लो आ गए आमचुनाव


जिसका सभी को इंतजार था वो घड़ी अब शीघ्र ही आने वाली है। कल चुनाव आयोग द्वारा घोषणा के बाद इसका काउंटडाउन शुरू हो गया।
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जिसका सभी को इंतजार था वो घड़ी अब शीघ्र ही आने वाली है। कल चुनाव आयोग द्वारा घोषणा के बाद इसका काउंटडाउन शुरू हो गया। यह चुनाव सभी राजनैतिक पार्टियों के लिए बहुत ही निर्णायक होगा। उन पार्टीयो के लिए भी निर्णायक होगा जो सत्ता में है तथा उनके लिए भी होगा जो विपक्ष में है लेकिन अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे है। उनके लिए सबसे खास निर्णायक होगा जो पिछले आम चुनाव में शून्य के स्कोर पर थे। ओर सबसे ज्यादा अगर किसी को इंतजार रहेगा तो वो है पार्टीयो के कार्यकर्ता जो कि इन दिनों बहुत ज्यादा अग्रेसिव हो गए है, हमेशा फुल मूड में ही रहते है तथा किसी भी स्तर तक अपने दल के फेवर में जाने के लिए तैयार भी रहते है।

वैसे तो यह चुनाव हर चुनाव की तरह ही है लेकिन लोगो की निगाह इस पर इसलिए टिकी हुई है क्योकि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इस पांच साला कार्यकाल में जनता पर काफी प्रयोग किये है जो काफी हद तक जनता को भारी पड़े है, लेकिन अब शनै शनै उन्हें लोग भूलते भी जा रहे है क्योकि हर तकलीफ के ऊपर हमारी देशभक्ति ज्यादा महत्वपूर्ण है जिसके आगे हम किसी की नही सुनते न किसीको देखते है। जीएसटी, नोटबन्दी,बेरोजगारी आदि मामलों से पीड़ित लोग भी अब दो दो सर्जिकल स्ट्राइक के बाद काफी हद तक सन्तुष्ट दिख रहे है।
लेकिन हमारे भारत का वोटर थोड़ा अलग किस्म का है। वो अनपेक्षित करने में ज्यादा विश्वास रखता है। इसके अलावा यहां जातिगत राजनीति करने वाले दलों की भी भरमार है जो आजकल एक हो गए है। प्रमुख राष्ट्रीय पार्टीयो के अलावा प्रायः पार्टीया जातिगत तथा प्रांतीय राजनीति करती है। कुछ क्षेत्रीय दलों का वर्चस्व इतना ज्यादा मजबूत है कि राष्ट्रीय पार्टीयो को भी उनके प्रदेश में उनको अधिक तवज्जो देनी पड़ रही है।

हाल ही में जो गठबंधन हो रहे है उससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि क्षेत्रीय पार्टीयो का कोई तोड़ नही है। अंततोगत्वा उनकी शरण मे राष्ट्रीय पार्टीयो को जाना ही पड़ता है, चाहे हम सोशल मीडिया पर नेताओ को कितना भी शेर तथा अकेला ही सबसे निपटने वाला क्यो न बताये। सोशल मीडिया से याद आया कि इस बार चुनाव आयोग की नजर सोशल मीडिया पर भी रहेगी तथा वो ध्यान रखेगा की कौनसी पार्टी का प्रचार किया जा रहा है। आयोग ने इसके लिए गूगल तथा फेसबुक के अधिकारियों से भी सम्पर्क किया है। अतः जो अनुयायी है वो खास ध्यान रखे कि क्या लिख रहे है तथा वो कितना तथ्यात्मक है। नही तो कभी भी गाज गिर जाए तो कोई बड़ी बात नही।

आखिर में एक बात कह कर विराम लेता हूँ जो आज बहुत अधिक शेयर की जा रही है। वो यह है कि चुनाव दो चरण में होंगे, पहले चरण में नेता आपके चरणों मे होंगे तथा दूसरे चरण में आप नेताओ के चरणों मे। यह कमोबेश हकीकत भी है, ऐसा होता आया है अतः वोट सोच समझकर करे। उनको कभी न करे जो चरणों से लगाव रखते हो , उनको जरूर करे जो सदा कंधे से कंधा मिलाकर चलते हो।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय