जो खुद की चिंता नहीं करता उसकी चिंता स्वयं भगवान करते हैं : जया किशोरीजी


श्री सोमोलाई हनुमान मंडल की ओर से गोसेवार्थ आयोजित तीन दिवसीय ‘नानी बाई रो मायरो’
Photo/Loktej

म्हारी हुण्डी स्वीकारो महाराज रे, सांवरा गिरधारी …पर थिरके श्रद्घालु

श्री सोमोलाई बालाजी मंडल द्वारा आयोजित ‘नानी बाई मायरो’ उमड़े भक्त

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सूरत। श्री सोमोलाई हनुमान मंडल की ओर से गोसेवार्थ आयोजित तीन दिवसीय ‘नानी बाई रो मायरो’ के दूसरे दिन शनिवार को सोमोलाई सेवा धाम, सूर्य प्रकाश रेसीडेंसी के पास, अणुव्रत द्वार सिटी लाइट, सूरत में मंगल व्यास पूजन एवं आरती के साथ नानी बाई रो मायरो की शानदार शुरुआत हुई। तत्पश्चात राकेश कंसल, विनोद दिलोडिया, प्रदीप अग्रवाल, सज्जन महर्षि, अरुण पाटोदिया आदि ने व्यापीठ पीठ पर विराजित राधास्वरुपा जयाकिशोरीजी का स्वागत किया।

पूज्य राधास्वरुपा जया किशोरीजी ने कहा कि न सेवा ही नारायण सेवा है। गो सेवा सहित विविध सेवा प्रवृत्तियों के 25 वर्ष पूर्ण होने पर उत्सव के रुप में मना रहा है। सेवा की ज्योत जलती रहे इसके लिए हर किसी को यथा योग्य सहयोग करना चाहिए। धर्म के प्रति उठे हाथ यानी दान का उपकार प्रभु रखते नहीं, वह दो-चार गुना कर वापस दे देते हैं।

उन्होंने कहा कि भक्त नरसी का भगवान कृष्ण से मुलाकात हुई, वहां से नरसी नहीं आना चाहते थे। तब कृष्ण ने कहा नहीं अभी जाना होगा? क्योंकि अभी आपका कर्म बहुत बाकी है। नरसी के वैवाहिक जीवन में एक पुत्री नानीबाई और एक पुत्र भी था। परंतु अल्पकाल में ही पत्नी एवं पुत्र स्वर्ग सिधार गये। भक्त नरसी के पास भगवान की कृपा से 12 पीढ़ी आराम से जीवन यापन कर सके, इतना अन्न एवं धन था। लेकिन नरसी ने बिना कुछ चिन्ता किये 12 महीने में ही खर्च कर दिया। पूज्या ने कहा जो खुद की चिंता नहीं करता उसकी चिंता स्वयं भगवान करते हैं। पत्नी की मृतक क्रिया बहुत ही सादगी से करना चाहते थे, परंतु गांव के कुछ लोग बड़े पैमाने पर मृतक भोज कराना चाहते थे। इस दरम्यान द्वारका के लिए निकले दो सेठ गांव के लोगों से मिले और कहा कि मेरे पास सात सौ रुपये है। द्वारका के रास्ते में जंगल होने के कारण हम सात सौ रुपये की हुंडी चाहते हैं? क्या यहां कोई सेठ है। गांव के लोगों ने मसखरी से भक्त नरसी का नाम सुझा दिया। सेठों ने नरसी के पास गये और ना नुकुर करने के बाद भी जबरन 700 रुपये नरसी को देकर हुंडी ले ली। इस बीच मृतक भोज कार्यक्रम अच्छे से हुआ तो गांव उन्हीं मसखरीबाजों ने यहां-वहां कहने लगे कि नरसी ने भगवान के नाम पर दो सेठों को ठग लिया। लोगों के व्यावहार से दुखी भक्तनरसी ने भगवान कृष्ण का स्मरण किया। इस दरम्यान … म्हारी हुण्डी स्वीकारो महाराज रे सांवरा गिरधारी… के भजनों की प्रस्तुति पर भक्त थिरकते दिखे।
पू्ज्या ने आगे कहा कि नरसी की पुत्री नानीबाई की शादी बड़े धनवान घर में होती है। नानीबाई के सुसराल में नरसी के घर से ‘भात’ लाने की चर्चा चल रही है। नरसी को निमंत्रण के साथ ही 56 करोड़ की ‘भात’ की मांग की, ताकि वो नहीं आ सके। रविवार को भक्त नरसी नानी बाई को मायरो लेकर उसके ससुराल जाएंगे।