शिक्षा लीजिये पर कसौटी भी कीजिये


वर्तमान में ऐसे योग्य महात्माओं की अपेक्षा सन्त के भेष में कालनेमि अधिक मिलते है ।
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सुंदरकांड में एक दोहा है जिसमे हनुमानजी महाराज को लंकिनी नाम की राक्षसी कहती है कि आज मैं कृत्य कृत्य हो गई क्योकि मेने अपनी आंखों से भगवान का दूत देख लिया है। इसके आगे वो कहती है कि

तात स्वर्ग अपबर्ग सुख, धरहि तुला एक अंग,

तूल न ताहि सकल मिली, जो सुख लव सत्संग।।

मतलब हर प्रकार के सुख से अधिक क्षण मात्र के सत्संग का सुख होता है। इसी सत्संग के उद्देश्य से प्राणी सन्त समागम हरि कथा श्रवण करने जाता है। आगे उसी सुंदरकांड में जब विभीषण से हनुमानजी मिलते है तो विभीषण यही कहते है कि बिनु हरिकृपा मिलहि नही सन्ता। मतलब की बिना प्रभु की कृपा के सन्त मिलने मुश्किल है।

वर्तमान में कलिकाल में जब व्यक्ति त्रिताप से पीड़ित होता है तथा मानसिक शांति खो देता है तब उसे किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश होती है जो उसके तप्त मन को अपनी वाणी की शीतलता से शांत करदे। वो प्राणी हरिनाम का श्रवण करके न केवल अपने मन को शांत करना चाहता है बल्कि आध्यात्मिक विषयो पर ज्ञान प्राप्त करके, ईश्वरीय सत्ता के बारे में जानकर अपना आगे का जीवन भी अच्छा करने की अभिलाषा करता है।

लेकिन वर्तमान में ऐसे योग्य महात्माओं की अपेक्षा सन्त के भेष में कालनेमि अधिक मिलते है जो अपने शिष्य के धन तथा वैभव पर नजर गड़ाकर उसका हरण करने की इच्छा रखते है न कि शिष्य के अज्ञान तथा अशांति का हरण करते है। अगर हम इस प्रकार के उदाहरण देखेंगे तो एक लंबी फेरहिस्त ऐसे लोगो की हमे मिल जाएगी जो सन्त के वेश में शैतान निकले होंगे तथा अभी जो कानून के शिकंजे में भी है।
इसी कड़ी में दो नाम आशाराम बापू तथा उनके पुत्र नारायण साईं का भी है। दोनो पिता पुत्र आध्यात्मिक जगत की एक समय मे जानी मानी हस्तियां थी जिनके लाखो की संख्या अनुयायी थे। लेकिन महिलाओं के यौन शोषण के आरोप में वो दोनो पिता पुत्र अभी क्रमशः जोधपुर तथा लाजपोर जेल में है।

कल सूरत सेशन कोर्ट ने नारायण साईं को बलात्कार के मामले में दोषी करार दिया। सजा का फैसला 30 अप्रैल को होगा। नारायण साईं पर आरोप है कि उसने एक महिला साधक पर अलग अलग समय पर बलात्कार किया था। कथावाचक आसाराम भी बलात्कार के दो अलग अलग मामलों आरोपी हैं। एक ओर जहां आसाराम बलात्कार मामले में जेल में बंद है, वहीं उसके बेटे नारायण साईं ने भी काली करतूतों में अपने पिता का खूब साथ निभाया। यही नहीं नारायण साईं पर उसकी पत्‍नी जानकी पहले ही अवैध संबंधों का आरोप लगा चुकी है।

नारायण साईं पर आश्रम की एक युवती से बलात्‍कार का आरोप है। आसाराम के बेटे और उसकी गंदी हरकतों में बराबर के साझीदार नारायण साईं के खिलाफ आश्रम की एक युवती ने 6 अक्‍टूबर 2013 को बलात्‍कार का मामला दर्ज कराया था। इतना ही नहीं नारायण साईं ने इस मामले को दबाने के लिए थाना प्रमुख को 13 करोड़ रुपये की रिश्‍वत भी दी थी। घूसखोर पुलिस अधिकारी से 5 करोड़ रुपये नगद और प्रॉपर्टी के कागजात बरामद करने के बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया था।

नारायण साईं की पत्नी जानकी ने उस पर आरोप लगाया था कि मेरे पति ने हमेशा धर्म के नाम पर ढोंग किया है। मेरे पति ने सबसे ज्यादा घोर अपराध यह किया है कि उसने अपने आश्रम की एक साधिका से अवैध संबंध बनाए। जब यह साधिका गर्भवती हो गई तो उसने मुझसे कहा कि वह दूसरी शादी करना चाहते हैं। जानकी ने आरोप लगाया कि जब उसने नारायण से कहा कि वह उसे तलाक देकर दूसरी शादी कर सकता है तो उसके पति ने उसे बताये बगैर ही इस साधिका से राजस्थान में दूसरी शादी कर ली और इस महिला से उसे एक नाजायज संतान भी है।

जब धर्म की धुरी कहे जाने वाले सन्त जो लोगो को अपने सदुपदेशों से मार्ग प्रशस्त करते है, वो ही इस प्रकार का कार्य करेंगे तब आप ही बताइए कि हमारे देश मे संस्कृति तथा सामाजिक मूल्यों की रक्षा कैसे होगी? इससे तो यह श्रेयस्कर रहेगा कि हम सिर्फ ईश्वर तथा हमारे सद्ग्रन्थों को ही अपना गुरु माने तथा उनके द्वारा बताए गए रास्तों पर चले। शरणागति अगर लेनी ही है तो ईश्वर के अलावा किसी की क्यो ले? शिक्षा भी अगर लेनी है तो हमारे ग्रन्थ भरपूर ज्ञान से भरे हुए है। संघ संस्थापक डॉ हेडगेवार ने इसीलिए किसी व्यक्ति की बजाय तत्व पूजा को अधिक श्रेयस्कर बताया तथा किसी व्यक्ति की बजाय भगवा ध्वज को गुरु स्थान पर स्थापित किया। हमे भी इस बात से सीख लेनी चाहिए।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय।