भारत माता पर मर मिटने को हर कोई तैयार!


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कल आपने पढ़ा कि कश्मीर के नोजवान सेना में भर्ती होकर मातृभूमि की सेवा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने को तत्पर है। उसके लिए भी कश्मीर में लंबी लाइने लग गई थी। जिन्हें लोग पत्थरबाजी के लिए जानते थे, वो भी आज राष्ट्र की मुख्यधारा में आकर देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निर्वहन करने के लिए तैयार खड़े है।

कल हमारे देश का एक ओर तबका माँ भारती के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने के लिए उठ खड़ा हुआ, जिन्हें हम बागी या डाकुओं के नाम से जानते है पर जिन्होंने शस्त्रों को छोड़ समाज की मुख्यधारा को श्रेयस्कर मान सामान्य जीवन को अपना लिया है। कल तक जिनसे पूरी दुनिया ख़ौफ़ खाती थी, जिनके नाम से ही डरती थी पर जिन्होंने 1982 में अपने हथियार डाल आध्यात्मिक मार्ग अपना लिया, ऐसे पूर्व डाकू मलखान सिंह ने कल कानपुर में पुलवामा मामले पर अपना बयान दिया कि कि हमने हथियार छोड़े हैं चलाना नहीं भूले हैं।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में 700 बागी बचे हैं। अगर सरकार चाहे तो बिना शर्त, बिना वेतन हम बॉर्डर पर देश के लिए मर मिटने को तैयार हैं। हमने 15 साल बीहड़ों में कथा नहीं बांची है। मां भवानी की कृपा रही, तो मलखान सिंह का कुछ नहीं बिगड़ेगा। हां, पाकिस्तान को जरूर धूल चटा दूंगा। उसको उसकी औकात दिखा दूंगा। मलखान सिंह ने यह भी कहा कि हमसे लिखवा लिया जाए कि हम मारे जाएं तो कोई जुर्म नहीं। बचा हुआ जीवन भारत माता की सेवा में लगाने को तैयार हैं। अगर इसमें पीछे हट जाए तो नाम मलखान सिंह नहीं है। इसके साथ वो ये भी बोले कि मैं गांव व जिले का बागी रहा हूं,देश का नहीं।

राजनीति के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं कहता हूं कि हम अन्याय के खिलाफ राजनीति करेंगे। डाकू जीवन मे भी हम अन्याय के खिलाफ लड़े थे कभी किसी लाचार या महिला को परेशान नही किया। हम राजनीती पेट भरने के लिए नहीं करेंगे। मलखान ने ये भी कहा कि चुनाव होंगे और होते रहेंगे लेकिन पुलवामा में हुए आतंकी हमले का बदला जरूर लेना चाहिए। अगर कश्मीर पर फैसला नहीं लिया गया तो कोई भी राजनीति पर विश्वास नहीं करेगा।

अब जिस देश मे देश के लिए बुजुर्ग हो चुके पूर्व बागी भी मरने के लिए तैयार हो जाये तो सोचिए कि इसकी ओर आंख उठाने वालों का क्या हश्र होगा? बशर्ते निर्णय लेने वाले समय पर सशक्त निर्णय करे।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय