बार बार हो रहा एयरलाइन संकट: क्यो?


पिछले सप्ताह बुधवार को हमारे देश की प्रमुख निजी एयरलाइन कम्पनी जेट एयरवेज ने अपनी उड़ाने अस्थाई रूप से बन्द करने की घोषणा कर दी।
Photo/Loktej

आज कुछ आपबीती लिख रहा हूँ। क्योकि कल हमारे गुजरात की सभी 26 सीटों पर मतदान हो चुका है तथा सम्पूर्ण भारत वर्ष का देखे तो आधे से अधिक सीट पर मतदान हो चुका है। अतः आज भर राजनैतिक चर्चा को विराम देते है और आज जनता की साथ ही अपनी तकलीफ को लिखता हूँ।

पिछले सप्ताह बुधवार को हमारे देश की प्रमुख निजी एयरलाइन कम्पनी जेट एयरवेज ने अपनी उड़ाने अस्थाई रूप से बन्द करने की घोषणा कर दी। जेट एयरवेज पिछले 7 साल में बंद होने वाली छठी और दूसरी बड़ी एयरलाइन है। 2012 में माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस बंद हुई थी। उसके बाद एयर पेगसस, एयर कोस्टा, एयर कार्निवल और जूम एयर को ऑपरेशंस बंद करने पड़े थे। जेट के ऑपरेशन बंद होने के बाद करीब 20 हजार कर्मचारियों और मैनेजमेंट के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके रोजगार को बचाने की अपील की है।

जेट एयरवेज के मैनेजमेंट और कर्मचारियों को अब एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्शियम द्वारा जेट की हिस्सेदारी बेचने के लिए बोली प्रक्रिया पूरी करने का इंतजार है। यह प्रोसेस 10 मई तक पूरी होगी। जेट के कर्जदाताओं का कहना है कि बिडिंग के जरिए जेट के संकट का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले साल एयरलाइन ने कॉस्ट कटिंग के तहत कर्मचारियों से 25% सैलरी कम करने के लिए भी कहा लेकिन वो नहीं माने। अब हालत ये हो गई है कि कर्मचारी लोन की किश्त चुकाने के लिए गहने गिरवी रखने को मजबूर हो गए हैं। कई कर्मचारी 25-50% तक कम वेतन पर दूसरी एयरलाइंस ज्वॉइन करने को तैयार हैं। एक सूत्र ने बताया कि जेट का संकट बढ़ने के बाद 400 पायलट नौकरी छोड़ चुके हैं। अब जेट के पास 1,300 पायलट रह गए हैं।

इससे मुझे भी काफी असर पड़ा था क्योकि मैं स्वयं एक यात्री था। मेरा भाई पिछले सप्ताह लन्दन से आया था तथा उसको मेरी माताजी को लेकर इंदौर आना था जो जरूरी भी था। लेकिन अचानक इस निर्णय से पूरा टाइम मैनेजमेंट गड़बड़ा गया तथा काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ा। कई लोग जो परिवार के साथ विदेश से यहां आए हुए थे उनको वापिस लौटने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। ज्यादा किराया चुकाकर भी वो समयानुसार लौट नही पाए। अगर यात्रियों को इतनी असुविधा हुई है तो उनके कर्मचारियों को कितनी असुविधा हुई होगी जिनका 3 महीने का वेतन भी अभी बाकी है तथा कैसे भी करके वो सर्वाइव कर रहे है।

इस ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए क्योकि यह केवल इन बेरोजगार हुए लोगो का ही प्रश्न नही है बल्कि लगातार जो इन वर्षों में सात एयरलाइन बन्द हुई है उनके बारे में भी विचारणीय प्रश्न है। यह सम्पूर्ण देश के प्रमुख हो रहे यातायात के साधन पर भी सीधा पड़ने वाले प्रभाव का भी प्रश्न है। देश के नागरिकों को न तो यातायात की असुविधा होनी चाहिए न बड़े पैमाने पर उच्च पदस्थ लोग बेरोजगार होने चाहिए। इसलिए सरकार को ध्यान देना चाहिए, समीक्षा करनी चाहिए।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय