सोशल मीडिया से दूर हो रहा सूरत का सरकारी महकमा, जिलाधीश धवल पटेल की राह पर अधिकारी


शहर के कलेक्टर डॉ. धवल पटेल ने सोशल मीडिया को बाय बाय कर दिया है। इसके बाद उनके अधीनस्थ अधिकारी भी सोशल मीडिया से दूर हो गये।
(Image | collectorsurat.in)

सूरत कलेक्टर धवल पटेल के बाद 5 डिप्टी कलेक्टरों ने भी दी सोशल मीडिया को तिलांजली

सूरत। शहर के कलेक्टर डॉ. धवल पटेल ने सोशल मीडिया को बाय बाय कर दिया है। उन्होंने शुक्रवार शाम एक संदेश के माध्यम से अपने अधीन विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को बताया कि वे अब सोशल मीडिया पर एक्टीव नहीं रहेंगे। यद्यपि उन्होंने इसके लिये नी‌जि कारणों का हवाला दिया। उन्होंने संदेश में यह भी जानकारी दी कि वे फोन, ईमेल, एसएमएस पर उपलब्ध रहेंगे और उनसे इसी माध्यम से कभी भी संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने अपना इमेल पता collector.surat@gujarat.gov.in भी दिया जिस पर उनसे संपर्क ‌किया जा सकता है।

बता दें कि जिलाधीश के रुप में डॉ. धवल पटेल सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते थे। वे जिस महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा लेते थे, उसकी तस्वीर और जानकारी ट्वीटर और फेसबुक पर शेयर भी किया करते थे। जिलाधीश के रुप में अधिकृत ट्ववीटर हैंडल @collectorsurat से १६ अक्टूबर को बारडोली के सुराली में ग्राम सभा के आयोजन की जानकारी शेयर की थी।

डॉ. धवल पटेल की इस पहल का जहां कइयों ने स्वागत किया है, वहीं यह सरकारी व आम हलकों में चर्चा का विषय भी बन गया है।

जिला कलेक्टर की यह पहल एक ट्रेंड का रुप लेती दिखी, जब सरकारी महकमे के अन्य अधिकारी भी सोशल मीडिया छोड़ने लगे। पांच डिप्टी कलेक्टरों ने भी बाद में वॉट्सएप, फेसबुक, ट्वीटर को राम राम कह दी।

सूरत सिटी प्रांत अधिकारी, ओलपाड प्रांत अधिकारी, मांडवी प्रांत अधिकारी, बारडोली प्रांत अधिकारी और कामरेज प्रांत अधिकारी शनिवार को दिन में बारी बारी से उन सभी वॉट्सएप ग्रुप से बाहर निकलने लगे, जिनके वे सदस्य थे। इस ट्रेंड के बाद संभव है कि इन उपरी अधिकारियों के अधीनस्थ अन्य सरकारी महकमा भी सोशल मीडिया से दूर होने लगे।

डॉ. धवल पटेल ने भले सोशल मीडिया से दूर होने के कारण के रूप में निजी मामलों का हवाला दिया हो, लेकिन अनुमान लगाया जा सकता है कि इसके पीछे सोशल मीडिया पर फिजूल का समय बर्बाद होने की आम वजह कारणभूत हो सकती है। वे नहीं चाहते होंगे कि सरकारी महकमा महत्वपूर्ण कार्यों में कोताही बरते और सोशल मीडिया के चक्कर में फंसा रहे। वैसे भी देखा गया है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण लोग अपने-अपने मोबाइल फोन से चिपके रहते हैं, जो एक प्रकार की लता का रुप धारण कर रहा है। इससे कामकाज की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। जरूरत के कामों को बेफिजूल के मामलों की ओर लोगों का ध्यान बंटता है।

उम्मीद है, सूरत के कलेक्टर डॉ. धवल पटेल की यह पहल अपना प्रभाव दिखायेगी और सरकारी महकमों में कार्यालय समय के दौरान कर्मचारी सोशल मीडिया पर टाइमपास नहीं करेंगे।