भाई भाई का प्यार चमकती तलवार


भाई भाई का प्यार बहुत गहरा होता है पर कभी कभी वो स्वार्थ की भेंट चढ़ जाता है तब तलवारे चमक जाती है, मतलब म्यान से बाहर आ जाती है।
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एक डायलॉग हम जब बच्चे थे तब बोला करते थे, मतलब तो आज तक मुझे नही पता चला है पर वो बात कुछ इस प्रकार थी, भाई भाई का प्यार चमकती तलवार। अर्थ इसका गूगल में भी ढूंढने पर मेरे हिसाब से तो नही मिलेगा लेकिन जहाँ तक मेरा अनुमान है इसका आशय यह होगा कि भाई भाई का प्यार बहुत गहरा होता है पर कभी कभी वो स्वार्थ की भेंट चढ़ जाता है तब तलवारे चमक जाती है, मतलब म्यान से बाहर आ जाती है। यह कोई नई बात नही है। युगों युगों से चलता आया है। आजकल थोड़ा ज्यादा हो जाता है, मतलब प्यार भी ओर तकरार भी।

हाल ही में एक भाई का प्यार दूसरे पर चमकती तलवार बनकर टूटने की तैयारी में है। ओर यह तलवार तभी चमकती है जब घर पर पिता न हो, बस यही अभी बिहार में हो रहा है। पिता लालू यादव जेल में सजा काट रहे है और उनके दोनो बच्चो में बराबर की ठनी हुई है। लालू यादव के ऐसे तो 9 बच्चे है पर लड़के 2 ही है। उनमें से बड़ा तेजप्रताप हमेशा चर्चा में बना रहता है। कभी बांसुरी बजाकर तो भी हेण्डपम्प पर नहाकर, वो लोगो के बीच बने रहते है। हालांकि मैच्योरिटी वाली बात कम ही करते है, फिर भी लालू के बेटे है तो सत्ता तो विरासत में मिलेगी ही।

तेजप्रताप यादव ने गुरुवार को छात्र आरजेडी के संरक्षक पद से इस्तीफा दे दिया था। तेजप्रताप ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस सम्मेलन बुलाया था, जिसके बारे में कहा गया था कि वे लोकसभा चुनाव में अपनी ओर से दो सीट पर अपना उम्मीदवार उतारने चाहते हैं, जिसकी वे यहां घोषणा करेंगे। लेकिन यह प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द कर दिया गया ओर इसके कुछ ही देर बाद तेजप्रताप ने छात्र आरजेडी के संरक्षक पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि छात्र राष्ट्रीय जनता दल के संरक्षक के पद से मैं इस्तीफा दे रहा हूं। नादान हैं वो लोग जो मुझे नादान समझते हैं। कौन कितना पानी में है सबकी है खबर मुझे।

अब ऐसा उनको पता नही है कि लगभग पूरा देश ही आपको नादान ही समझता है। और अपनी नादानी का उदाहरण आप गाहेबगाहे देते भी रहते हो। अगर यह बात समझ मे न आये तो कभी खुद का ही वीडियो देख लेना। वो साइकिल पर जिसे बैठाया था उसे भी छोड़ दिया तो भाई का भी नंबर आ ही गया।

लेकिन बात इस्तीफे पर ही खत्म नही हुई क्योकि वो तो शुरुआत थी। हालिया घटनाक्रम में तेज प्रताप यादव ने शनिवार को ऐलान कर दिया कि जहानाबाद सीट से उनके उम्मीदवार चंद्रप्रकाश आरजेडी उम्मीदवार सुरेंद्र यादव के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।
दरअसल तेजप्रताप अपने समर्थक चंद्रप्रकाश के लिए जहानाबाद से टिकट दिलाना चाहते थे,तथा इसके अलावा वह शिवहर से अंगेश सिंह को टिकट दिलाना चाहते थे। तेजस्वी ने शुक्रवार को जहानाबाद से सुरेंद्र यादव को टिकट देने की घोषणा की, जबकि शिवहर से अभी प्रत्याशी घोषित नहीं हुआ है। शनिवार को चंद्रप्रकाश अपने समर्थकों के साथ तेजप्रताप से मिलने पहुंचे।

तेजप्रताप ने कहा कि पार्टी में युवाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है। तेजस्वी से मैंने जहानाबाद का टिकट चंद्रप्रकाश को देने के लिए कहा था। वह कहते रहे कि देखेंगे, टिकट देंगे। उन्होंने मुझे असमंजस में रखा। इसी बीच सुरेंद्र यादव के नाम की घोषणा हो गई। वह तीन बार से हार रहे हैं। लोग उन्हें पसंद नहीं कर रहे हैं। जो जनता के लिए काम करेगा, लोग जिसे पसंद करेंगे, उसे टिकट देना चाहिए। मैंने चंद्रप्रकाश से कहा है कि निर्दलीय लड़ें। 24 अप्रैल को उनका नामांकन होगा। मैं उन्हें सपोर्ट करूंगा। नामांकन के समय भी जाऊंगा।
बस अब तो आप समझ ही गए होंगे कि प्यार के बाद वाली भारी तकरार होने वाली है वो भी उस समय जब महागठबंधन से कुछ लोग अपेक्षाएं रख रहे है। उस समय गठबंधन के एक घटक दल का अंदरूनी झगड़ा नाव को हिलोरे जरूर खिलायेगा, बाकी तो इस भारत भूमि के मतदाता जाने जो कभी कभी प्रत्याशियों की योग्यता जांचे बिना ही वोट दे देते है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय।