देश ही सर्वोपरि


चुनाव लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूती देने के लिए होता है, जिसमे जनता अपना नेतृत्वकर्ता चुनती है।
Photo/Loktej

एक चुटकला आपने सुना होगा। चलिए मैं सुना देता हूँ।

एक बुड्ढे चाचाजी मतदान करने पोलिंग बूथ पर पहुंचे। वोट देकर उन्होंने चुनाव अधिकारी से पूछा कि देखना तो मेरी घरवाली वोट देकर गई या नही। अधिकारी ने देखकर बताया कि हाँ चाचाजी आकर चली गयी है। तो चाचाजी मायूस हो गए और बोले कि फिर आज देरी हो गई, थोड़ा जल्दी आया होता तो मुलाकात हो जाती। इस बात पर आश्चर्य करते हुए अधिकारी ने पूछा कि क्या वो आपके साथ नही रहती? बुड्ढे चाचा ने जबाब दिया कि कैसे रहेगी, उसे तो मरे हुए पांच साल हो गए है। हाँ वोट देने जरूर आ जाती है तो मुलाकात की बस यही आशा है, पर आज भी देरी हो गई।

यह देखा जाए तो एक चुटकला है , पर यह हमारे देश की कड़वी हकीकत भी है। सबसे बड़े लोकतंत्र का दम भरने वाले हमारे इस महान देश मे चुनावो में फर्जी वोटिंग अक्सर देखी जा सकती है। मैंने पिछले विधानसभा चुनाव में काफी जगह अपनी आंखों से देखी भी थी। और कल जब लोकतंत्र के महापर्व के प्रथम चरण के चुनाव हुए तो काफी जगहों से इस प्रकार के समाचार आपने भी देखे होंगे। बुर्का पहने हुए मर्द की तस्वीरें हो सकता है आपको भी मिली ही होगी।

खैर चलता रहता है यह सब, इतना गौर नही करना चाहिए परन्तु जो भूतकाल से होता आया है वो हिंसात्मक गतिविधियां अगर कही पर होती है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है। एक तरफ हम देशप्रेम की बात कहे ओर दूसरी तरफ कुछ लोग सत्ता के लिए ऐसा ही घिनोना कृत्य करे तो उससे शर्मनाक बात और क्या होगी।

पहले चरण के मतदान के दौरान कल आंध्र प्रदेश में टीडीपी और वाईएसआरसीपी के समर्थक भिड़ गए। भिडंत इतनी जबरदस्त हुई की कई लोग घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल एक टीडीपी कार्यकर्ता की मौत हो गई। जिसका नाम सिद्धा भास्कर रेड्डी बताया जा रहा है। दो दलों की आपसी लड़ाई में आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कोडेला शिव प्रसाद राव समेत 10 लोग घायल हो गए।

अब आप ही सोचिए कि हम किस तरफ आगे बढ़ रहे है? खैर हम युवाओं का आह्वाहन करते है कि राजनैतिक प्रवर्तियो में हिंसा को बिल्कुल न आने दे। यह देश हमारे लिए ईश्वरतुल्य है क्योकि हम इसे भारत माता बोलते है, न कि वो नेता हमारे लिए ईश्वरतुल्य है, जिन्हें हम तो आदर्श मानते है पर जिनका खुद का कोई ठिकाना नही होता कि कब सत्ता के लालच में अपने सिद्धांतों से भी समझौता कर लेवे।

चुनाव लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूती देने के लिए होता है, जिसमे जनता अपना नेतृत्वकर्ता चुनती है। अगर हम देशहित को दरकिनार कर स्वहित या जातिगत या भाषागत मुद्दे पर अड़ जाएंगे तो देश का इसमे भारी नुकसान हो जाएगा। और देश के सुज्ञ नागरिक होने का कृतव्य निभाते हुए न हमे यह करना है न होने देना है। राष्ट्र सर्वोपरि है, इस राष्ट्र के लिए जो हितकर है उसे चुने, जो आपको अच्छा लगे, हिंसा तथा जाली वोटिंग रोकते हुए।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय