भाजपा के घोषित शत्रु हुए शत्रुघ्न


शॉटगन के नाम से मशहूर फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कल भाजपा को छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया।
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कल भाजपा का स्थापना दिवस था। सभी जगह समारोह पूर्वक वो इस तरह से मनाया गया कि आचार संहिता भी भंग न हो। हालांकि हमारे सूरत में एक जगह आचार संहिता भंग होने की शिकायत विपक्षी पार्टी द्वारा की गई है पर वो भाजपा स्थापना दिवस का कार्यक्रम नही था। वराछा में भाजपा के नवनियुक्त महामंत्री दामजी मवाणी के अभिनन्दन के लिए उनके प्रशंसकों ने पटाखे फोड़े थे जो विपक्ष की नजर में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन था। लेकिन कल पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर झटका लगा। शॉटगन के नाम से मशहूर फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कल भाजपा को छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया।

वैसे राजनीति में यह बड़ी बात नही है। ऐसा अक्सर होता रहता है कि बड़े नेता भी अपना सुरक्षित स्थान ढूंढने तथा अपने अस्तित्व को टिकाए रखने के लिए पार्टी बदल लेते है। ऐसे काफी उदाहरण पिछले लोकसभा चुनाव में देखे गए थे। लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा ने वैसे तो तब से मन बना रखा था जब से उन्हें मन्त्रीमण्डल में जगह नही मिली थी। लेकिन वो आशान्वित थे कि कभी तो उनका वक्त फिर से लौटेगा तथा उन्हें फिर से तवज्जो दी जाएगी। लेकिन वो हसरतें मुकम्मिल मुकाम नही पा सकी। यशवंत सिन्हा के साथ काफी महीनों तक विद्रोह का बिगुल फूंकते रहे लेकिन पार्टी आलाकमान ने बिल्कुल भी अपना ध्यान उनकी बातों पर नही दिया। आखिरकार जब आखिरी आशा पटना साहिब सीट पर उनकी उम्मीदवारी वाली भी खत्म हो गई तो उन्होंने शायद पार्टी छोड़ना ही श्रेयस्कर समझा होगा।

वैसे शत्रुघ्न सिन्हा उन दिनों में भाजपा में आये थे जब भाजपा संघर्षरत थी। 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस अपनी वापसी कर चुकी थी। तब लालकृष्ण आडवाणी दो जगहों से चुनाव लड़े थे और दोनो ही जगह जीत भी गए थे। नियम के मुताबिक उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ी तब उन्होंने नई दिल्ली सीट को छोड़ दिया था, जहां से उन्होंने फिल्म अभिनेता राजेश खन्ना को हराया था। कांग्रेस ने उपचुनाव में फिर राजेश खन्ना को ही अपना उम्मीदवार बनाया, तब लालकृष्ण आडवाणी ने शत्रुघ्न सिन्हा को भाजपा जॉइन करवा कर राजेश खन्ना के सामने लड़वाने का निर्णय लिया। हालांकि यह उपचुनाव वो हार गए लेकिन उनकी धुंआधार इंट्री भाजपा में हो गई।

इस चुनाव के बाद शत्रुघ्न सिन्हा बीजेपी के स्टार प्रचारकों में शामिल हो गए। जगह-जगह उन्हें बुलाया जाने लगा। अटल बिहारी वाजयेपी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं ने शत्रुघ्न को खूब महत्व दिया और इसका फायदा पार्टी को समय-समय पर मिलता रहा। 1996 में बिहार से बीजेपी ने शत्रु को राज्यसभा भेजा। कार्यकाल खत्म होने पर शत्रुघ्न दोबारा राज्यसभा पहुंचे। अटल बिहार वाजपेयी ने 2002 में उन्हें अपनी सरकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बनाया। बाद में 2003 में उनका मंत्रालय बदलकर उन्हें जहाजरानी मंत्री बनाया गया। 2004 में कांग्रेस सत्ता में आई और शत्रुघ्न का मंत्री पद गया लेकिन वह बीजेपी के साथ डटे रहे और जमकर उसके लिए प्रचार किया।

2009 चुनाव आडवाणी के नेतृत्व में लड़ा गया तब उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा को बिहार की पटना साहिब सीट से चुनाव में उतारा। शत्रुघ्न ने यहां से राष्ट्रीय जनता दल के विजय कुमार को 1,66,700 वोटों के अंतर से हरा दिया। जबकि इसी सीट पर कांग्रेस के टिकट पर उतरे टीवी कलाकार शेखर सुमन को मात्र 60,000 वोट मिले थे। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी पर आडवाणी का कंट्रोल खत्म हो गया तथा नरेंद्र मोदी की पकड़ मजबूत हो गई थी। तब वर्तमान में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी पटना साहिब से लड़ना चाहते थे लेकिन बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने शत्रुघ्न का दावा कमजोर नहीं होने दिया और उन्हें फिर से टिकट दिला दिया। शत्रुघ्न ने अपने हमदर्दों का भरोसा कायम रखा और भोजपुरी फिल्मों के अमिताभ बच्चन कहे जाने वाले कांग्रेस कैंडिडेट कुनाल सिंह को 2,65,805 वोटों से हराया।

लेकिन वो तब तक हाशिये पर आ गए थे। उनको राजनीति की पाठशाला में प्रवेश दिलवाने वाले लालकृष्ण आडवाणी भी मार्गदर्शक मंडल में शामिल हो गए थे जो अब मार्गदर्शक से दर्शक मण्डल में आ गए है तो शत्रुघ्न का भी दावा भाजपा में खत्म हो गया क्योकि वो खामोश कम और फायर ज्यादा करने लगे।

अब वो औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हो गए है। तथा पार्टी में शामिल होने के 3 घंटे बाद ही कांग्रेस ने शत्रुघ्न को पटना साहिब से उम्मीदवार बना दिया। भाजपा ने इस सीट से रविशंकर प्रसाद को टिकट दिया है।

शत्रुघ्न के मुताबिक उन्होंने भारी मन से पार्टी छोड़ी है। लेकिन क्या मन को हल्का रखकर वहां की जनता अलग चिन्ह को मंजूर करती है या नही? यह तो वक्त ही बताएगा पर एक दूसरे सिन्हा भी वहां है शायद उनकी नाराजगी इनको फायदा कर जाए।

आगे आगे देखते है होता है क्या?

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय