हांसोट दंगे में सरकार ने समय पर कार्यवाही नहीं की : कांग्रेस


भरूच । कांग्रेस ने भरूच जिले के हांसोट में हुए दंगों को लेकर राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने जानकारी होने के बावजूद समय पर उचित कार्यवाही नहीं की। कांग्रेस ने दंगे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख रुपए की सहायता दी है।
भरुच जिले के हांसोट में सांप्रदायिक दंगों में जान गंवाने वाले तीन निर्दोष युवकों के परिजनों को सांत्वना देने और सदभावनापूर्ण माहौल कायम करने के प्रयास के तहत कांग्रेस के एक उच्च प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय लोगों से प्रत्यक्ष मुलाकात की। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल के आदेश पर हांसोट पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अर्जुन मोढवाडिया, विधानसभा के नेता विपक्ष शंकरसिंह वाघेला, पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. तुषार चौधरी, पूर्व सांसद कुंवरजीभाई बावलिया, सोमाभाई पटेल, सूरत के पूर्व महापौर कदीर पीरजादा, पूर्व विधायक इकबाल पटेल और महमद पटेल ने दंगों में जान गंवाने वाले तीन युवकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें एक-एक लाख रुपए की सहायता दी।
पीडि़त परिवारजनों समेत स्थानीय लोगों से मुलाकात के बाद कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि हांसोट और आसपास के गांवों में पिछले एक महीने से सांप्रदायिक तत्त्व तनाव पैदा कर शांतिपूर्ण माहौल को बिगाडऩे का प्रयास कर रहे थे। आसपास के इलाकों में भाजपा नेताओं द्वारा झिंगा के गैरकानूनी तालाब बनाए गए, जिसके ािलाफ स्थानीय ग्रामीणों में भाजपा सरकार के खिलाफ रोष व्याप्त था। इस रोष से ध्यान बंटाने के प्रयासों के तहत छोटी घटना को सांप्रदायिक स्वरूप देने की कोशिश की गई थी। राज्य सरकार और प्रशासन को तनावपूर्ण माहौल की जानकारी होने के बावजूद कोई ऐतिहाती कदम नहीं उठाए गए।
नतीजतन तीन निर्दोष जवान सांप्रदायिक दंगों की भेंट चढ़ गए और कई गंभीर रूप से घायल हो गए। कई लोगों के घरों में तोडफ़ोड़ और गन्ने के खेत में आग लगाने की घटना से क्षेत्र में अशांति, असुरक्षा और दहशत का माहौल कायम है। लोगों के जान-माल की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य और केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार की है। लेकिन सुरक्षा देने में निष्फल भाजपा सरकार आग में घी डालने का काम कर रही है। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के नेताओं ने स्थानीय लोगों से भाईचारा और मिल जुलकर रहने के साथ ही शांति बनाए रखने की अपील की है। ऐसी घटनाओं के जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने समेत निर्दोषों को बेवजह फंसाया नहीं जाए।
इसके लिए स्थानीय लोगों को कांग्रेस नेताओं ने भरोसा दिलाया है।

अंकलेश्वर नगरपालिका के पदाधिकारियों के इस्तीफे से राजनैतिक भूकंप

भरुच। उत्तरायण के दिन हुए सांप्रदायिक तनाव के बाद हांसोट जल उठा और तीन निर्दोष युवकों की इस दंगे में मौत हो गयी थी। गत रोज मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने भी तनाव की घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए जानकारी दी कि आखिर दंगे क्यों रुक नहीं रहे। इन सभी बातों के बीच रविवार को पूरे दिन भाजपा में हाइवॉल्टेज ड्रामा का दर्शन हुआ। अंकलेश्वर और हांसोट में भाजपा के पदाधिकारियों ने अपना इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि विकास के कार्य नहीं हो रहे हैं और हमारी पेशकश को कोई सुन नहीं रहा जिससे हांसोट जैसे घटनाएं हुई। पूर्व जिला पंचायत प्रमुख और भाजपा की महिला अग्रणी शांताबेन पटेल ने कहा कि विकास के कार्य नहीं होने से हमने इस्तीफा दिया है। हांसोट तहसील पंचायत प्रमुख किर्तीबेन पटेल ने भी दो महीने पहले विधायक के साथ पेशकश की थी, किंतु कोई कार्यवाही नहीं हुई। अंकलेश्वर तहसील भाजपा के महामंत्री हितेन्द्र सोलंकी ने कहा था कि हांसोट दंगे में निर्दोष लोगों को सहन करना पड़ रहा है, जो असली अपराधी हैं उनके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। झाड़ेश्वर सर्किट हाउस में जिला प्रमुख योगेशभाई पटेल, केन्द्रीय मंत्री मनसुखभाई वसावा, राज्यसभा से सांसद भारत सिंह परमार, विधायक दुष्यंतभाई पटेल, विधायक अरुण सिंह रणा, जिला पंचायत प्रमुख मनहरभाई गोहिल के समक्ष अंकलेश्वर तहसील भाजपा के प्रमुख नारणभाई पटेल, महामंत्री हितेन्द्र सोलंकी, उप-प्रमुख हरेश मास्टर सहित संगठन की सभी बॉडी के 16 पदाधिकारियों, तहसील पंचायत के प्रमुख सहित सभी 14 सदस्यों और दूसरे पदाधिकारियों और कार्यकर्ता सहित 80 भाजपाइयों ने इस्तीफा देकर अपनी नाराजगी व्यक्त की और आक्रोश दिखाया। इतना ड्रामा होने के बावजूद भी भाजपा के प्रमुख योगेश पटेल ने मानो कुछ हुआ ही नहीं हो ऐसा करके अपना बचाव किया। साथ ही इस्तीफे की बात से अपना पल्ला झाड़ लिया। उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले दो युवकों की अंतिम यात्रा में गये विधायक ईश्वर सिंह पटेल का लोगों ने विरोध किया था। जिससे ईश्वर सिंह पटेल को उल्टे पैर भागना पड़ा था।