वराछा को-ऑपरेटिव बैंक : विपुल को ब्याज देने और लेने वालों की सूची तैयार करेगा आयकर विभाग


रिटर्न फाइल में भी घपलेबाजी : एम्ब्रोडरी का धंधा दिखाकर ब्याज पर देता था रूपए
सूदखोरी से विपुल जसोलिया महीने में लाखों रूपए कमाता था
सूरत। वराछा को.ओपेरटिव बैंक में एक साथ 36 खातों में 1.11 करोड़ की रकम जमा करानेवाले फाइनांसर विपुल जसोलिया एम्ब्रोइडरी व्यावसाय के बारे में आयकर विभाग में रिटर्न फाइल करता था और धंधा ब्याज पर रूपया देने का करता था। विपुल ने मार्केट से 60 करोड़ रूपया लेकर एक प्रतिशत पर लेकर उसे दो-ढाई प्रतिशत ब्याज पर पैसा उधार देता था। पांच वर्ष से फाइनांस का धंधा करता विपुल महीने के लाखों रूपये कमाता था। सोमवार को सुबह ही सर्वे पूरा हुआ। विभाग अब विपुल इस बात की जांच कर रही है कि विपुल किससे रूपए उधार में लाता था और किस-किस को उधार में देता था? इसकी सूची तैयार कर रहा है। आयकर विभाग की इन्वेस्टीगेशन विंग द्वारा वराछा को.ओपरेटिव बैंक में जांच कर रही थी उसी समय एक साथ 30 नए शुरू किए गए खातों में एक ही दिन में ढाई लाथ रूपया हुआ था। उसकी सभी स्लिपों पर किसी के हस्ताक्षर नहीं किए गए थे। जिसके आधार पर अधिकारियों द्वारा बैंक के मैनेजर से पूछताछ के साथ सीसीटीवी कैमेरा के फूटेज चेक कर ही रहे थे कि बैंक में इन खातों में रूपए जमा करानेवाला व्यक्ति पासबुक में एंट्री कराने के लिए पहुंचा तो अधिकारियों ने पकड़ लिया। पकड़ाए मुकंद जसवाणी ने बताया कि उसने अपने सेठ का रूपया खातों में जमा कराया था। उसने अपन सेठ कानाम विपुल जसोलिया बताया। उसके कहने के अनुसार विभाग के अधिकारी जब वराछा स्थित फाइनांसर की आफिस में पहुंचे उसके पहले विपुल तमाम कागजों किसी अन्य स्थान पर ठिकाने लगाकर आफिस खाली करके फरार हो चुका था। विभाग द्वारा लगातार एक दिन तक छानबीन की गयी। उसी समय उस आफिस में चपरासी वहीं आ पहुंचा। उसे रोककर पूछताछ की गयी तो उसने बताया कि सभी कागजात उत्राण स्थित मुकंद के मकान में रखवा दिया है। इस आधार पर आयकर विभाग ने छापा मारा तो विपुल का भांडा फूट गया। सर्वे के दरमियान अधिकारियों को एक हजार से भी अधिक अलग-अलग कागजों वाली फाइल बरामद हुई। जिसे जप्त किया गया है। विपुल ने स्वीकारी किया कि वहां से मिले 15 लाख की 2000 हजार की नई नोट उसके ही हैं। पूछताछ के दौरान विपुल जसोलिया ने बताया कि एम्ब्रोइडरी के व्यापार का रिटर्न पाइल करता था लेकिन व्यवसाय फाइनांंस का करता है। एक प्रतिशत पर रूपए लेकर जरूरतंद को ढाई प्रतिशत की दर से ब्याज पर देता था।