सेना सिर्फ देश की, न किसी व्यक्ति विशेष की


भारत के संविधान में जो सबसे अच्छी और थोड़ी खराब बात है वो है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
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भारत के संविधान में जो सबसे अच्छी और थोड़ी खराब बात है वो है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। वैसे जब हमको स्वतंत्रता मिली थी तो इसकी कल्पना सबसे पहले की गई होगी। क्योकि जब हम परतंत्र थे तब तक हमारी अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध ही था। अगर कोई भूले भटके अगर शासन के विरुद्ध या तत्कालीन गवर्नरों अफसरों के विरुद्ध कुछ भी कह देता या लिख भी देता तो उसे तुरन्त सज़ा का प्रावधान था। उस समय इंडियन पीनल कोड तो था पर हमारा खुद का कोई उस पर नियंत्रण नही था। यह भारतीय दंड संहिता जो आज भी अपराधों के दण्ड की व्यवस्था करती है वो वही 1862 वाली ही है। राजद्रोह की धारा 124 भी वही है जिसके अंतर्गत हमारे स्वतन्त्रता सेनानियों तथा पत्रकारों को दण्ड भोगना पड़ा था। आईपीसी में समय समय पर परिवर्तन जरूर हुआ है। जैसे कि पिछले साल ही दो धाराएं खत्म कर दी गई थी। कौनसी थी वो आपको बेहतर याद होगा।

लेकिन संविधान के अनुच्छेद 19ए का फायदा राजनेता ओर पत्रकार सर्वाधिक उठाते है। हालांकि इसमें कुछ बाध्यताएं है परन्तु जो सत्ताधीश होता है उसके लिए तो सब माफ होता ही है।

हाल ही में पुलवामा हमले तथा एयर स्ट्राइक के बाद नेताओ की जबानी जंग शायद फ़ौज से भी ज्यादा तीव्रता से जारी है, नेतागण सेना को भी लपेटने तथा उसका राजनैतिक फायदा उठाने से बाज नही आ रहे है।

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग़ाज़ियाबाद में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह के चुनाव प्रचार में भारतीय सेना को मोदी जी की सेना कहा था। योगी आदित्यनाथ ने ग़ाज़ियाबाद में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि कांग्रेस के लोग आतंकवादियों को बिरयानी खिलाते हैं और मोदी जी की सेना आतंकवादियों को गोली और गोला देती है।

इसे लेकर विपक्षी पार्टियों ने तो आपत्ति जताई ही, कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी आपत्ति जताते हुए कहा है कि सेना देश की होती है, किसी नेता की नहीं होती है। वैसे यह सही है कि सेना तो देश की ही होती है, नियंत्रण भले ही सरकार का होता है। हर अच्छे और बुरे निर्णय की जिम्मेदार भले ही सरकार होती है पर सरकार के सर्वेसर्वा की सेना नही होती है।

जिसके चुनाव प्रचार में यह कहा गया था उन जनरल वीके सिंह से एक इंटरव्यू में पूछा गया कि क्या भारतीय सेना को मोदी जी की सेना कहना उचित है? इस सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि बीजेपी के प्रचार में सब लोग अपने आप को सेना भी बोलते हैं। लेकिन हम किस सेना की बात कर रहे हैं? क्या हम भारत की सेना की बात कर रहे हैं या पोलिटिकल वर्कर्स की बात कर रहे हैं? मुझे नहीं पता कि क्या संदर्भ है। अगर कोई कहता है कि भारत की सेना मोदी जी की सेना है तो वो ग़लत ही नहीं, वो देशद्रोही भी है। भारत की सेनाएं भारत की हैं, ये पॉलिटिकल पार्टी की नहीं हैं। जनरल सिंह ने आगे कहा कि भारत की सेनाएं अपने आप के अंदर तटस्थ हैं। इस चीज़ में सक्षम हैं कि वो राजनीति से अलग रहें। पता नहीं कौन ऐसी बात कर रहा है। एक ही दो लोग हैं जिनके मन में ऐसी बातें आती हैं क्योंकि उनके पास तो कुछ और है ही नहीं।

इससे पहले एडमिरल रामदास जो भारत की नौसेना के प्रमुख रहे हैं तथाजनरल हुड्डा जो उत्तरी कमांड के हेड रहे हैं इन दोनों ने कहा था कि सेना का राजनीतिकरण हो रहा है। इस पर वीके सिंह ने स्पष्टीकरण दिया कि उन्होंने राजनीतिकरण नहीं कहा। बल्कि उन्होंने कहा था कि सेना की उपलब्धियों को राजनीतिक हित साधने के लिए लगता है कि इस्तेमाल हो रहा है। वहीं डीएस हुड्डा ने कहा कि ऐसा नहीं करना चाहिए।किसी ने ये नहीं कहा कि राजनीतिकरण हो रहा है।

अच्छा लगा जनरल साहब, वैसे राजनेता अगर सत्य की भाषा बोलते हुए अपने ही पक्ष के व्यक्ति की गलती निकाल कर भुलसुधार करे तो इससे अच्छी क्या बात हो सकती है। देश की सेना वाकई में किसी व्यक्ति विशेष की नही हो सकती है। सेनिको की निष्ठा राजनैतिक कार्यकर्ताओ के समान नही होती है। उनकी निष्ठा इस सर्व आश्रयदात्री भारत माता के प्रति ही होती है और अपनी इस माता के लिए सर्वोच्च देने में वो सदैव तत्पर रहते है। हमे हिन्द की सेना पर गर्व है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय