सबसे पहले हम भारतीय, भारत माता की संतान


जब भी हमारे देश मे चुनाव आते है, जातिवाद हावी हो जाता है। प्रत्याशियों का चयन भी क्षेत्र की जातिगत बाहुल्यता देखकर किया जाता है।
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जब भी हमारे देश मे चुनाव आते है, जातिवाद हावी हो जाता है। प्रत्याशियों का चयन भी क्षेत्र की जातिगत बाहुल्यता देखकर किया जाता है। जिस जाति के लोग जिस क्षेत्र में अधिक होते है उसी जाति के नेता को टिकिट आवंटन में वरीयता मिलती है। कुछ एक बड़े नेताओं को छोड़कर ज्यादातर नेता जातिगत आधार पर बने हुए नेता ही होते है। जिस जाति के लोग कम होते है उससे बिरले ही होते है जो नेता बन जाते है। लेकिन सबसे ज्यादा खास बात यह है कि जाति के आधार पर बने हुए यह नेता कभी भी अपने आपको जातिगत सिद्ध नही होने देते है। दिखावा तो यही रहता है कि हम सभी को समान रूप से देखते है। कुछएक नेता अर्जुन मेघवाल जैसे होते है जो अपनी जाति वालो की पैरवी करने के चक्कर मे नप जाते है।

लेकिन कल फिर एक नेता ने अपनी जाति के आधार पर खुद को अन्य नेताओं से अलग कर लिया है। अपने विवादित बेबाक बयानों के लिए जाने जानेवाले भाजपा के फायर ब्रांड नेता ओर सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कल एक तमिल न्यूज चैनल थांथी टीवी को इंटरव्यू को इंटरव्यू दिया था। उनसे सवाल हुआ कि अब तक उन्होंने ट्विटर पर अपने नाम के आगे चौकीदार शब्द क्यों नहीं जोड़ा है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि मैं ब्राह्मण हूं, मैं चौकीदार नहीं बन सकता। यह फैक्ट है। मैं चौकीदारों को आदेश दे सकता हूं कि उन्हें कैसे काम करना है।
सोशल मीडिया पर स्वामी के इंटरव्यू का 15 सेकेंड का यह वीडियो वायरल हो गया। इसके बाद क्या होता है वो तो आप जानते ही हो। वो लोगों के निशाने पर आ गए और सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। लोगो ने उनकी सोच को जातिवादी मानसिकता बताया।

ट्रोल होने के बाद सफाई देने के लिए सुब्रमण्यन स्वामी ट्वीटर पर आए और लिखा कि मुझे खुशी है कि ब्राह्मण होने के मेरे बयान ने देश विरोधी ताकतों द्वारा वित्त पोषित ब्राह्मण विरोधी अभियान को खत्म कर दिया है। कुछ लोगों ने बीजेपी में ऐसे लोगों को संरक्षण दिया हुआ है जो भविष्य के बढ़ते हिंदुत्व के डर से शोर मचा रहे हैं।

इस कथन का अभिप्राय उनकी दृष्टि से क्या होगा यह तो वही जाने लेकिन इस इंटरव्यू से पहले ट्विटर पर किसी ने स्वामी से पूछा था कि सर आप अब तक चौकीदार क्यों नहीं बने? इसके जवाब में उन्होंने लिखा था कि क्योंकि वह गुरु हैं, चौकीदार का काम गलती को रोकना है। जबकि गुरु सलाह देता है कि चीजें कैसे बेहतर हों।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पत्रकार वार्ता में कहा कि भाजपा के समर्थक और नेता जो मैं भी चौकीदार कैंपेन से जुड़ रहे हैं वे हर जाति और धर्म के हैं। ऐसे में सुब्रमण्यन स्वामी का ये कहना कि ब्राह्मण होने की वजह से मैं चौकीदार नहीं हो सकता, उनकी जातिवादी सोच को दिखाता है।

वैसे जातिवादी सोच से याद आया कि जब भाजपा के उम्मीदवारों की सूची जारी हुई थी उस समय स्मृति ईरानी के नाम के आगे पारसी लगाया गया था। यह एक आश्चर्यजनक लगने वाली बात थी क्योकि पारसी सम्प्रदाय भारत मे बहुत कम है अतः जातिगत फायदा हो यह तो सम्भव नही था लेकिन हो सकता है कि इसके पीछे यह सोच काम कर रही हो कि श्रीमती इंदिरा गांधी ने भी पारसी से विवाह किया था तो उनकी सन्ताने गांधी सरनेम लगाकर हिन्दू क्यो बनी हुई है। सोच जिसकी जो भी हो परन्तु हम किसी भी जाति, धर्म, सम्प्रदाय के व्यक्ति होने से पहले भारतीय है तथा सहोदर भाई बहन के समान है, क्योकि हम सबकी माता भारत माता है। अतः हमें आपस मे न तो ऐसा सोचना चाहिए न जातिगत बात करने वाले को तवज्जो देनी चाहिए।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय