कांग्रेस द्वारा राजद्रोह की धारा खत्म करने की घोषणा


कल भारत की दो मुख्य राजनैतिक पार्टियों में से एक कांग्रेस ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया।
Photo/Loktej

कल भारत की दो मुख्य राजनैतिक पार्टियों में से एक कांग्रेस ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया। यह घोषणा पत्र वैसे ही होते है जैसे मेलो में खेल वाले स्टाल लगे रहते है जिसमे लालच उत्पन्न करने वाले ऑफर लिखे रहते है कि आप ऐसा कीजिये तो आपको अमुक वस्तु मिलेगी। व्यक्ति प्रयास करता है और उस प्रयास में पैसा भी जाया कर देता है। राजनैतिक पार्टियों के वादे भी ऐसे ही होते है। व्यक्ति उनकी लालच में आकर केवल अपना समय और वोट बिगाड़ता है। पर यह शास्वत परम्परा है और हर पार्टी चुनाव पूर्व यह रस्म करती ही है। यह अलग बात है कि पिछले साल हुए पांच राज्यो के विधानसभा चुनाव में से एक छत्तीसगढ़ राज्य में कांग्रेस ने घोषणा के साथ साथ गंगाजल की शपथ भी ली थी। वादे कितने पूरे हुए यह तो जनता जानती है पर पार्टी के इरादे इस विधि से जरूर पूरे हो गए।

अब लोकसभा के चुनाव है तथा कही न कही कांग्रेस पार्टी के लिए यह चुनाव निर्णायक भी है क्योकि पिछले लोकसभा चुनाव में उसकी स्थिति क्षेत्रीय पार्टीयो जैसी हो गई थी। इस बार के घोषणा पत्र को जन आवाज नाम दिया गया है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मैनिफेस्टो में 5 प्रमुख वादे किए गए हैं। किसानों के लिए अलग बजट लाया जाएगा। साथ ही कृषि कर्ज के डिफॉल्टरों पर फौजदारी मामला दर्ज नहीं होगा। इसके साथ ही राहुल ने गरीबी पर वार, 72 हजार का नारा भी दिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घोषणा पत्र के मुताबिक अगर कांग्रेस सत्ता में आती हस तो देशद्रोह को परिभाषित करने वाली धारा 124 (ए) को खत्म किया जाएगा।

राहुल गांधी ने अपने घोषणा पत्र को जमीनी जुड़ा होने का दावा करते हुए कहा कि हम अपना मैनिफेस्टो रिलीज कर रहे हैं। यह कांग्रेस के लिए बड़ा कदम है। पिछले साल जब हमने यह शुरू किया था, तब मैंने चिदंबरम जी को दो चीजें कही थीं। मैंने उन्हें कहा था कि यह बंद कमरों में बनने वाली चीजें नहीं हैं। यह बिल्कुल सच्चा होना चाहिए। हम पिछले काफी समय से झूठ सुन रहे हैं, वो भी अपने प्रधानमंत्री से। जब हम मैनिफेस्टो के बारे में बात करते हैं या न्याय के बारे में बोलते हैं तो जनता से एक रिस्पॉन्स मिलता है।

अब जनता का क्या रिस्पॉन्स मिलेगा यह तो भविष्य ही जानता है परन्तु घोषणा पत्र के तुरन्त बाद ही वित्तमंत्री अरुण जेटली की प्रतिक्रिया तुरन्त आ गई।

जेटली ने कहा कि क्या कांग्रेस के लिए देशद्रोह जुर्म नहीं है? इस पार्टी के वादे देश की एकता के लिए खतरा हैं। जिन आतंकियों को सेना रोज मारती है, वो बच निकलें? वो लोग हमसे बात करने के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि वे अलग होने की बात करते हैं। और यह लोग यानि कि कांग्रेस वाले उनसे लगातार बात करना चाहते हैं। कांग्रेस जम्मू कश्मीर में खतरनाक एजेंडा लागू करना चाहती है। कांग्रेस आफस्पा हटाना चाहती है। वह माओवादियों के चंगुल में है। इस पार्टी ने देश को तोड़ने वाले वादे किए है।

कांग्रेस ने घोषणापत्र के पेज संख्या 34 में कहा है कि भारतीय दंड सहिता की धारा 124 ए (जो कि राजद्रोह के अपराध परिभाषित करती है) जिसका कि दुरुपयोग हुआ है, और बाद में नए कानून बन जाने से उसकी महत्ता भी समाप्त हो गई है उसे खत्म किया जाएगा। वैसे यह धारा अंग्रेजों के जमाने की है। तब अंग्रेज इस कानून का इस्तेमाल उन भारतीयों के खिलाफ करते थे, जो अंग्रेजों की बात मानने से इन्कार कर देते थे। यह धारा 1870 में वजूद में आई थी। 1908 में बाल गंगाधर तिलक को उनके लिखे एक लेख की वजह से 6 साल की सजा सुनाई गई थी और ये सजा उन्हें इसी कानून के तहत दी गई थी। इसके अलावा अखबार में तीन लेख लिखने की वजह से 1922 में महात्मा गांधी को भी राजद्रोह का आरोपी बनाया गया था। तब से अब तक कानूनों में कई बदलाव हुए हैं, लेकिन ये धारा बनी हुई है और पिछले कुछ सालों में इस धारा को लेकर खूब विवाद भी रहे हैं।

गौर से अगर अध्ययन किया जाए तो हमे ज्ञात होगा कि यह धारा संविधान के अनुच्छेद 19(ए) के विपरीत है क्योकि इसके तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलती है। लेकिन वही 19(ए)1 के तहत कुछ विषयो पर प्रतिबंध भी लगे हुए है जो 124 के अंतर्गत भी आते है। इसके अलावा जो भी अपराध शांति व्यवस्था बिगाड़ने, धार्मिक उन्माद फैलाने और सामाजिक द्वेष पैदा करने जैसे होते है उनके लिए आईपीसी में अलग से कई धाराएं है। अतः 124 का उपयोग सिर्फ राजनैतिक ही होता है यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नही होगी।
खैर इसका उपयोग हो या दुरुपयोग पर इसके होने से अगर भारत माता के प्रति अपराध करने वाला व्यक्ति जरा भी आशंकित होता है तो इसकी जरूरत जरूर है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय