बच्चो को रखे गन्दी राजनीति से दूर


चुनाव के दौरान नेतागण हर तरह के हथकंडे अपने विरोधियों को मात देने के लिए अपनाते है।
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चुनाव के दौरान नेतागण हर तरह के हथकंडे अपने विरोधियों को मात देने के लिए अपनाते है। उस दरम्यान कभी कभी वो यह भी भूल जाते है कि कुछ राजनैतिक शुचिता भी उन्हें रखनी चाहिए। इतनी तो जरूर की जब सामने मिले तो कमसे कम नजरे मिलाने लायक तो रहे। वैसे कुछ वाकयो को छोड़ कर अभी तक यह प्रथा यथावत रही है। हमारे प्रधानमंत्री खुद को प्रधानसेवक या चौकीदार कहते है। उस पर विपक्षी नेता राहुल गांधी ने उन पर राफेल घोटाले का आरोप लगाते हुए चौकीदार ही चोर है का नारा दिया था। हमारे यहां किसी को भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चोर कहना बहुत ही गलत माना जाता है लेकिन राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी को सीधा इंगित करके अपनी सभाओं में चौकीदार चोर है के नारे लगवाते है। इसके लिए उनपर याचिका भी दायर की गई है।

लेकिन अभी जो विडियो वायरल हो रहा है वो व्यथित करने वाला है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें प्रियंका गांधी हैं और उनके सामने हैं कोई 20-25 बच्चे। ये बच्चे ज़ोर ज़ोर से जोश के साथ चौकीदार चोर है के नारे लगा रहे हैं और प्रियंका गांधी चेहरे पर मुस्कुराहट के साथ उनका हौसलाअफज़ाई करते हुई दिख रही हैं। इसके बाद बच्चे जोश-जोश में मोदी को गाली देने वाला नारा लगाने लगते हैं, जिसपर प्रियंका गांधी पहले मुंह पर हाथ लगाकर खुशी मिश्रित आश्चर्य व्यक्त करती है बाद में बच्चों को मना करते हुए कहती हैं कि ऐसा नहीं बोलो।

लेकिन यहां बात यह है कि चौकीदार चोर है वाला नारा भी बच्चों से लगवाना क्या सही है? क्या एक बड़ी नेता होने की नाते उनका फर्ज़ नहीं बनता था कि वो बच्चों से सवाल करे कि आखिर वो बीच दोपहरी विद्यालय ना जाकर यहां राजनीतिक कार्यक्रम में क्या कर रहे हैं? जिन बच्चों को राजनीति का ककहरा नहीं पता वे राजनीतिक बयानबाज़ी कर रहे थे, उसपर प्रियंका गॉंधी ने आपत्ति क्यों नहीं जताई?
सामान्यत: गाँव मोहल्ले में भी जब कोई बच्चा अपशब्दों का प्रयोग करता है, तो बड़े उन्हें डांट लगाते हुए पूछते हैं कि आखिर ये बातें उन्होंने कहां से सीखी, ताकि उस स्त्रोत या व्यक्ति को इंगित किया जा सके ताकि बच्चों को ऐसे लोगों से दूर रखा जाए, वरना वो भटक सकते हैं। लेकिन प्रियंका ने ऐसा कुछ नही किया, बल्कि उन्होंने इन नारों के बाद निकाली गाली को भी हल्के-फुल्के लहज़े में मना किया और वहां से निकल पड़ी। क्या उनका फर्ज़ नहीं था कि वो ऐसे कार्यकर्ता के प्रति कार्रवाई करें, जिन्होंने बच्चों को ऐसे नारे सिखाए?

नेतालोग अपनी राजनीति के चक्कर मे बच्चो को इस्तेमाल करे यह कहाँ तक जायज है? बच्चे जो कि भारत का भविष्य है, उनको तो अच्छी बातें सिखानी चाहिए। अगर नही भी सीखा सके तो कमसेकम ऐसी बात तो नही सिखानी चाहिए जो किसी के प्रति अवमानना सूचक हो। भारत माता की हम सभी सन्तान है तो जब तक पद पर है तब तक इस देश के प्रधानमंत्री आदरयोग्य है, यह सब जानते है तो बच्चो को क्यो नही बताया जाता?

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की अनन्त जयजयकार