यत्र नार्यस्तु पूज्यते, रमन्ते तत्र देवता


जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। किंतु वर्तमान में जो हालात दिखाई देते हैं, उसमें नारी का हर जगह अपमान होता चला जा रहा है।
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भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। मनु स्मृति में एक श्लोक में इसका वर्णन है कि यस्य नार्यस्तु पूज्यंते, रमन्ते तत्र देवता:। अर्थात जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। किंतु वर्तमान में जो हालात दिखाई देते हैं, उसमें नारी का हर जगह अपमान होता चला जा रहा है। पुरुष सत्तात्मक समाज मे नारी को भोग की वस्तु समझकर आदमी अपने तरीके से इस्तेमाल कर रहा है। यह अतिशय चिंताजनक बात है। लेकिन हमारी संस्कृति को बनाए रखते हुए नारी का सम्मान कैसे किया जाए, इस पर विचार करना आवश्यक है।

सम्मान से याद आया आज विश्व महिला दिवस है। सब जगह आज इसकी बधाइयों का दौर चल रहा है। कई लोग जिन्होंने महिला के किसी भी रूप का सम्मान नही किया,न माँ के रूप में न पत्नी के रूप में, न बहन और पुत्री के रूप में,वो भी दे दनादन बधाई देने में लगे हुए है। क्या एक विशेष दिवस पूर्ति ही यह सम्मान है? क्या दुनिया की आधी आबादी एक दिवस विशेष के अलावा पीड़ित नही है? क्या आज के दिन भी उनको यथोचित सम्मान मिल पायेगा? क्या केवल सोशल मीडिया पर बधाई देने मात्र से ही इसका महत्व हो जाएगा?

मेरे हिसाब से तो इन सभी प्रश्नों का जबाब ना ही आया होगा। वर्तमान विश्व मे जहाँ शिक्षा का प्रमाण पहले से बढ़ा है, लोग संकुचित मानसिकता का त्याग कर रहे है, वैश्विक रूप से महिलाओं के लिए अनेक प्रकार के सशक्तिकरण के आयोजन हो रहे है, तब भी महिलाओं की स्थिति आज भी पुरुषों की तुलना में उनके बराबर नही है।

क्या हमें उनकी स्थिति को सुधारने के लिए आरक्षण जैसी व्यवस्था का सहारा लेना पड़ेगा? क्या उनको सम्मान दिलाने के लिए हमे अवेयरनेस के कार्यक्रम करने पड़ेंगे? क्या उनकी सुरक्षा के लिये हमें आज भी उनके सशक्तिकरण के कार्यक्रम करने पड़ेंगे? क्या वो हमारी जिम्मेदारी नही है? जहां बात जिम्मेदारी की आती है वही जाकर बात अटक जाती है। पुरुष प्रधान समाज ने स्त्री को भोग्या समझा है। अतः जिम्मेदारी का अहसास किसी को भी नही है, हाँ, अधिकार का पूछो तो तुरन्त गिनवा दिए जाएंगे। हमारी जिम्मेदारी सिर्फ हमारे घर की महिलाएं ही नही बल्कि समाज की, देश की हर महिला है, उनको सम्मान देना हमारा पहला कृतव्य है।

हमारा देश विविधतासम्पन्न है। यहां पर हमें संस्कृति विरासत में मिली है। यहां के शास्त्रों में सामाजिक नीति नियमो का विस्तार से उल्लेख है जो हमे कर्तव्यों का बोध कराते है। उसी के साथ हमारे पास महिलाओं के बारे में समृद्ध इतिहास है। यहां जब शंकराचार्य तथा मंडन मिश्र का शास्त्रार्थ होता है तो निर्णायक भारती देवी नाम की महिला होती है। यहां महान ज्ञानी याज्ञवल्क्य को गार्गी चुनोती दे देती है। मैत्रेयी, अनुसुइया, अरुंधति के इतिहास वाला देश जिसमे अयोध्यापति राम शबरी के झूठे बैर खाने में नही हिचकिचाते ओर उन्हें ग्रहण कर माता शबरी को सम्मान देते है। उस देश मे महिला सम्मान की बात करना, समझाना, आग्रह करना, बेमानी होगा। यहां तो महिलाओं का सम्मान स्वतः होना चाहिए। क्योंकि हम तो देश को भी माता का विरुद प्रदान करते है।

देश की सभी महिलाओं को उनके लिए मनाए जाने वाले इस विशेष दिवस की शुभकामनाएं, वैसे आप सभी सृष्टि की सृजनात्मक शक्ति हो अतः आपके लिए कोई दिन विशेष नही बल्कि आप सभी विशेष हो। साथ ही पुरुषों से कामना कि सदैव मातृशक्ति का सम्मान करें, सिर्फ दिन विशेष तक सीमित न रखे।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय।