कुछ सवालों का जबाब नही मिल सकता


लोकसभा चुनाव की पूरे देश मे अभी जबरदस्त धूम मची हुई है। सब लोग अपनी अपनी पार्टी के समर्थन में कार्य कर रहे है।
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लोकसभा चुनाव की पूरे देश मे अभी जबरदस्त धूम मची हुई है। सब लोग अपनी अपनी पार्टी के समर्थन में कार्य कर रहे है। जो किसी पार्टी से ताल्लुक नही रखते वो विश्लेषण कर रहे है। आजकल ऐसे लोग बहुत कम बचे है जो चुनावी गतिविधियों पर नजर न रखे और नजर रखते हुए अपनी राय न रखे। पहले के मुकाबले लोगो मे जागरूकता बढ़ी है। अब वो कोउ नृप होउ हमे क्या हानि वाली बात करने वाले लोग नही रह गए है।

आज हम बात हमारे क्षेत्र की ही करते है। कल हमारे सूरत के बड़े हिस्से को कवर करने वाले नवसारी लोकसभा क्षेत्र जिसमे सूरत के चार विधानसभा क्षेत्रो का समावेश है उस क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मौजूदा सांसद सी आर पाटिल ने अपना नामांकन भरा। पिछले दिनों आपने देखा और पढा होगा कि हमारे प्रधानमंत्री ने भी ट्विटर पर उनके कार्यो को अनुकरणीय बताते हुए अन्य सभी सांसदों को उनके कार्यों से सीख लेने का आग्रह किया था।

वैसे हम निरपेक्ष रूप में भी अगर मूल्यांकन करे तो सांसद के रूप में सी आर पाटिल का व्यक्तित्व अन्य सांसदों तथा जनप्रतिनिधियों से अलग नजर आता है। जहां एक वार्ड पार्षद भी अपने आप को तुर्रमखां समझते है वही सांसद होने के बावजूद पाटिल का स्वभाव सहजता से परिपूर्ण है तथा अपने निर्वाचन क्षेत्र के अलावा भी लोगो का काम वो करते रहते है। तभी ही कोई अगर यह पूछे कि सूरत का सांसद कौन है,तो जबाब ज्यादातर सी आर पाटिल ही मिलता है। क्योकि लोगो का जब काम पड़ता है तब उनके तथा उनके सहयोगियों के द्वारा उसका सम्पूर्ण संज्ञान लिया जाता है तथा यथासंभव काम को करवाकर आने वाले को पूर्ण सन्तुष्ट किया जाता है।

तभी कल जब वो नामांकन पत्र दाखिल करने नवसारी पहुंचे तो उनके साथ जनसैलाब उमड़ गया था। बड़ी संख्या में लोग उनके नाम घोषित होते ही उनके कार्यालय पर पहुंचे थे, वैसे ही उनके रोड शो में भी उनके साथ उनके समर्थकों ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज करवाई।
उनके नामांकन पत्र में दर्ज एफिडेविट ने हालांकि मेरे जैसे पत्रकारों के लिए कुछ सवाल तथा व्यापारी वर्ग के लिए कुछ जबाब जरूर छोड़ दिये है। मैं उनके आयकर रिटर्न की बात कर रहा हूँ।

सांसद पाटिल के द्वारा दाखिल जानकारी के अनुसार उनके आयकर विभाग के स्थायी खाता संख्या ABGPP6267P में वित्तीय वर्ष 2013-14 में उनकी आय एक करोड़ छियासी लाख रुपये थी जो एनडीए सरकार बनने के बाद कम होकर वित्तीय वर्ष 2015-16 में बत्तीस लाख रुपये ही रह गई। लेकिन वित्तीय वर्ष 2016-17 में जब प्रधानमंत्री मोदीजी ने नोटबन्दी लागू की थी उस वर्ष इनकी आय में काफी इजाफा हुआ तथा यह सीधे उन्नीस करोड़ से ऊपर पहुंच गई। लेकिन इसके अगले ही वर्ष लगता है सांसद श्री को जीएसटी ने परेशान कर दिया, जैसे कि आम व्यवसायी भी हुआ ही है, तभी उनकी आय वित्तीय वर्ष 2017-18 में कम होकर सिर्फ सत्तर लाख ही रह गई।

यह आंकड़े उन्होंने कल ही दाखिल किए है। अब सवाल यह है कि नोटबन्दी वाले पीरियड में आय इतनी बढी कैसे ओर व्यापारियों के लिए जबाब यह है कि जीएसटी के कारण अगर सांसद श्री की आय ही लुढ़ककर इतनी कम हो गई तो आप कौनसे बगीचे का अमरूद हो। क्षमा कीजियेगा, मैने यूंही उपमा दी है इसे अन्यथा मत लीजिएगा। लेकिन कही न कही जीएसटी तथा नोटबन्दी का असर उनकी आय पर पड़ा जरूर है। इसलिए मैं आगामी बनने वाली सरकार से यह दरख्वास्त जरूर करूँगा की वो हर एक दो साल में नोटबन्दी जरूर करे तथा जीएसटी के ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन करे ताकि देश समृद्धि की तरफ अग्रसर हो सके। आम व्यापारी का उदाहरण आप भले ही न माने पर एक सांसद के सोगन्धनामें मे उल्लेख किये विवरण को तो समझने का उपक्रम करे। देश की तरक्की भी इसी में निहित है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय।