनी चाहिये। यदि व्यापारी अपने यहां हुई चोरी के संबंध में प्रमाण उपलब्ध करवा सकता है तो ताले खोलकर की गई चोरी के मामले में भी इंश्योरंस पास होता है। पुनित खेमका ने स्वयं अपने प्रतिष्ठान पर आईपी युक्त सुरक्षा उपकरण लगा रखा है जिससे जब चाहें अपने प्रतिष्ठान का लाईव हाल देख सकते हैं।

वहीं टेक्सटाईल युवा ब्रिगेड के ललित शर्मा ने बताया कि बाजार में उपलब्ध सुरक्षा उपकरणों को लगवाने के लिये व्यापारियों के समक्ष संगठन स्तर पर मुहिम भी चलाई गई थी। लेकिन किसी ने इसमें रूचि नहीं दिखाई। उन्होंने बताया कि जब तक घाव हरा होता है, तब तक मरहम की बातें होती हैं और बाद में सब भूल जाते हैं और नया घाव लगवाने तैयार हो जाते हैं।

कहने का तात्पर्य यह है कि व्यापारी को अपनी दुकान और सामान की सुरक्षा स्वयं ही रखनी होगी, जब तक कि सांगठनिक स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं होती।