हार्दिक पटेल रिहाई से एक कदम दूर : 48 घंटे में छोडऩा होगा गुजरात


सूरत। विसनगर के विधायक के कार्यालय में तोडफ़ोड़ मामले में आज सोमवार को हाईकोर्ट में हार्दिक पटेल की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। कोर्ट के निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हुई है। राजद्रोह के दो मामलों में हाईकोर्ट से पहले ही हार्दिक पटेल को सशर्त जमानत मिल चुकी है।
11 जुलाई, सोमवार को दोपहर बाद हाईकोर्ट में हार्दिक की जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। हाईकोर्ट से यदि हार्दिक को जमानत मिल जाती है तो जेल से रिहा कर दिया जाएगा। जानकारों की मानें तो सोमवार को दोनों पक्षों की होने वाली दलीलों पर हार्दिक की रिहाई का सारा दारोमदार टिका हुआ है। सोमवार को यदि दलील पूरी न हो सकी तो दूसरे दिन इस पर सुनवाई होगी। इसके अलावा कोर्ट तुरंत फैसला सुनाने की बजाय एक दो दिन का समय ले सकती है। सोमवार को हार्दिक की जमानत याचिका मंजूर होने की संभावना बहुत ही कम है। सोमवार को यदि जमानत मिल भी जाती है तो तुरंत जेल से बाहर आना संभव नहीं है। जेल में बंद आरोपी की रिहाई के लिए कोर्ट से आदेश जारी किया जाता है। जेल से रिहा होने के 48 घंटे के भीतर ही हार्दिक को गुजरात की सीमा छोड़ देनी होगी। 6 महीने तक हार्दिक जहां रहना चाहते हो वहां पहुंच जाएं। हार्दिक की संपूर्ण व्यवस्था का निरीक्षण किया जाएगा।

हार्दिक के 6 महीने गुजरात से बाहर रहने का गेम प्लान
जेल से रिहा होने के बाद हार्दिक कहां रहेंगे? यह सवाल पाटीदार आरक्षण आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं-अग्रणियों, सरकार और राजनैतिक दलों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। पिछले साल अक्टूबर महीने में गिरफ्तार हार्दिक पटेल को राजद्रोह मामले में 6 महीने से गुजरात से बाहर रहने की शर्त पर जमानत मिली है। जेल से रिहा होने के बाद हार्दिक पटेल को 6 महीने गुजरात से बाहर रहना होगा। हार्दिक 6 महीने से कहां रहेगा इस पर अभी से चर्चा शुरु हो गयी है। कहा जा रहा है कि हार्दिक गुजरात के नजदीक राजस्थान या मुंबई को रहने के लिए चुन सकता है। साथ ही हार्दिक के दिल्ली में रहने का तर्क भी दिया जा रहा है।
हार्दिक पटेल ने गुजरात से बाहर रहते हुए पाटीदार आरक्षण आंदोलन को चालू रखने की बात की है। ऐसे हार्दिक गुजरात से सटे राज्य को रहने के लिए चुन सकता है।

दिल्ली

कहा जा रहा है कि हार्दिक पटेल जेल से रिहा होने के बाद सबसे पहले अपने घर विसनगर जाएगा। हार्दिक पटेल को जमानत दिलाने में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मुख्य भूमिका मानी जा रही है। ऐसी स्थिति में हार्दिक कुछ दिनों तक दिल्ली में भी ठहर सकता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को चुनाव लडऩे के लिए एक सक्षम चेहरे की जरूरत है। वह हार्दिक भी हो सकता है? हालांकि हार्दिक ने चुनाव लडऩे से साफ इंकार किया है। हार्दिक का प्रचार के लिए उपयोग किया जा सकता है। यदि हार्दिक पटेल भाजपा में नहीं जुडऩा चाहे तो दिल्ली में रहने का दूसरा फायदा यह होगा कि वहां अन्य राजनैतिक दलों के साथ आरक्षण के मुद्दे पर वह खुलकर चर्चा कर सकेगा। केजरीवाल की आम आदमी पार्टी खुलकर हार्दिक की बातें कर रही है। हार्दिक पटेल पाटीदार समाज का राष्ट्रीय नेता बन सकता है। जिसका फायदा उसे आगामी दिनों में मिलेगा। दिल्ली में गुजरातियों खास करके पाटीदारों की संख्या अधिक है। हार्दिक के लिए दिल्ली में गुजरात भवन या गुजराती समाज रहने के लिए सबसे उत्तम माना जा रहा है।

राजस्थान

कहा जा रहा है कि हार्दिक पटेल जेल से रिहा होने के बाद दिल्ली का चक्कर तो लगाता ही रहेगा। हार्दिक पटेल गुजरात से सटे किसी राज्य या शहर, जिले को भी रहने के लिए चुन सकता है। इसका फायदा यह होगा कि पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता, कार्यकर्ता हार्दिक से आसानी से मिल सकेंगे। इस प्रकार का राज्य राजस्थान हो सकता है। राजस्थान में आरक्षण को लेकर गुर्जरों का आंदोलन चल रहा है। पाटीदार आरक्षण आंदोलन को गुर्जर समाज ने खुलकर समर्थन किया है। राजस्थान गुजरात की सीमा से सटे होने के कारण हार्दिक को यहां ठहरने में काफी आसानी होगी। पाटीदार अग्रणियों का कहना है कि गुर्जर समाज ने हार्दिक के रहने की व्यवस्था करने का वायदा किया है।

गुंबई

मुंबई में भी हार्दिक पटेल रह सकता है। मुंबई में पाटीदारों की संख्या सबसे अधिक है। हार्दिक के परिवार के कई लोग भी मुंबई में रहते हैं। मुंबई गुजरात के नजदीक होने से पाटीदार आंदोलन को चलाने में कोई परेशानी नहीं होगी। महाराष्ट्र में भी भाजपा की ही सरकार है। मुंबई में रहने का हार्दिक को एक फायदा यह होगा कि शिवसेना हार्दिक का खुलकर मदद करेगी। हार्दिक ने अनेक बार कहा है कि बाला साहेब ठाकरे और शिवाजी उनके आदर्श हैं। हार्दिक के बहाने शिवसेना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर भाजपा पर तीखा हमला कर चुकी है। हार्दिक के आंदोलन को आगे बढाने के लिए मुंबई में शिवसेना का साथ मिल सकता है।

हरियाणा

हरियाणा में भी जाट आंदोलन चल रहा है। हार्दिक पटेल पाटीदार आरक्षण आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए हरियाणा में कुछ दिन ठहरकर नई योजना बना सकते हैं। कई नेताओं ने हार्दिक को हरियाणा में रहने का आफर भी दिया है।

उत्तर प्रदेश

6 महीने गुजरात से रहने की चर्चाओं में एक बात यह भी सामने आयी है कि हार्दिक पटेल उत्तर प्रदेश में भी रह सकता है। उत्तर प्रदेश में कुर्मी (पटेल) की संख्या अधिक है। अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पाटीदार फे क्टर को मजबूत करने के लिए हार्दिक पटेल उत्तर प्रदेश के कुर्मी नेताओं से मिलकर इसे राष्ट्रीय स्तर पर ले जा सकता है।

आगे क्या होगा?

हार्दिक पटेल के जेल में जाते ही पाटीदार आंदोलन शांत हो गया था। आंदोलनकारियों के काफी प्रयास के बावजूद हार्दिक को जेल में डाल दिया गया। अब जबकि हार्दिक पटेल जेल से रिहा हो रहा है तो स्वाभाविक है कि फिर से पाटीदार आरक्षण आंदोलन की शांतिपूर्ण ढंग से शुरुआत होगी। हार्दिक के करीबी लोगों का कहना है कि जेल में रहकर हार्दिक काफी परिपक्व हो चुका है। अब आंदोलन के बारे में हार्दिक सोच समझकर ही कोई निर्णय लेगा। कोर्ट ने हार्दिक को 6 महीने गुजरात से बाहर रहने का आदेश दिया है। हार्दिक 6 महीने गुजरात से बाहर अलग-अलग राज्यों में घूमकर योजनाएं बनाएगा। हार्दिक को 6 महीने तक गुजरात की शांति भंग न हो ऐसा प्रयास भी करना होगा। 6 महीने तक हार्दिक अलग-अलग राज्यों में घूमकर शांतिपूर्ण ढंग से 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले पाटीदार आरक्षण आंदोलन को फिर से सक्रिय कर सकेगा।

पास की कोर कमिटी बिखर सकती है?

पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति की कोर कमिटी के सदस्य केतन पटेल, चिराग पटेल और दिनेश बांभणिया को कोर्ट ने सशर्त जमानत पर रिहा किया है। जिसमें केतन और चिराग को अहमदाबाद तो दिनेश को गांधीनगर न छोडऩे की शर्त शामिल है। वहीं हार्दिक को 6 महीने गुजरात से बाहर रहने की शर्त रखी गयी है। मंजूरी के बिना पाटीदार आरक्षण आंदोलन की कोर कमिटी के सदस्यों का एक साथ मिल पाना काफी मुश्किल है। हार्दिक पटेल आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए कुछ नए चेहरों को कोर कमिटी में शामिल कर सकते हैं। इससे पुरानी कोर कमिटी के टूटने का डर है।